हरियाणा और पंजाब में बड़े पैमाने पर पराली जलाए जाने के कारण बुधवार को दिल्ली-एनसीआर सहित पूरा उत्तर भारत जहरीले धुएं की चादर से ढक गया। दिवाली बीतने के तीन दिन बाद भी आसमान में धूंध की चादर पसरी रही। दम घोंटू वातावरण में लोग बेहद दूषित हवा सांस में लेते रहे। आंखों में जलन और सांस लेने में हो रही दिक्कत के बीच दोपहर तक सूरज के दर्शन नहीं हुए।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली के साथ फरीदाबाद व गुड़गांव का एयर क्वालिटी इंडेक्स चार सौ के पार था। फरीदाबाद लगातार दूसरे दिन देश का सबसे प्रदूषित शहर था।
खास बात यह कि धूल के कणों (पीएम 10 व 2.5) का स्तर बेहद खतरनाक था। दिल्ली के कई स्थानों पर नुकसानदेह पीएम 2.5 पीएम 10 से ऊपर पहुंच गया। विशेषज्ञों की मानें तो बारीक धूल कण बेहद खतरनाक हैं। इससे फेफड़ों को नुकसान हो सकता है, जबकि आंख में जलन महसूस की गई।
सीपीसीबी की तरफ से जारी एयर क्वालिटी इंडेक्स में फरीदाबाद का सूचकांक 468 था। जबकि गुड़गांव का 456 व दिल्ली का सूचकांक 432 था। तीनों शहर सबसे प्रदूषित शहरों की लिस्ट में शामिल थे। दूसरी तरफ नोएडा समेत दिल्ली में सिस्टम फॉर एयर क्वालिटी व वेदर फोरकास्टिंग रिसर्च (सफर) के सभी केंद्रों पर पीएम का स्तर मानक से पांच गुना से भी ज्यादा था। इस सीजन में पहली बार दिल्ली समेत पूरे एनसीआर में प्रदूषण का स्तर खतरनाक पर पहुंचा है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि बुधवार को हवा की रफ्तार में अचानक गिरावट दर्ज की गई। वहीं, तापमान भी कम हुआ। यही वजह रही कि पूरे एनसीआर में पीएम के स्तर में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई। पंजाब के कई जिलों में इस वजह से सड़क और हवाई यातायात पर असर पड़ा। अमृतसर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर कई फ्लाइटें देरी से पहुंचीं। वहीं कोहरे के कारण सड़क हादसे में चार लोगों की जान चली गई जबकि 21 लोग घायल हो गए।
हरियाणा के कई जिलों मेें भी दिनभर धुंध की घनी परत छाई रही। इससे लोगों का दम घुटता रहा और आंख व नाक में जलन की परेशानी होती रही। दम घोंटू धुएं के कारण वाहन चालकों को भारी दिक्कत झेलनी पड़ी। धुएं की परत इतनी घनी थी कि दोपहर तक सूरज के दर्शन नहीं हुए। इस धुंध के पीछे मौसम वैज्ञानिक पराली जलाने और पटाखों से होने वाले प्रदूषण को खास कारक मान रहे हैं।