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वीके सिंह ने पूर्व सैनिक की मानसिक स्थिति पर उठाए सवाल, कहा- जरूरी नहीं OROP ही हो आत्महत्या की वजह

Thu, 03 Nov 2016 01:08 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : file photo
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वन रैंक वन पेंशन (ओआरओपी) मामले में पूर्व सैनिक रामकिशन ग्रेवाल आत्महत्या प्रकरण पर जारी सियासी बवाल के बीच विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह ने पूरे मामले की जांच की जरूरत बताई है। उन्होंने कहा कि आत्महत्या की ओआरओपी की जगह दूसरे वजहें भी हो सकती हैं। अभी किसी को नहीं पता कि पूर्व सैनिक की मानसिक स्थिति कैसी थी। ऐसे में इस मामले की जांच की जरूरत है। सिंह ने इस मामले में सरकार पर हमलावर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को भी राजनीति न करने की नसीहत दी। 
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उन्होंने कहा कि ओआरओपी मामले में वह कांग्रेस राजनीति कर रही है जो पिछले चार दशक से इस पर कुंडली मारे बैठी थी। सिंह ने कहा कि ओआरओपी को राजनीति से दूर खना चाहिए। यह सबके लिए अच्छा होगा। राहुल गांधी को भी इस मामले में राजनीति नहीं करनी चाहिए। गौरतलब है कि पूर्व सैनिक की आत्महत्या के बाद राजधानी में सियासी पारा अचानक बढ़ गया है। खासतौर से पूर्व सैनिकों के परिजनों को हिरासत में लेने, इनसे मिलने गए दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और कांग्रेस उपाध्यक्ष को हिरासत में लेने के बाद आरोपों प्रत्यारोपों का दौर शुरू हो गया है।
  #OROP should be kept away from politics, that will be better. Rahul Gandhi should not politicise this: VK Singh on #RahulGandhi pic.twitter.com/H1UB19zc59 — ANI (@ANI_news) November 2, 2016
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क्या है पूरा मामला?

orop
सरकार की वन रैंक वन पेंशन (ओआरओपी) योजना से असंतुष्ट भिवानी के पूर्व सैनिक रामकिशन ग्रेवाल ने मंगलवार को सल्फास की गोलियां खाकर खुदकुशी कर ली। सल्फास खाने से पहले उन्होंने सुसाइड नोट लिखा और इसके बाद अपने बेटे से फोन पर बात भी की। खबर सुनते ही कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया सहित कई विपक्षी नेता राम मनोहर लोहिया अस्पताल पहुंचे जहां पूर्व सैनिक का शव रखा गया था। लेकिन उन्हें सैनिक के परिजन से भी मिलने की इजाजत नहीं दी गई और जोर-जबरदस्ती करने पर पुलिस ने उन्हें कुछ देर के लिए हिरासत में रख लिया। रक्षा मंत्री मनोहर परिकर ने सैनिक की मृत्यु पर गहरा खेद व्यक्त किया है।

पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, 70 वर्षीय ग्रेवाल ओआरओपी मसले पर तीन साथियों के साथ रक्षा मंत्रालय में ज्ञापन देने दिल्ली आए थे। लेकिन रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक रक्षा मंत्री मनोहर परिकर से मुलाकात का कोई अनुरोध उसके रिकॉर्ड में नहीं है। ग्रेवाल के बेटे ने बताया कि वह ओआरओपी आंदोलन में सक्रिय थे। उन्होंने ज्ञापन पत्र पर ही सुसाइड नोट लिखकर सल्फास गोलियां खा ली। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने इस मुद्दे पर एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमले तेज कर दिए हैं।
 
 सुसाइड नोट में लिखा है कि वह देश के लिए प्राण न्योछावर कर रहे हैं। बुधवार को पुलिस ने पूर्व सैनिक के परिजनों से अस्पताल में मिलने पहुंचे कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी व दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत कई नेताओं को हिरासत में ले लिया। पूर्व सैनिक के परिजनों को भी हिरासत में लिया गया था लेकिन कुछ घंटे मंदिर मार्ग थाने में रखकर सभी को रिहा कर दिया गया। देर शाम कनॉट प्लेस थाने पहुंचे राहुल गांधी को पुलिस ने फिर से हिरासत में ले लिया और बस में बिठाकर दूर ले गए। सैनिक खुदकुशी मुद्दे को लेकर नेताओं व पुलिस को हाईवोल्टेज ड्रामा पूरे दिन चलता रहा। पूर्व सैनिक के परिजनों ने पुलिस पर उनके साथ मारपीट करने का भी आरोप लगाया है। उनके पुत्र जसवंत के अनुसार पुलिस ने हिरासत में उनसे दुर्व्यवहार किया और मारपीट की।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, गांव बामला, जिला भिवानी (हरियाणा) निवासी रिटायर सूबेदार रामकिशन ग्रेवाल मंगलवार की शाम रक्षा मंत्रालय ज्ञापन देने जा रहे थे। ग्रेवाल जब राजपथ के पास जवाहर भवन के पीछे लॉन में पहुंचे तो उन्होंने सल्फास की गोलियां खा लीं। कुछ देर बाद ही ग्रेवाल के शरीर से ब्लीडिंग शुरू हो गई। साथियों ने उन्हें आरएमएल अस्पताल में भर्ती कराया, जहां देर रात इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।

ग्रेवाल के साथियों का कहना है कि सेना और डिफेंस सिक्योरिटी कोर की 30 वर्षों तक सेवा करने वाले ग्रेवाल कुछ समय से ओआरओपी के मुद्दे पर परेशान थे। गौरतलब है कि एक सदस्यीय न्यायिक समिति द्वारा ओआरओपी पर अपनी रिपोर्ट केंद्रीय रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर को सौंपे जाने के कुछ दिनों के बाद खुदकुशी का पहला मामला सामने आया है। 
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पूर्व सैनिक सुसाइड: राजनैतिक बयानबाजी

- फोटो : ANI
‘एक शहीद का परिवार हिरासत में है। यह मोदीजी का भारत है। आप कैसे शहीद के पिता और बेटे को कैसे गिरफ्तार कर सकते हैं? यदि उन्हें गिरफ्तार नहीं किया है तो उन्हें जाने क्यों नहीं देते? 
एक नया भारत निर्माण हो रहा है। आप इसे जान लीजिए। आज देश में क्या हो रहा है। आपको देखना चाहिए। यह उनकी मानसिकता का नतीजा है। यह उनकी एक खास मानसिकता को दर्शाता है। यह अलोकतांत्रिक मानसिकता है। शहीद के परिजन को हिरासत में लेना शर्मनाक है, मोदी सरकार की अलोकतांत्रिक मानसिकता का प्रतीक है।’ 
-राहुल गांधी

‘मोदी राज में किसान और जवान दोनों ही खुदकुशी कर रहे हैं। इसका मतलब है कि प्रधानमंत्री झूठ बोल रहे हैं कि ओआरओपी लागू की गई है। यदि ‘वन रैंक, वन पैंशन’ लागू की गई होती तो राम किशन जी आत्महत्या क्यों करते।’
- अरविंद केजरीवाल (मुख्यमंत्री, दिल्ली)

‘यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि पूर्व सैनिक ने आत्महत्या कर ली। एक ओर सरकार सैनिकों का महिमा मंडन करती है और दूसरी ओर वादे पूरे नहीं करती।’
- अन्ना हजारे (सामाजिक कार्यकता)

‘पूर्व जवान द्वारा आत्महत्या किए जाने की यह घटना काफी दुखद है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि राहुल गांधी और मनीष सिसोदिया को शोकाकुल परिवार से मिलने से रोक दिया गया। उन्हें अपनी शोक संवेदना व्यक्त करने देना चाहिए।’
- ममता बनर्जी (मुख्यमंत्री, बंगाल)

‘सरकार की निष्क्रियता के खिलाफ पूर्व सैनिक राम किशन ग्रेवाल द्वारा आत्महत्या किए जाने की घटना से बहुत दुखी हूं। मैं शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी हार्दिक संवेदना व्यक्त करता हूं। प्रधानमंत्री मोदी के राज में पूर्व कर्मचारी और किसान खुद को असहाय और असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।’
- शरद यादव (वरिष्ठ नेता, जदयू)

‘मुख्य मुद्दा यह है कि एक जवान सीमा पर नहीं मारा गया, वह एक सरकार द्वारा मारा गया। उस सरकार ने ‘वन रैंक, वन पैंशन’ देने का वादा किया था जो उस जवान की आत्महत्या का कारण बना।’
- बृंदा करात (नेता, सीपीआईएम)

‘यदि ओआरओपी सही तरह लागू किया गया होता तो यह घटना नहीं होती। ग्रेवाल की आत्महत्या के लिए जो भी जिम्मेदार है, उसकी तलाश की जानी चाहिए। प्रधानमंत्री को सामने आकर ओआरओपी पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।’
- डी राजा (राष्ट्रीय सचिव, सीपीआई)
 
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