भारत में कोरोना वायरस के तेजी से मामले सामने आने लगे हैं। ऐसे में स्वास्थ्य मंत्रालय उन जगहों की पहचान कर रहा है, जहां से यह इंफेक्शन फैल रहे हैं। इसके बाद इन जगहों पर कलस्टर आइसोलेशन और नियंत्रण रणनीति को अपनाया जाएगा ताकी कम्युनिटी ट्रांसमिशन के खतरे को टाला जा सके। स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने रविवार को एक प्रेस ब्रीफिंग में कहा, "उभरते हुए हॉटस्पॉट्स की पहचान करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इन हॉटस्पॉट्स पर कठोर क्लस्टर कंटेंट स्ट्रैटेजी लागू की जाएगी।"
कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए सरकार ने अपनी सर्विलांस टीम को पहले के मुकाबले और भी बढ़ा दिया है। यह टीम उन प्रवासी मजदूरों पर नजर रखेगी जो 21 दिनों के लॉकडाउन के बीच शहरों से अपने गावों के लिए निकले हैं।
लव अग्रवाल ने कहा कि जो प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए अपनाई जाती है, वही प्रक्रिया अब उन प्रवासियों पर भी लागू होगी जिन्होंने लाकडाउन की अवधि में यात्रा की है। यानी जो लोग अपने घर गांवों और कस्बों की तरफ जा रहे हैं, उन्हें रिस्क प्रफाइलिंग (जोखिम रूपरेखा) प्रक्रिया से गुजरना होगा। जिन लोगों में कोरोना वायरस के लक्षण पाए जाएंगे, उन लोगों को आइसोलेशन सुविधा में रखा जाएगा। वहीं, दूसरे लोगों को प्रोटोकॉल के तहत 14 दिनों की होम संगरोध (होम क्वारंटाइन) की सलाह दी जाती है। ये सभी लोग कठोर निगरानी में रहेंगे।
रविवार को कैबिनेट सचिव के साथ स्वास्थ्य सचिव ने राज्यों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। इस दौरान अधिकारियों को साफ लहजों में बताया गया है कि लॉकडाउन के प्रोटोकॉल और दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन किया जाए। इसके अलावा प्रवासियों के क्वारंटाइन को भी बिना किसी भी ढिलाई के लागू किया जाए। राज्यों से यह भी कहा गया है कि जहां से अधिक मामले सामने आते हैं, वहां क्लस्टर्स पर एक कड़ी जांच करके रोकथाम की रणनीति तैयार की जाए।