ताज कॉरिडोर में बसपा प्रमुख मायावती के खिलाफ नए सिरे से जांच की गुहार वाली याचिका पर सुनवाई अब चार हफ्ते बाद होगी। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई के जवाब पर याचिकाकर्ता को जवाब दाखिल करने के लिए कहा है।
चीफ जस्टिस जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने सभी याचिकाकर्ताओं को जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। मालूम हो कि वर्ष 2002 में उत्तर प्रदेश की तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने ताज की सुंदरता बढ़ाने के नाम पर 175 करोड़ रुपये की परियोजना शुरू की थी। इस मामले में मायावती पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने पर्यावरण मंत्रालय की मंजूरी के बिना ही सरकारी फंड से 17 करोड़ रुपये जारी कर दिए थे। इन आरोपों के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 2003 में जांच के आदेश दिए थे।
सीबीआई ने 2007 में इस मामले में चार्जशीट दाखिल की। सीबीआई ने इस मामले में मायावती और नसीमुद्दीन सिद्दीकी के खिलाफ आरोप लगाए थे। मामले में चार्जशीट लंबित थी, लेकिन इसी दौरान यूपी में सरकार बदल गई और मायावती सत्ता में आ गईं।
इसके बाद मामले में यूपी के तत्कालीन गवर्नर ने मायावती के खिलाफ केस चलाए जाने की मंजूरी देने से मना कर दिया और फिर सीबीआई की स्पेशल कोर्ट में मामले की सुनवाई रुक गई। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस आधार पर मामले को निरस्त कर दिया था। लेकिन बाद में इस मामले में नए साक्ष्यों के आधार पर मायावती के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल की गई है जिस पर सुनवाई चल रही है।