सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस जस्टिस यूयू ललित की अध्यक्षता वाली पीठ कर्नाटक हिजाब विवाद, केरल के पत्रकार सिद्दीकी कप्पन की जमानत, गौतम नवलखा की याचिका कई महत्वपूर्ण जनहित याचिकाओं पर सोमवार को सुनवाई करेगी।
जस्टिस यूयू ललित का सीजेआई के तौर पर सोमवार को पहला कार्य दिवस है। उन्होंने शनिवार को देश के 49वें चीफ जस्टिस के तौर पर शपथ ली थी, लेकिन शनिवार और रविवार को न्यायालय में कामकाज नहीं होता है। शीर्ष अदालत की वेबसाइट पर अपलोड की गई वाद सूची के अनुसार, अदालत कक्ष संख्या एक में सोमवार को सीजेआई ललित की अध्यक्षता वाली पीठ में न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट पीठ शामिल होंगे।
पत्रकार सिद्दीकी कप्पन के मामले में भी होगी सुनवाई
केरल के पत्रकार कप्पन को अक्टूबर 2020 में उत्तर प्रदेश के हाथरस जाते समय गिरफ्तार किया गया था, जहां कथित तौर पर सामूहिक दुष्कर्म के बाद एक दलित युवती की मौत हो गई थी। कप्पन ने इस मामले में जमानत के लिए शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने इस महीने की शुरुआत में कप्पन की जमानत अर्जी खारिज कर दी थी। उनकी याचिका पर तत्काल सुनवाई के लिए उल्लेख किए जाने पर, पिछले सप्ताह पूर्व मुख्य न्यायाधीश एनवी रमणा द्वारा 26 अगस्त को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया गया था।
कई महत्वपूर्ण जनहित याचिकाओं को भी सुना जाएगा
न्यायमूर्ति यूयू ललित और न्यायमूर्ति भट की पीठ एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले के एक आरोपी एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता नवलखा द्वारा दायर एक अपील पर भी सुनवाई करेगी। नवलखा और अन्य गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ मामला 31 दिसंबर, 2017 को पुणे में आयोजित एल्गार परिषद सम्मेलन से संबंधित है। पुलिस ने आरोप लगाया था कि इस आयोजन को माओवादियों द्वारा फंड किया गया था.
हिजाब विवाद पर भी होगी सुनवाई
पीठ कक्षा के भीतर हिजाब (Hijab) पहने से संबंधित मामले में कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर भी सुनवाई करने वाली है। बता दें कि विभिन्न याचिकाकर्ताओं ने कर्नाटक हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जो स्कूलों और कॉलेजों में ड्रेस के नियमों को सख्ती से लागू करने का निर्देश देता है। सुप्रीमों कोर्ट में अपीलों में एक में 'सरकारी अधिकारियों पर सौतेले व्यवहार का भी आरोप लगाया गया है, जिसमें कहा गया है कि छात्रों को अपने विश्वास का अभ्यास करने से रोका गया है और इसके परिणाम स्वरूप अवांछित कानून और व्यवस्था की स्थिति पैदा हुई है।
क्या है हिजाब विवाद?
बता दें कि कर्नाटक में हिजाब विवाद उस समय शुरू हुआ था, जब उडुपी के एक सरकारी स्कूल में कुछ छात्राओं को हिजाब पहनकर कक्षा में जाने पर रोक लगा दी गई थी। इसे लेकर देश के कई हिस्सों में काफी प्रदर्शन हुए थे। इसी दौरान आठ फरवरी को मांड्या में पीईएस कॉलेज के अंदर भगवा शॉल पहने लड़कों ने जयश्री राम के नारे लगाए। जिसके बाद विवाद और बढ़ गया। जय श्री राम के नारे लगाती भीड़ के सामने 19 साल की मुस्कान खान ने अल्लाह हू अकबर के नारे लगाए थे। इसके बाद मामला कर्नाटक हाईकोर्ट पहुंचा और हाईकोर्ट ने फैसला दिया था कि हिजाब इस्लाम धर्म का अभिन्न अंग नहीं है, इसलिए राज्य सरकार को इसे स्कूलों के अंदर यूनिफॉर्म का हिस्सा बनाने का निर्देश नहीं दिया जा सकता।