इसके पूर्व की सरकार में भी डॉक्टरों से मारपीट की घटनाएं घटीं थीं। इसे देखते हुए तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए एक कानून लाने की शुरुआत कर दी थी। 29 मार्च 2017 को आईएमए को एक लिखित पत्र के माध्यम से इसके बारे में जानकारी भी दी गई थी। लेकिन इसके बाद दो वर्ष से भी अधिक समय के बीत जाने के बाद भी अभी तक कोई केंद्रीय कानून नहीं बनाया जा सका है।
क्या है मांग
आईएमए की मांग है कि सभी स्वास्थ्य सेवाओं, अस्पतालों को सेफ जोन घोषित किया जाए। अस्पतालों में और इनके आसपास त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था शुरू की जाए। सभी अस्पतालों में सिक्योरिटी बढ़ाने के साथ-साथ पूरे अस्पतालों में सीसीटीवी लगाने की मांग भी शामिल है। मांग है कि अभी के मामले में ममता बनर्जी घायल डॉक्टर से मिलने जाएं और डॉक्टरों से उनके बुलाए स्थान पर जाकर बात करें।
कितना व्यापक होगा आंदोलन
आईएमए का दावा है कि सोमवार की हड़ताल देशव्यापी असर की होगी। आईएमए से जुड़े देश भर के 3.5 लाख डॉक्टर और अस्पताल इसमें शामिल होंगे। दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन के 18 हजार डॉक्टर भी इसमें शामिल हैं। डॉक्टरों के अलावा अन्य स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े लोगों के भी हड़ताल में शामिल होने का दावा किया गया है।