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स्वास्थ्य सचिव ने कोविड-19 के मामलों में वृद्धि पर पांच राज्यों के अधिकारियों के साथ की बातचीत

Tue, 26 May 2020 06:31 PM IST
Rohit Ojha न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना वायरस - फोटो : PTI
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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने प्रवासी मजदूरों की वापसी के कारण कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के मद्देनजर पांच राज्यों के साथ चर्चा की। स्वास्थ्य मंत्रालय ने सुझाव दिए हैं कि पिछले तीन हफ्ते में निषिद्ध क्षेत्र में आए रूझान का आकलन कर प्रभावी रणनीति तैयार की जाए।

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स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार को जिन पांच राज्यों को सुझाव दिए हैं उनमें उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश शामिल हैं। स्वास्थ्य सचिव प्रीति सूदन ने इन राज्यों के मुख्य सचिवों, स्वास्थ्य सचिवों और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के निदेशकों के साथ वीडियो कांफ्रेंस के जरिए एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की।

मंत्रालय के बयान में कहा गया कि लॉकडाउन नियमों में ढील दिए जाने और अंतरराज्यीय पलायन की इजाजत दिए जाने के बाद इन राज्यों में पिछले तीन सप्ताह में कोविड-19 के मामलों में वृद्धि देखने को मिली है। बयान में कहा गया कि प्रभावी नियंत्रण रणनीति के लिए जिन कारकों पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है, उनमें विशेष निगरानी टीमों के माध्यम से घर-घर सर्वेक्षण, जांच, संपर्क का पता लगाने जैसे विषयों पर प्रकाश डाला गया।
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बयान के मुताबिक इस बात पर भी जोर दिया गया कि सूक्ष्म योजनाएं बनाने और इसके कार्यान्वयन के जरिए प्रत्येक निषिद्ध क्षेत्र का विश्लेषण किया जाएगा। यह भी कहा गया कि राज्यों को पृथक-वास केंद्रों, आईसीयू ,वेंटिलेटर और ऑक्सीजन बेड आदि के साथ मौजूदा उपलब्ध स्वास्थ्य ढांचे के आकलन पर ध्यान देने की जरूरत है। अगले दो महीनों की जरूरत को ध्यान में रखते हुए इसे मजबूत करने की आवश्यकता है।

बयान के अनुसार, गैर-कोविड आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं के संबंध में, राज्यों को याद दिलाया गया कि टीबी, कुष्ठ रोग, सीओपीडी, गैर-संचारी रोगों जैसे उच्च रक्तचाप, मधुमेह, चोटों के लिए उपचार और दुर्घटनाओं के कारण ट्रॉमा के लिए तत्काल उपाय करने की आवश्यकता है। यह सलाह दी गई कि मोबाइल मेडिकल यूनिट (एमएमयू) पृथक-वास केन्द्रों पर लगाई जा सकती है। मौजूदा भवनों में अस्थायी उप-स्वास्थ्य केंद्र स्थापित किए जा सकते हैं।

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