केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक मसौदे का ढांचा तैयार किया है, जिसमें किसी भी तरह के इलाज के दौरान मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित की गई। इसमें ऑनलाइन शिकायत तंत्र बनाने जैसे कदम उठाने का भी प्रस्ताव है। इसका मकसद मरीजों को बेहतर सुविधा मुहैया करना और उनकी जान की हिफाजत करना है। ताकि इलाज के दौरान किसी तरह की चूक आदि से मरीज खतरे में न पड़ें।
इस मसौदे राष्ट्रीय मरीज सुरक्षा कार्यान्वयन तंत्र (एनपीएसआईएफ) में कहा गया है कि मरीज की सुरक्षा स्वास्थ्य सुविधाओं का बुनियादी तत्व है। मसौदे का मकसद मरीज को स्वास्थ्य सुविधाओं के नियमों से होने वाली अनावश्यक हानि या संभावित हानि से बचाना है।
मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक इस मसौदे में सुरक्षित दवा वितरण, शल्य चिकित्सा देखभाल, इंजेक्शन सुरक्षा, रक्त सुरक्षा, इलाज सुरक्षा, स्वास्थ्य उपकरण सुरक्षा, सुरक्षित अंग, उत्तक और कोशिका प्रत्यारोपण व दान शामिल हैं। जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन और संक्रमण से बचाव की भी बात है। मसौदे में कहा गया है कि मरीज को सुरक्षित देखभाल न मुहैया कराने के लिए असुरक्षित इलाज, असुरक्षित प्रक्रिया और खराब तंत्र जिम्मेदार है।
छह स्तंभों से बना मसौदा
अधिकारी के मुताबिक इस मसौदे के छह स्तंभ हैं, स्वास्थ्य तंत्र को मजबूत करना, विपरीत घटनाओं की रिपोर्टिंग में सुधार, स्वास्थ्य कर्मियों को ट्रेनिंग, शोध, मुहिम चलाना (जिसमें इंजेक्शन सुरक्षा, रक्त सुरक्षा, सर्जिकल सुरक्षा, मातृ और शिशु स्वास्थ्य) और मान्यता के आधार पर स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार।
निजी अस्पतालों पर लगाम