देश में जहां रोजाना कोरोना संक्रमित मरीज हजारों की तादाद में बढ़ रही है। वहीं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय का मानना है कि पिछले 12 दिन में एक करोड़ लोगों की कोरोना जांच हुई है लेकिन संक्रमण दर भी कम हुई है।
मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने बताया कि 13 अगस्त तक देश में 2.68 करोड़ सैंपल की जांच हुई थी। इस अवधि तक संक्रमित सैंपल मिलने की दर 8.93 फीसदी थी लेकिन अब जांच की संख्या 3.68 करोड़ हो चुकी है। साथ ही अब संक्रमित मिलने वाले सैंपल की दर 8.60 फीसदी हुई है।
इससे जाहिर है कि जांच का दायरा बढ़ने से संक्रमित सैंपल की संख्या में कमी आई है। दुनिया के सबसे बड़ी आबादी वाले देशों में शामिल होने के बाद भी दूसरे देशों से ज्यादा जांच भारत में हो रही है।
राजेश भूषण ने कहा कि देश में कोरोना वायरस से ठीक हो चुके मरीजों की संख्या सक्रिय मामलों से 3.4 गुना ज्यादा है। कुल मामलों में सक्रिय मामले महज 22.2 फीसदी हैं। देश में कोरोना वायरस से मरीजों के ठीक होने दर (रिकवरी रेट) लगातार बढ़ रही है। भूषण ने कहा कि देश में अब यह दर 75 फीसदी से अधिक हो
गई है। इसके अलावा कोरोना वायरस की मृत्यु दर 1.8 फीसदी है, जो दुनिया में सबसे कम में से एक है। पिछले 24 घंटे में कोरोना के सक्रिय मामलों में 6400 की कमी आई है। कुल सक्रिय मामलों में से केवल 2.7 फीसदी मरीज ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं। वहीं 1.9 फीसदी मरीज आईसीयू और 0.29 फीसदी मरीज वेंटिलेटर सपोर्ट पर हैं।
उन्होंने बताया कि संक्रमण की चपेट में आने से 58,390 मौतें हुई हैं जिसमें 69 फीसदी पुरुष और 31 फीसदी महिलाएं हैं। 36 फीसदी 45-60 आयु और 51 फीसदी मौतें 60 या उससे ऊपर की आयु वर्ग वाले लोगों की हुई हैं।
तीन चरणों में तैयार योजना से देश में बढ़ा जांच का आंकड़ा: आईसीएमआर
देश में 30 जनवरी को पहला कोरोना संक्रमित मरीज मिलने तक रोजाना 10 सैंपल की जांच हो रही थी जो कि हाल ही में 10 लाख तक पहुंच चुकी है।
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने जांच में बढ़ोतरी का श्रेय तीन चरणों में तैयार योजना को दिया है। पहले चरण में आरटी पीसीआर, दूसरे चरण में ट्रूनेट-सीबीनेट-एबॉट 30 मशीन और तीसरे चरण में एंटीजन टेस्ट किट्स के जरिये जांच शुरू की गई।
आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. बलराम भार्गव ने मंगलवार को प्रेस कांफ्रेंस में बताया, देश के पांच अनुसंधान केंद्रों में कोबास मशीन लगाई गई है, जो प्रतिदिन 1200 से 1500 तक सैंपल की जांच कर रही हैं। अभी तक देश में 171 वीटीएम किट्स हैं, जिनके जरिये सैंपल लिया जाता है।
कोरोना काल से पहले ज्यादातर इनकी आपूर्ति विदेश से होती थी, लेकिन अब 119 किट्स स्वदेशी कंपनियां तैयार कर रही हैं। इसी तरह, आरएन एक्स्ट्रेक्शन की 186 में से 62, एंटीबॉडी किट्स 104 में से 11, एंटीजन किट्स में 17 में से एक, एलाइजा किट्स 36 में से 10 और 212 आरटी पीसीआर में से 46 किट्स का निर्माण भारत में ही हो रहा है।
डॉ. भार्गव ने कहा कि आईसीएमआर के सीरो सर्वे के प्रकाशन का काम चल रहा है। यह इस सप्ताह इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च में प्रकाशित हो सकता है। इसकी समीक्षा की जा चुकी है।