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Heal India: मेडिकल टूरिज्म में आएगी क्रांति, 165 देशों के मरीजों से 16 अरब डॉलर कमाने की तैयारी

आशीष तिवारी
Updated Sun, 20 Aug 2023 03:05 PM IST

सार

दुनिया के अलग-अलग देशों के मरीजों को हील इंडिया कार्यक्रम के तहत इलाज करने के लिए वेबसाइट को भी आधिकारिक तौर पर शुरू किया जा चुका है। जहां पर संबंधित अस्पतालों के नोडल सेंटर की पूरी जानकारी दी गई है।
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मेडिकल टूरिज्म से होगा बड़ा फायदा - फोटो : अमर उजाला


हील इंडिया की वेबसाइट शुरू

बीते कुछ महीनो पहले तैयार किया गया मेडिकल टूरिज्म के ड्राफ्ट प्लान को अब अमल में लाया जाना शुरू कर दिया गया है। हील इंडिया कार्यक्रम की गवर्निंग बॉडी से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं कि इस कार्यक्रम के तहत जो जरूरी आवश्यकता थी उनको ना सिर्फ पूरा किया गया है बल्कि देश के अलग-अलग अस्पतालों की लिस्टिंग करके उनका पूरा पैनल भी तैयार कर लिया गया है। वह कहते हैं कि दुनिया के अलग-अलग देशों के मरीजों को हील इंडिया कार्यक्रम के तहत इलाज करने के लिए वेबसाइट को भी आधिकारिक तौर पर शुरू किया जा चुका है। जहां पर संबंधित अस्पतालों के नोडल सेंटर की पूरी जानकारी दी गई है। आंकड़ों के मुताबिक अब तक तकरीबन दस लाख से ज्यादा मरीज इन अस्पतालों में अपना इलाज कर चुके हैं। उनका कहना है कि शुरुआती चरण में 61 देशों के मरीजों ने अपना इलाज कराने में सबसे ज्यादा इंटरेस्ट दिखाया था। लेकिन अब मेडिकल वैल्यू ट्रैवल प्लान के तहत 165 देशों को मरीजों को बेहतर इलाज के लिए न सिर्फ व्यवस्थाएं की गई है बल्कि पूरा सेटअप तैयार कर दिया गया है। 


16 बिलियन डॉलर तक हेल्थ टूरिज्म पहुंचाने की तैयारी

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक बीते साल तक देश में हेल्थ टूरिज्म का बाजार 6 अरब डॉलर तक था। इसे अगले 4 सालों के भीतर अनुमानित 16 अरब डॉलर तक पहुंचाने की तैयारी हो गई है। इसके लिए बाकायदा देश के अलग-अलग राज्यों और अलग-अलग चिकित्सा पद्धतियों के माध्यम से इलाज कराने की पूरी व्यवस्था शुरू हो चुकी है। हील इंडिया कार्यक्रम से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं कि इसमें सबसे ज्यादा विशेषज्ञता वाले चिकित्सकों के माध्यम से बीमारियों का इलाज हो रहा है। जिसमें दिल की बीमारी, गुर्दे की बीमारी, दिमाग की बीमारी, फेफड़ों की बीमारी समेत लीवर की बीमारी और उनके ट्रांसप्लांट जैसी व्यवस्थाएं चल रही है। इसके अलावा घुटने के रिप्लेसमेंट समेत हड्डियों की भी गंभीर बीमारियों और तमाम तरह की गंभीर बीमारियों में होने वाली सर्जरी के माध्यम से लोगों को बेहतर इलाज मुहैया कराया जा रहा है।


165 देशों के मरीज आएंगे भारत इलाज कराने

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक मेडिकल वैल्यू प्लान के तहत पहले 61 देशों को टारगेट लिस्ट में रखे जाने की योजना बनाई गई थी। बाद में इसमें 165 देशों को शामिल किया गया। जिन देशों को इस लिस्ट में शामिल किए जाने का प्रस्ताव बनाया गया है, उसमें यूरोप के 11 देश शामिल किए गए हैं। इसके अलावा अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, रूस, कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और आर्मेनिया को शामिल किया गया है। इनके अलावा मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए अफ्रीका के 8 देश, गल्फ के 8 देश और लैटिन अमेरिका के 19 देशों के अलावा साउथ ईस्ट एशिया और ईस्ट वेस्ट एशिया के देशों को शामिल किया गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक इन देशों को मेडिकल टूरिज्म के तहत इलाज मुहैया कराने के कई कारण भी हैं। पहली वजह यह है कि इन देशों में इलाज के लिए बहुत लंबी वेटिंग है। इसके अलावा वहां इलाज भी महंगा है। तीसरी और सबसे अहम वजह इन देशों से भारत की एयर कनेक्टिविटी बहुत बेहतर और सुगम है।


केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने हील इंडिया कार्यक्रम के तहत मेडिकल टूरिज्म को तीन अहम क्षेत्रों में बांटा गया है। इसमें मॉडर्न मेडिकल ट्रीटमेंट, ट्रेडिशनल मेडिकल थेरेपी समेत वैलनेस और रिजुविनेशन शामिल हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक अभी भी भारत में मेडिकल टूरिज्म के लिहाज से सार्क देशों से सबसे ज्यादा मरीज पहुंच रहे हैं। अनुमान है कि हील इंडिया कार्यक्रम के तहत यह संख्या कई गुना बढ़ने वाली है, बल्कि मेडिकल टूरिज्म के लिहाज से चिकित्सा क्षेत्र में भी बड़ा उछाल भी आने वाला है।


आधुनिक चिकित्सा के साथ ही पुरातन चिकित्सा पद्धति भी मिलेगी

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक मेडिकल वैल्यू ट्रैवल प्लान के तहत प्रधानमंत्री मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट को देश में आगे बढ़ाया जा रहा है। इस पूरे मेडिकल टूरिज्म ड्राफ्ट में कई पहलुओं को ध्यान में रखकर मेडिकल वैल्यू ट्रैवल प्लान तैयार किया गया था। ताकि भारत की पुरातन चिकित्सा पद्धति के साथ-साथ मॉडर्न चिकित्सा व्यवस्था और विशेषज्ञों का लाभ समूची दुनिया के मरीजों को मिल सके। इसके लिए स्वास्थ्य मंत्रालय ने देश के अलग-अलग राज्यों के अस्पतालों का चयन किया था। जहां पर दुनिया के अलग-अलग मुल्कों से आने वाले मरीजों का इलाज शुरू हो चुका है। फिलहाल शुरुआती योजना के मुताबिक मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए 12 राज्यों के 17 शहरों के प्रमुख अस्पतालों को शॉर्टलिस्ट किया गया था। जिसमें दिल्ली, गुजरात, कर्नाटक, हरियाणा, केरल, महाराष्ट्र, पंजाब, तमिलनाडु, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, आंध्रप्रदेश और असम के प्रमुख चिकित्सा संस्थान शामिल करने का प्रस्ताव बनाया गया है। लेकिन जैसे देशों की संख्या और मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है इस आधार पर अस्पतालों की संख्या भी बढ़ाई जा रही है। अब इनकी संख्या बढ़ाई गई है।  

 
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