कर्नाटक में सियासी उठापटक पर फिलहाल पूर्णविराम लग गया है। शुक्रवार को भाजपा के विधानसभा से वाकआउट करने पर कांग्रेस-जदएस गठबंधन की कुमारस्वामी सरकार बहुमत साबित करने में सफल रही। कुमारस्वामी के पक्ष में 117 विधायकों ने वोट डाले। सदन ने उनकी ओर से पेश विश्वासमत प्रस्ताव को ध्वनिमत से पारित कर दिया।
विश्वासमत से पहले ही विधानसभा में विपक्ष के नेता बीएस येदियुरप्पा समेत सभी भाजपा विधायक सदन से वाकआउट कर गए। येदियुरप्पा ने कांग्रेस-जदएस गठबंधन को नापाक गठजोड़ करार दिया।
उन्होंने कहा कि यह सरकार ज्यादा दिन नहीं चलेगी। इससे पहले मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने विश्वास मत की अपील के दौरान भरोसा जताया कि कांग्रेस-जदएस सरकार पांच साल का कार्यकाल पूरा करेगी।
उन्होंने कहा, ‘मुझे दुख है कि कर्नाटक के लोगों ने मुझ पर भरोसा नहीं जताया। मुझे अहसास है कि मैं बहुमत की सरकार नहीं चला रहा हूं। हम अपने हित साधने के लिए सत्ता में नहीं आए हैं।’
उन्होंने कहा कि कांग्रेस-जदएस सरकार किसानों का कर्ज माफ करने का अपना वादा पूरा करेगी। दरअसल, बृहस्पतिवार रात को उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने कुमारस्वामी के पांच साल मुख्यमंत्री बने रहने के सवाल पर कहा था कि इस बारे में कांग्रेस ने अभी अंतिम फैसला नहीं किया है। सियासी गलियारे में उनके इस बयान के कई मायने निकाले जा रहे हैं।
रमेश कुमार निर्विरोध विधानसभा स्पीकर चुने गए
भाजपा प्रत्याशी एस. सुरेश कुमार के नामांकन वापस लेने के बाद कांग्रेस के केआर रमेश कुमार सर्व-सहमति से कर्नाटक विधानसभा के अध्यक्ष चुन लिए गए। शुक्रवार को विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही सुरेश कुमार ने ट्वीट किया, ‘पार्टी के निर्देश पर मैंने कर्नाटक विधानसभा स्पीकर पद के लिए बृहस्पतिवार को नामांकन भरा था। अब पार्टी में चर्चा के बाद तय हुआ कि स्पीकर सर्व-सहमति से चुना जाना चाहिए। लिहाजा, मैं अपना नामांकन वापस ले रहा हूं।’