कर्नाटक के राजनीतिक रंगमंच का यह सीन बहुत रोचक है और कई उतार चढ़ाव के बाद यहां तक पहुंचा है। इस रंगमंच पर कई बड़े- बड़े किरदार थे जो पूरी राजनीति को नए रंग में पिरो रहे थे जिसमें कुछ देर के लिए बाजी मारी बीजेपी के बीएस येदियुरप्पा ने जबकि इसके पुराने खिलाड़ी सिद्धारमैया का सीन काफी छोटा दिखा। कई मोड़ से गुजरने के बाद कर्नाटक का अगला सीन कुमारान्ना यानि एचडी कुमारस्वामी पर जाकर कल ठहर जाएगा।
कर्नाटक में पिछले एक हफ्ते से अधिक से चल रहे इस रंगमंच के रंगकर्मी कोई और नहीं कुमारान्ना ही थे। क्योंकि वह राजनीति के साथ-साथ नाटक और फिल्म की दुनिया के भी मंजे हुए खिलाड़ी हैं। जिसे पता था कि किस सीन में कौन सा डायलॉग बोलना है और उस समय कौन सा कलाकार मंच पर दिखेगा। ऐसे में अन्ना ने शुरुआत कर्नाटक में मतदान से पहले ही खुद को किंगमेकर कह कर कर दी थी। लेकिन जैसे-जैसे कर्नाटक का नाटक छंटता गया कुमारान्ना ही इसके किंग बनते नजर आए। वैसे तो कुमारस्वामी दूसरी बार सूबे के मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं लेकिन आपको यह जानकर आश्चर्य होगा की राजनीति उनका पहला शौक नहीं था। अन्ना पहले रंगमंच से जुड़े फिर फिल्म से और फिल्म बनाने के उनके शौक ने उन्हें प्रोड्यूसर और डायरेक्टर बना दिया।
कुमारस्वामी की फिल्मी यात्रा
अन्ना फिल्म के डिस्ट्रीब्यूशन और फिल्म निर्माण से पहले हसन जिले में चन्नंबिका थियेटर देखा करते थे। यही नहीं कुमारस्वामी एक एक्जबीटर, डिस्ट्रीब्यूटर और प्रोड्यूसर भी रहे हैं। वह जिंदगी को फिल्म की तरह देखते हैं और पलभर में फिल्मी सीन की तरह जिंदगी के सीन भी बदल देते हैं। कुमारस्वामी को जानने वाले कहते हैं कि उनका पहला प्यार फिल्में हुआ करती थीं। लेकिन वक्त के साथ उनका पहला प्यार दूर होता गया और पिता एचडी देवगौड़ा की राजनीतिक विरासत उनपर इस तरह हावी होती गई कि उसका नतीजा हमारे सामने है।
जिस तरह से आज कर्नाटक की राजनीति में कुमारस्वामी का बोलबाला देखने को मिल रहा है ठीक वैसे ही उन्होंने फिल्मों में भी छाप छोड़ी है। साल 2003 में कुमारस्वामी की प्रोड्यूस की गई फिल्म 'चंद्र चकोरी' इतनी पसंद की गई कि एक साल तक थियेटर से उतरी ही नहीं