महाराष्ट्र के सहकारी चीनी मिलों में 25,000 करोड़ रुपये के घोटाले में जांच की आंच शरद पवार पर आते ही एनसीपी ने आपा खो दिया है। पार्टी ने अन्ना हजारे को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का एजेंट करार दे दिया है। वहीं, एनसीपी सुप्रीमों शरद पवार ने अन्ना हजारे के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का संकेत दिया है।
महाराष्ट्र के सहकारी चीनी मिलों में कथित 25 हजार करोड़ रुपये के घोटाले की जांच की मांग को लेकर अन्ना हजारे ने बांबे हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। अन्ना ने याचिका में कहा है कि इस घोटाले में कथित रूप से एनसीपी प्रमुख व पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार और उनके भतीजे व पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार की कथित भूमिका की भी जांच हो। याचिका में दोनों को पक्षकार बनाया गया है।
अन्ना के मुताबिक पहले इन सहकारी चीनी मिलों को कर्ज के बोझ से दबा दिया गया और फिर उसे बीमारू इकाई बताकर औने-पौने दामों पर बेच दिया गया, जिसमें भारी घोटाला हुआ है। इसलिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में समिति गठित कर इसकी जांच की जानी चाहिए। उनका कहना है कि चीनी मिलों के विकास, सरकारी निधि के दुरुपयोग के चलते सरकारी खजाने को 25 हजार करोड़ रुपये की चपत लगी है।
सहकारी चीनी मिल घोटाले को लेकर हजारे ने दीवानी और फौजदारी जनहित याचिकाएं दायर की हैं। फौजदारी जनहित याचिका पर न्यायमूर्ति अभय ओक की अध्यक्षता वाली पीठ छह जनवरी को सुनवाई करेगी। वहीं, एनसीपी प्रवक्ता नवाब मलिक ने कहा कि शरद पवार को बदनाम करने के लिए अन्ना हजारे आरएसएस के षडयंत्र में अहम भूमिका निभा रहे हैं। अन्ना हजारे महाराष्ट्र की भाजपा सरकार के खिलाफ किसी मुद्दे को लेकर प्रदर्शन क्यों नहीं कर रहे हैं। इससे पता चलता है कि वे आरएसएस के एजेंडे के तहत शरद पवार जैसे वरिष्ठ नेता को बदनाम कर रहे हैं।