सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केरल यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट की उस याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिसमें पत्रकार सिद्दिकी कप्पन की यूपी पुलिस की गिरफ्तारी से रिहाई की मांग की गई थी। यूपी पुलिस ने इस पत्रकार को तब गिरफ्तार किया था, जब वह 19 वर्षीय दलित युवती के साथ हुई कथित सामूहिक दुष्कर्म व हत्या मामले की रिपोर्टिंग के लिए हाथरस जा रहा था।
पीठ ने कहा, राहत के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट जाएं
मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे, जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस वी रामसुब्रमण्यन की पीठ ने एसोसिएशन की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल से कहा, आपको राहत के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना चाहिए। जवाब में सिब्बल ने कहा कि जब यह याचिका दायर की गई थी तब यह हैबियस कॉर्पस याचिका थी। हालांकि, बाद में यूपी पुलिस ने कप्पन के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दिया।
उसे गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम की धाराओं के तहत आरोपित किया गया है, जिसके बाद पीठ ने सुनवाई को चार हफ्ते के लिए टालते हुए याचिका में संशोधन करने के लिए कहा है। एसोसिएशन का कहना है कि कप्पन को पांच अक्तूबर को गैरकानूनी तरीके से गिरफ्तार किया गया है। उसे तब गिरफ्तार किया गया जब वह अपना काम करने जा रहा था। कप्पन इस एसोसिएशन के दलित यूनिट का सचिव है।