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Karnataka: क्या पीएम ने साध लिया है कर्नाटक में सफलता का मंत्र? 2024 से पहले BJP नहीं देखना चाहती हार का मुंह

Thu, 02 Mar 2023 03:32 PM IST
विवेक दास शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Karnataka: कर्नाटक को साधने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यहां काफी कुछ अपने स्तर से ठीक किया है। केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने पार्टी नेताओं को चुनाव जीतने के मंत्र दिए। बूथ स्तर पर तैयारियों को तेज करने के सूत्र बताने के साथ आपसी गुटबाजी को शांत करने की कोशिश में लगे हैं। 
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कर्नाटक में पीएम मोदी - फोटो : Agency
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विस्तार
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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले 48 दिन के भीतर पांच बार कर्नाटक राज्य का दौरा किया है। केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा भी लगातार कर्नाटक को अहमियत दे रहे हैं। यह पूरी कवायद मुख्यमंत्री बसावराज बोम्मई, पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा और अन्य भाजपा नेताओं में तालमेल बनाकर दो महीने के भीतर प्रस्तावित विधानसभा चुनाव में सफलता पाने की है। प्रधानमंत्री और अमित शाह दोनों को पता है कि कर्नाटक विधानसभा का चुनाव हिमाचल विधानसभा की तरह खासा मुश्किल है।

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बताते हैं कर्नाटक को साधने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यहां काफी कुछ अपने स्तर से ठीक किया है। केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने पार्टी नेताओं को चुनाव जीतने के मंत्र दिए। बूथ स्तर पर तैयारियों को तेज करने के सूत्र बताने के साथ आपसी गुटबाजी को शांत करने की कोशिश में लगे हैं। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा लगातार पार्टी के पदाधिकारियों से फीडबैक ले रहे हैं। दिलचस्प है कि भाजपा ने कर्नाटक में अजमाए हुए चेहरों को विधानसभा चुनाव में सफलता पाने की जिम्मेदारी सौंपी है। उ.प्र. विधानसभा चुनाव में शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने कड़ी मेहनत की थी। प्रधान को कर्नाटक में जिम्मेदारी मिली है और वह बेहद संवेदनशील हैं। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया.के.अन्नामलाई ने भी जीत का समीकरण बनाने में जोर लगाया है। केन्द्रीय मंत्री शोभा करंदले, राष्ट्रीय महासचिव सीटी रवि और भाजपा के संगठन मंत्री बीएल संतोष की भी निगाह कर्नाटक पर टिकी है।  

येदियुरप्पा अब नाराज नहीं हैं

कर्नाटक में लिंगायत की बड़ी आबादी है। मुख्यमंत्री बसावराज बोम्मई लिंगायत हैं, लेकिन अभी तक भाजपा के पास पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा जैसा जमीनी पकड़ वाला लिंगायत नेता नहीं है। मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद येदियुरप्पा कुछ नाराज से चल रहे थे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 80 साल के पार्टी के नेता बीएस येदियुरप्पा से रिश्ते की एक अलग केमिस्ट्री बनाते हैं। इसी केमिस्ट्री ने बीएस येदियुरप्पा को 26 जुलाई 2019 को येदियुरप्पा को चौथी बार मुख्यमंत्री बनने का अवसर दिया था। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद भी प्रधानमंत्री ने कर्नाटक से लेकर दिल्ली तक येदियुरप्पा का रुतबा कम नहीं होने दिया। वह हाल में उनके 80 वें जन्मदिन में शामिल हुए और येदियुरप्पा ने कर्नाटक विधानसभा चुनाव में 224 विधानसभा सीटों में 130-140 सीटें जीतने का लक्ष्य रख दिया है। पार्टी को बहुमत के लिए 113 सीटें चाहिए और 2018 के विधानसभा चुनाव में येदियुरप्पा के चेहरे पर चुनाव लड़कर 106 सीटें ही ला सकी थी। येदियुरप्पा मुख्यमंत्री बने और उन्हें अल्पमत में होने के कारण हटना पड़ा। इसके बाद कांग्रेस के समर्थन से जद(एस) ने सरकार बनाई। एचडी कुमारस्वामी मुख्यमंत्री बने, लेकिन कुछ महीनों के बाद आपरेशन लोटस-2 के बाद वह फिर राज्य सरकार के मुखिया बन गए थे।
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जहां हारे हैं, वहां जीतेंगे

भाजपा ने 2023 के प्रस्तावित विधानसभा चुनाव के लिए जिन सीटों पर 2018 में हारे थे, उसे इस बार जीतने की रणनीति बनाई है। भाजपा मुख्यालय के एक नेता का दावा है कि 2023 में पुराना मैसूर क्षेत्र से भाजपा को 20 सीटें अधिक मिलने वाली हैं। हालांकि पुराना मैसूर का इलाका वोक्कालिगा बहुल है। भाजपा नेता डा. सीएन अश्वथनारायण भी वोक्कालिगा हैं। वोक्कालिगा को साधने के लिए भाजपा ने अश्वथनारायण को काफी अहमियत दी है। कांग्रेस के नेता डीके शिवकुमार भी वोक्का लिगा हैं। पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा और उनका परिवार वोक्कालिगा है। पुराने मैसूर में जबरदस्त पकड़ रखता है। डीके शिवकुमार भी कांग्रेस के बेहद प्रभावी नेता हैं। 2018 के विधानसभा चुनाव में पुराने मैसूर की 64 सीटों में भाजपा को केवल 11 मिली थीं। 17 कांग्रेस ने जीती थी। 37 जद (एस) के पाले में गई थी। जद (एस) कुल 37 सीटें जीतने में सफल रहा था। भाजपा की कोशिश इसी क्षेत्र में विपक्ष को पटखनी देखकर कम से कम 30-35 सीटें जीतने की है।

क्या भाजपा को कर्नाटक में डर सता रहा है?

भाजपा के नेता बातचीत में मानते हैं कि इस बार कर्नाटक में मुकाबला दिलचस्प होगा। हालांकि उन्हें लग रहा है कि कांग्रेस की अंदरुनी कलह का बड़ा फायदा मिलेगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मिलने एक मीडिया हाऊस के संपादक गए थे। प्रधानमंत्री ने उनसे बातचीत के दौरान कहा था कि कर्नाटक में भी सरकार और भाजपा की स्थिति अच्छी नहीं है। माना जा रहा है कि चुनाव से पहले भाजपा अपनी सभी कमियों को दूर कर लेना चाहती है।

भाजपा के रणनीतिकारों का कहना है कि उसे विपक्ष की कमजोरी और विपक्षी दल में अंतर्कलह का भी लाभ मिलेगा। कहते हैं कि कांग्रेस के नेता डीके शिवकुमार और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया में भी प्रतिस्पर्धा चल रही है। सिद्धारमैया कुरुबा समुदाय से आते हैं। डीके शिवकुमार की लोकप्रियता काफी बढ़ रही है। उनकी लोकप्रियता एचडी कुमारस्वामी को भी भीतर से परेशान करती है। डीके शिवकुमार वैसे भी पूर्व मुख्यमंत्री एस एम कृष्णा परिवार से करीबी संबंधों के लिए जाने जाते हैं। सिद्धारमैया कैम्प डीके शिवकुमार को रोकने के लिए पूर्व मंत्री और लिंगायत नेता एमबी पाटील को आगे कर देते हैं। भाजपा को लग रहा है कि कर्नाटक में उसे इसका फायदा मिलेगा।

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