उन्होंने इन 22 प्रतिज्ञाओं को निर्धारित किया ताकि हिंदू धर्म के बंधनों को पूरी तरह पृथक किया जा सके। ये प्रतिज्ञाएं हिंदू मान्यताओं और पद्धतियों की जड़ों पर गहरा आघात करती हैं।
- मैं ब्रह्मा, विष्णु और महेश में कोई विश्वास नहीं करूंगा और न ही मैं उनकी पूजा करूंगा।
- मैं राम और कृष्ण, जो भगवान के अवतार माने जाते हैं, में कोई आस्था नहीं रखूंगा और न ही मैं उनकी पूजा करूंगा।
- मैं गौरी, गणपति और हिन्दुओं के अन्य देवी-देवताओं में आस्था नहीं रखूंगा और न ही मैं उनकी पूजा करूंगा।
- मैं भगवान के अवतार में विश्वास नहीं करता हूं।
- मैं यह नहीं मानता और न कभी मानूंगा कि भगवान बुद्ध विष्णु के अवतार थे। मैं इसे पागलपन और झूठा प्रचार-प्रसार मानता हूं।
- मैं श्रद्धा (श्राद्ध) में भाग नहीं लूंगा और न ही पिंड-दान दूंगा।
- मैं बुद्ध के सिद्धांतों और उपदेशों का उल्लंघन करने वाले तरीके से कार्य नहीं करूंगा।
- मैं ब्राह्मणों द्वारा निष्पादित होने वाले किसी भी समारोह को स्वीकार नहीं करूंगा।
- मैं मनुष्य की समानता में विश्वास करता हूं।
- मैं समानता स्थापित करने का प्रयास करूंगा।
- मैं बुद्ध के आष्टांगिक मार्ग का अनुसरण करूंगा।
- मैं बुद्ध द्वारा निर्धारित परमितों का पालन करूंगा।
- मैं सभी जीवित प्राणियों के प्रति दया और प्यार भरी दयालु रहूंगा तथा उनकी रक्षा करूंगा।
- मैं चोरी नहीं करूंगा।
- मैं झूठ नहीं बोलूंगा।
- मैं कामुक पापों को नहीं करूंगा।
- मैं शराब, ड्रग्स जैसे मादक पदार्थों का सेवन नहीं करूंगा।
- मैं महान आष्टांगिक मार्ग के पालन का प्रयास करूंगा एवं सहानुभूति और अपने दैनिक जीवन में दयालु रहने का अभ्यास करूंगा।
- मैं हिंदू धर्म का त्याग करता हूं जो मानवता के लिए हानिकारक है और उन्नति और मानवता के विकास में बाधक है क्योंकि यह असमानता पर आधारित है, और स्व-धर्मं के रूप में बौद्ध धर्म को अपनाता हूं।
- मैं दृढ़ता के साथ यह विश्वास करता हूं की बुद्ध का धम्म ही सच्चा धर्म है।
- मुझे विश्वास है कि मैं (इस धर्म परिवर्तन के द्वारा) फिर से जन्म ले रहा हूं।
- मैं गंभीरता एवं दृढ़ता के साथ घोषित करता हूं कि मैं इसके (धर्म परिवर्तन के) बाद अपने जीवन का बुद्ध के सिद्धांतों व शिक्षाओं एवं उनके धम्म के अनुसार मार्गदर्शन करूंगा।