तीन विधायकों ने समर्थन वापस लिया
बीते दिनों उस वक्त प्रदेश की सियासत एकाएक गरमा गई थी, जब तीन निर्दलीय विधायकों, रणधीर गोलन, धर्मपाल गोंदर और सोमवीर सांगवान ने रोहतक में नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा की मौजूदगी में भाजपा से समर्थन वापस लेने की घोषणा की थी। इसके बाद हुड्डा, भाजपा पर हमलावर हो गए। उन्होंने कहा, प्रदेश की भाजपा सरकार अल्पमत में आ गई है। ऐसे में अब हरियाणा में राष्ट्रपति शासन लगा देना चाहिए। जजपा नेता दुष्यंत चौटाला ने कहा, अगर कांग्रेस पार्टी विधानसभा में सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाती है, तो जजपा बाहर से उसका समर्थन करेगी।
भरोसे की डोर उतनी पक्की नहीं
यहां पर खास बात ये भी है कि हुड्डा और दुष्यंत के बीच भरोसे की डोर उतनी पक्की नहीं है। भाजपा सरकार से समर्थन वापस लेने वाले तीनों विधायकों ने राज्यपाल कार्यालय को सूचना दी, लेकिन यहां पर भी विवाद हो गया। राज्यपाल कार्यालय की तरफ से बताया गया कि तीनों विधायकों के समर्थन वापसी का पत्र आया है, लेकिन वह उनकी आधिकारिक ई-मेल आईडी से नहीं आया। किसी अन्य व्यक्ति की मेल आईडी से पत्र भेजा गया है।
ये है विधानसभा में समीकरण
एक तरफ जननायक जनता पार्टी (जजपा) ने फ्लोर टेस्ट की मांग की है, तो दूसरी ओर भूपेंद्र सिंह हुड्डा भी अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन कर रहे हैं। हुड्डा कहते हैं, पहले जजपा अपने 10 विधायकों को लेकर चंडीगढ़ पहुंचे। इसके बाद वे कांग्रेस के 30 विधायकों के साथ राजभवन पहुंच जाएंगे। हुड्डा ने कहा, वे 30 विधायकों की परेड करा सकते हैं। 90 सदस्यीय विधानसभा में फिलहाल 88 विधायक हैं। इनमें भाजपा के 40, कांग्रेस के 30, जजपा के 10, निर्दलीय 6, हलोपा और इनेलो के पास एक-एक विधायक हैं। भाजपा नेता, अभी तक 47 विधायकों के समर्थन की बात कर रहे हैं।
यह है जजपा की कमजोर कड़ी
जजपा की कमजोर कड़ी वाले विधायकों में राम कुमार गौतम, जोगी राम सिहाग, रामकरण काला, रामनिवास सुरजाखेड़ा, देवेंद्र बबली और चौधरी ईश्वर सिंह का नाम शामिल है। इनमें से अधिकांश विधायक भाजपा के संपर्क में हैं। पूर्व सीएम मनोहर लाल खट्टर से उनकी मुलाकात हो चुकी है। नारनौंद के विधायक रामकुमार गौतम कह चुके हैं कि जजपा से उनका केवल कानूनी रिश्ता है। ऐसे में जजपा के पास अब दुष्यंत चौटाला, उनकी मां नैना चौटाला, अमरजीत ढांढा और अनूप धानक बचते हैं। अगर जजपा द्वारा फ्लोर टेस्ट के दौरान व्हिप जारी की जाती है, तो विधायकों को इधर-उधर होने में मुश्किल हो सकती है। अगर छह विधायकों के साथ एक एमएलए और आ जाता है तो उनकी संख्या दो तिहायी तक पहुंच जाती है। ऐसे में वे नई पार्टी बनाकर किसी दल में विलय या समर्थन करते हैं, तो उन पर दल बदल कानून के तहत अयोग्यता की तलवार नहीं लटकेगी।
क्या बबली होंगे उद्धव ठाकरे
जजपा के विधायक देवेंद्र सिंह बबली, लगातार बगावती तेवर दिखा रहे हैं। उनके अलावा जजपा के कई दूसरे विधायक भी पूर्व सीएम खट्टर और मौजूदा मुख्यमंत्री सैनी से मुलाकात कर चुके हैं। भाजपा से जुड़े विश्वस्त सूत्रों का कहना है, हरियाणा में महाराष्ट्र का दांव, संभव है। भाजपा सरकार गिराने के चक्कर में कांग्रेस और जजपा में भी सेंध लग सकती है। अभी नायब सैनी सरकार को कोई खतरा नहीं है। भाजपा 47 विधायकों का दावा कर रही है, तो मतलब इतने विधायक हैं। पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर कह चुके हैं कि हमारे संपर्क में भी विधायक हैं।
विधायकों में बड़ी टूट संभव है
पूर्व सीएम खट्टर का इशारा साफ है कि प्रदेश में महाराष्ट्र दांव चला जा सकता है। जिस तरह से महाराष्ट्र में शिव सेना, दोफाड़ हुई। बाद में ठाकरे समर्थित विधायकों को अलग दल के रूप में मान्यता मिली। शिंदे गुट का असली शिव सेना पर कब्जा हो गया। कुछ उसी तरह हरियाणा में भी किसी दल का कोई नेता 'उद्धव ठाकरे' बन सकता है। यानी किसी दल के विधायकों में बड़ी टूट संभव है। इंतजार केवल, लोकसभा चुनाव की वोटिंग होने का है। प्रदेश में 25 मई को मतदान होगा। उसके बाद 'महाराष्ट्र दांव' पर काम शुरू होगा। यह बात कांग्रेस पार्टी के नेता भूपेंद्र हुड्डा भी जानते हैं। वे अपने तीस विधायकों को महफूज रखने पर ध्यान दे रहे हैं। कमजोर कड़ी वाले विधायकों पर नजर है।
सारा खेल, चार जून के नतीजों पर निर्भर
प्रदेश की राजनीति की नब्ज समझने वाले पत्रकार रविंद्र कुमार कहते हैं, हरियाणा में महाराष्ट्र दांव चला जा सकता है। मौजूदा समय में आसार कुछ ऐसे ही बनते नजर आ रहे हैं। टूट की ज्यादा संभावना, जजपा में ही नजर आती है। कांग्रेस में इस तरह का प्रयास, आसान नहीं है। हरियाणा में चार पांच महीने के बाद चुनाव है। तब तक भाजपा, जजपा विधायकों की मदद से सरकार चला सकती है। भाजपा नेता, 47 विधायकों के समर्थन का दावा करते हैं। हालांकि आगे का सारा खेल, चार जून के नतीजों पर निर्भर है। केंद्र में किस दल की सरकार बनती है, प्रदेश की दस सीटों में से किसे कितनी मिलती हैं। ये सब बातें, आगे की रणनीति तय करेंगी। वैसे अभी भाजपा सरकार के लिए राहत की बात है। विधानसभा में कानूनन अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता। वजह, कांग्रेस पार्टी, फरवरी में अविश्वास प्रस्ताव लेकर आई थी। मार्च में विधानसभा में शक्ति परीक्षण हुआ था। उसमें भाजपा सरकार पास रही थी। अब छह माह तक अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता। फ्लोर टेस्ट हो सकता है या नहीं, राज्यपाल इस बाबत फैसला ले सकते हैं। यानी भाजपा के पास, महाराष्ट्र दांव चलने के लिए पर्याप्त समय है।