पूर्वी दिल्ली के डिजास्टर मैनेजमेंट विभाग द्वारा मिली जानकारी के मुताबिक पुराने दिल्ली के पुल पर गुजरने वाली ट्रैफिक को किसी आशंका के मद्देनजर तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया गया है। लेकिन उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी नितिन चौधरी के मुताबिक रेलवे का संचालन अभी सामान्य रुप से चल रहा है।
सड़कों के किनारे बनाया आशियाना
यमुना के डूब क्षेत्र में रहने वालों को बाढ़ के प्रति शनिवार को ही सतर्क कर दिया गया था। यही कारण है कि लोगों ने यमुना के डूब क्षेत्र को छोड़कर यमुना पुश्ते से शास्त्री पार्क, लक्ष्मीनगर होते हुए नोएडा को जाने वाली मुख्य रोड के किनारे अपना आशियाना बना लिया है। कई लोगों ने सरकारी टेंटों में रहने की जगह पा ली है तो सैकड़ों की संख्या में परिवार सड़क किनारे अपने बनाए तंबू में जगह पा ली है।
बिहार के मधेपुरा से खेती के मजदूर के रुप में काम करने दिल्ली आए हरिराम ने बताया कि अभी भी बहुत से लोग अपनी झुग्गियों को छोड़कर बाहर नहीं आए हैं। उनके बाहर आने से लोगों की संख्या बढ़ेगी।
सरकार की तरफ से बनाए गए तंबू अभी भी खाली पड़े हैं, लेकिन लोग सड़कों के किनारे अपने तंबू में रहने को प्राथमिकता दे रहे हैं। पूछने पर हरिराम बताते हैं कि सरकार के तंबू उनके खेतों से काफी दूर हैं। लोग अपने खेतों की सीध में सड़कों पर ही तंबू बनाने को प्राथमिकता दे रहे हैं जिससे कि बाढ़ कम होने पर अपने खेतों में जाकर काम कर सकें।
सरकार से मिल रही पूरी सुविधा
बदायूं से परिवार के साथ खेतिहर मजदूर के रुप में काम करने आए वीरपाल बताते हैं कि सरकारी टेंटों में इस समय पूरी सुविधा दी जा रही है। पीने के पानी का टैंकर आता रहता है।
मोबाइल टॉयलेट भी आ चुका है और रविवार दोपहर को उन्हें सरकार की तरफ से खाना भी मिला था। खाने के प्रत्येक पैकेट में चार पूड़ी और सब्जी होती है।
साल 2006 से परिवार के साथ दिल्ली आ चुके वीरपाल बताते हैं कि खाने में बदलाव भी होता रहता है। उनके साथ उनकी पत्नी और चार बच्चे रहते हैं। वे खुद 300 रुपये रोज और पत्नी 200 रुपये रोज की मजदूरी पाते हैं। लेकिन बाढ़ जैसे हालात होने पर उन्हें कोई मजदूरी नहीं मिल पाती है।
चिकित्सा सुविधा का भी इंतजाम
मयूर विहार के डूब क्षेत्र में एक सिविल डिफेंस कर्मचारी ने बताया कि डूब क्षेत्र से बाहर निकाले गये लोगों के लिए इस समय पांच सौ से ज्यादा टेंट लगाए जा चुके हैं। लोगों के बढ़ने के साथ टेंट भी बढ़ा दिए जाते हैं। अभी भी टेंट का सामान लगातार आ रहा है।
कर्मचारी के मुताबिक डूब के कारण बीमारियों के फैलने की संभावना भी बहुत अधिक होती है। इसी कारण लोगों के लिए डायरिया, दस्त या मलेरिया जैसे रोगों के लिए दवाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं। किसी भी व्यक्ति के बीमार होने पर उसके इलाज की पूरी सुविधा तुरंत उपलब्ध कराई जाएगी।