फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हरियाणा: महज 10 महीने पुरानी पार्टी के मुखिया दुष्यंत बने 'किंगमेकर' पर किसके साथ जाएंगे?

Thu, 24 Oct 2019 10:59 AM IST
Nilesh Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • हरियाणा में 90 विधानसभा सीटें, 39 पर भाजपा, 29 पर कांग्रेस, 11 पर जजपा आगे
  • दुष्यंत चौटाला ने कहा न तो भाजपा और न ही कांग्रेस 40 सीटों को पार कर पाएगी
  • दुष्यंत: सत्ता की चाबी रहेगी जजपा के पास, प्रदेश में त्रिशंकु विधानसभा बनेगी

 

विज्ञापन
जजपा के किंगमेकर के तौर पर उभरने की संभावना - फोटो : dushyant, hooda & khattar
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

हरियाणा की 90 विधानसभा सीटों के नतीजों के लिए मतगणना जारी है और अबतक के रुझानों के अनुसार, कांग्रेस और भाजपा में कांटे की टक्कर चल रही है। मतगणना शुरू  होने के बाद से अबतक कभी भाजपा तो कभी कांग्रेस आगे होती रही। ऐसे में जजपा यानी जननायक जनता पार्टी के किंगमेकर के तौर पर उभरने की संभावना बन रही है। 

विज्ञापन

पूर्व सांसद और ताऊ कहे जाने वाले देवीलाल के परपोते दुष्यंत चौटाला की पार्टी जजपा ने भाजपा और कांग्रेस जैसे बड़े दलों को सकते में ला दिया है। मतगणना शुरू होने से पहले दुष्यंत ने दावा किया था कि हरियाणा में न भाजपा और न ही कांग्रेस 40 सीटें भी नहीं ला पाएगी। 

दुष्यंत ने 2018 में बनाई जजपा

पार्टी के गठन का एक साल भी नहीं हुआ है, लेकिन इसको कमतर नहीं आंका जा सकता। नौ दिसंबर 2018 को अस्तित्व में आई जजपा ने एक साल के अंदर अपनी सियासी जमीन खासी मजबूत की है। 
विज्ञापन


हरियाणा की सियासत में ताऊ चौधरी देवीलाल की जबरदस्त पकड़ थी। देवीलाल की पार्टी ने 1987 के हरियाणा विधानसभा चुनाव में 90 में से 85 सीटें जीतकर तहलका मचा दिया था। उनकी राजनीतिक विरासत को उनके बेटे ओम प्रकाश चौटाला ने संभाला और प्रदेश के मुख्यमंत्री बने, लेकिन 32 साल के बाद उनकी विरासत संभाल रहा चौटाला परिवार दो धड़ों में बंट गया है। इंडियन नेशनल लोक दल(इनेलो) में फूट हो गई। 

इनेलो की कमान जहां ओम प्रकाश चौटाला और उनके छोटे बेटे अभय चौटाला के हाथों में है तो भतीजे दुष्यंत चौटाला ने दिसंबर 2018 में अपनी अलग पार्टी जजपा बना ली। बीते 10 महीने में पार्टी तीसरा चुनाव लड़ रही है। पहले जींद उपचुनाव लड़ा, उसके बाद लोकसभा चुनाव और अब विधानसभा चुनाव में पूरी 90 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। 

क्या कहते हैं जानकार

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार,  जजपा, कांग्रेस के साथ जा सकती है। अभय चौटाला, भाजपा के नजदीकी बताए जाते हैं। ऐसा अकाली दल के मुखिया प्रकाश सिंह बादल से उनकी नजदीकी की वजह से है। दुष्यंत चौटाला और अभय में इन दिनों 36 का आंकड़ा है और ऐसे में दुष्यंत चौटाला कभी नहीं चाहेंगे कि वो भाजपा के खेमे में जाएं। 

भाजपा के खिलाफ जाटों की नाराजगी को जजपा ने कैश किया था। चुनावी रैलियों में जजपा ने उनसे समर्थन मांगा और जानकारों के अनुसार, जाटों के एक बड़े वोट बैंक का उनको साथ मिला भी। ऐसे में पार्टी, कांग्रेस के साथ जा सकती है। 

दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर प्रकाश उप्रेती के अनुसार, जजपा भाजपा को भी अपना समर्थन दे सकती है। इसके लिए भाजपा, जजपा को मुख्यमंत्री के बाद वाले कुछ अहम पदों का ऑफर दे सकती है। फिलहाल नतीजे आने तक कुछ भी स्पष्ट कह पाना मुश्किल है। 

विज्ञापन

कांग्रेस के साथ जाने में तंवर बन सकते हैं अड़ंगा

हरियाणा विधानसभा चुनाव परिणाम - फोटो : अमर उजाला
दुष्यंत चौटाला के कांग्रेस के साथ जाने को लेकर एक संशय भी है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके डॉ अशोक तंवर इसमें एक अहम फैक्टर होंगे। हरियाणा में लंबे समय तक पत्रकारिता कर चुके और वर्तमान में एक निजी विश्वविद्यालय में शिक्षक के रूप में कार्यरत डॉ प्रेम कुमार ने कहा कि कांग्रेस के बागी पूर्व प्रदेशाध्यक्ष तंवर जजपा में शामिल तो नहीं हुए पर, लेकिन विधानसभा चुनाव के लिए दुष्यंत चौटाला और उनके मजबूत प्रत्याशियों का समर्थन कर दिया। कांग्रेस छोड़ने के बाद तंवर के तेवर पुरानी पार्टी के नेताओं के प्रति तल्ख हैं और वह पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा के खिलाफ हैं। 

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें