केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने दुनियाभर के संगठनों से कोरोनाकाल में सभी लोगों तक कम कीमत में जरूरी दवाएं पहुंचाने के तरीके ढूंढने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि संकट की इस घड़ी में उद्योगों के लिए कोरोना टीकों के पेटेंट अधिकारों से चिपके रहने की कोई गुंजाइश नहीं है।
बुधवार को हर्षवर्धन ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के कार्यकारी बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में अपना कार्यकाल पूरा कर लिया। इस मौके पर संगठन के कार्यकारी बोर्ड के 149वें सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, महामारी जैसे मुश्किल समय में भी सहयोगात्मक अनुसंधान के लिए बहुत कम इच्छा दिख रही है।
सभी तबकों तक स्वास्थ्य पहुंचाने का लक्ष्य पाने के लिए दवाओं की सस्ती और आसान उपलब्धता एक प्रमुख कारक है। ऐसे में डब्ल्यूएचओ को विश्व व्यापार संगठन जैसे अन्य संस्थानों के साथ मिलकर महामारीकाल में अहम दवाओं तक सस्ती पहुंच सुनिश्चित करने के तरीके खोजने चाहिए।
टीकों का समान वितरण बड़ी चुनौती
हर्षवर्धन के मुताबिक, इस समय हमारे सामने टीकों का समान वितरण सबसे बड़ी चुनौती है। मेरा मानना है, डब्ल्यूएचओ में सभी को कमजोर लोगों की सेवा के लिए आगे कदम बढ़ाना चाहिए। यह समय आपसी सहयोग का है और हमें दिखाना चाहिए कि दुनिया एक है।
साझा आदर्शवाद की जरूरत
अपने संबोधन में हर्षवर्धन ने महामारीकाल में सभी सदस्य देशों को लगातार सहारा देने के लिए डब्ल्यूएचओ की प्रशंसा भी की। उन्होंने कहा, स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करने के लिए राष्ट्रों का साझा आदर्शवाद इस समय की सबसे बड़ी जरूरत है। गंभीर वैश्विक संकट में सार्वजनिक स्वास्थ्य में फिर से रुचि और निवेश बढ़ाने के लिए मजबूत वैश्विक भागीदारी की आवश्यकता है।
हुए भावुक
कार्यकारी बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में कार्यकाल पूरा करने को लेकर हर्षवर्धन ने कहा, बीते एक साल में इस पद पर काम करना मेरे लिए सम्मान की बात रही। मैं काफी भावुक महसूस कर रहा हूं, क्योंकि महामारीकाल और आर्थिक उथल-पुथल के बीच बहुत सारे काम किए जाने बाकी हैं। अब केन्या के स्वास्थ्य मंत्रालय के कार्यकारी डायरेक्टर जनरल डॉक्टर पैट्रिक एमथ हर्षवर्धन की जगह लेंगे