अरविंद केजरीवाल ने इस बाबत मोदी सरकार को आड़े हाथ लिया। दूसरी ओर, अरुण जेटली ने यह कह कर जेपी नड्डा का बचाव किया कि किसी भी जनप्रतिनिधि को पत्र लिखने का अधिकार है। हालांकि डॉ. हर्षवर्धन ने सीवीओ को हटा दिया, लेकिन इसके साथ ही उन्हें स्वास्थ्य मंत्रालय भी छोड़ना पड़ा। पीएम मोदी ने स्वास्थ्य मंत्रालय जेपी नड्डा को सौंप दिया। हर्षवर्धन को विज्ञान और प्रोद्योगिकी मंत्रालय दे दिया गया।
एम्स में खुशी की लहर दौड़ गई...
जिस वक्त डॉ. हर्षवर्धन को स्वास्थ्य मंत्रालय देने की सूचना आई तब एम्स के आईसीएमआर भवन में 'वर्ल्ड नो टोबैको डे-2019' पर व्हाइट पेपर रिलीज होना था। वहां आईसीएमआर के डीजी डॉ. बलराम भार्गव, डॉ. के श्रीनाथ रेड्डी, डॉ. रवि मेहरोत्रा, डॉ. चंद्रशेखर और डॉ. आरएस धालीवाल सहित अनेक डॉक्टर मौजूद थे। डॉ. हर्षवर्धन को लेकर जब इन डॉक्टरों से पूछा गया तो इन्होंने पीएम मोदी के फैसले पर खुशी जाहिर की।
पीएचईएल के प्रेजीडेंट डॉ. के श्रीनाथ रेड्डी और डॉ. चंद्रशेखर सहित तकरीबन सभी डॉक्टरों का कहना था कि डॉ. हर्षवर्धन हेल्थ के विषय को बहुत गहराई से जानते हैं। उन्हें स्वास्थ्य क्षेत्र की समस्याओं और उनके समाधान का भी पता है। उनकी अच्छी बात यह है कि वे किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी की राय लेते हैं।
उन्होंने कहा कि कोई डॉक्टर या कर्मचारी, वो चाहे किसी भी स्तर का हो, उसका पक्ष जरुर लेते हैं। एक्सपर्ट की बात वे खासतौर से सुनते हैं। डॉ. हर्षवर्धन को स्वास्थ्य मंत्रालय मिलने का मतलब है कि देश में अब स्वास्थ्य सेवाओं का विकास तेजी से होगा। उन्हें स्वास्थ्य क्षेत्र की बहुत जानकारी है। एम्स की ओपीडी में भी इसका असर देखा गया।