पांच राज्यों में हार का सामना करने के बाद कांग्रेस ने जी-23 की बैठक की थी। इसमें शामिल हुए नेताओं में हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भुपेंद्र सिंह हुड्डा ने राहुल गांधी से मुलाकात की है। इस मुलाकात की खास बात यह रही कि हुड्डा ऐसे पहले नेता हैं जिन्होंने बैठक के बाद गांधी परिवार के किसी सदस्य से मुलाकात की है। गौरतलब है कि बुधवार को हुई G-23 की बैठक के बाद वहां मौजूद नेताओं ने 'सामूहिक, समावेशी नेतृत्व' की बात कही थी।
ये बातें भी आ रही हैं सामने
वहीं, इस बात की भी चर्चा हो रही है कि हरियाणा के पूर्व सीएम भुपेंद्र सिंह हुड्डा खुद को या बेटे दीपेंद्र हुड्डा को कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष न बनाए जाने से नाराज है। इसके अवाला एक और जानकारी सामने आई है जिसके मुताबिक, गांधी परिवार की करीबी कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष शैलजा कुमारी से भी हुड्डा का विवाद चल रहा है।
बुधवार को हुई थी बैठक
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद के आवास पर बुधवार को जी-23 के नेताओं ने बैठक की थी। इसमें कांग्रेस के 18 असंतुष्ट नेता शामिल हुए थे। इसके अलावा इसमें कुछ नए नेता भी मौजूद रहे थे। हुड्डा भी कुछ दिन पहले ही इस दल में शामिल हुए हैं। इन नेताओं ने करीब 2 साल पहले सोनिया गांधी को पत्र लिखा था। इस पत्र में पार्टी के नेतृत्व समेत कई बड़े बदलावों की मांग की गई थी।
मल्लिकार्जुन खड़गे ने लगाया था आरोप
इससे पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने बुधवार को जी-23 नेताओं पर जमकर निशाना साधा था. उन्होंने आरोप लगाया था कि कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक के बाद भी जी-23 समूह के नेता बार-बार बैठकें कर रहे हैं। उनका मकसद पार्टी को तोड़ने का लगता है। उन्होंने यह भी कहा था कि पूरी कांग्रेस में कोई भी पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को कमजोर नहीं कर सकता। पार्टी के सभी लोग उनके साथ खड़े हैं।
G-23 समूह क्या है?
G-23 समूह में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता शामिल हैं। 2020 में जब पहली बार इन नेताओं का समूह चर्चा में आया तब इसमें 23 नेता शामिल थे। इसलिए इन्हें G-23 कहा गया। समूह में शामिल रहे जितिन प्रसाद बाद में भाजपा में शामिल हो गए। वहीं, योगानंद शास्त्री ने भी शरद पवार की पार्टी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का दामन थाम लिया। कुछ नेताओं ने खुद को इस समूह से अलग कर लिया।
कौन से नेता इस समूह में शामिल हैं?
गुलाम नबी आजाद,कपिल सिब्बल, शशि थरूर, मनीष तिवारी, आनंद शर्मा, पीजे कुरियन, रेणुका चौधरी, मिलिंद देवड़ा, मुकुल वासनिक, भूपेंद्र सिंह हुड्डा, राजिंदर कौर भट्टल, एम वीरप्पा मोइली, पृथ्वीराज चव्हाण, अजय सिंह, राज बब्बर, अरविंदर सिंह लवली, कौल सिंह ठाकुर, अखिलेश प्रसाद सिंह, कुलदीप शर्मा, संदीप दीक्षित, विवेक तन्खा। जितिन प्रसाद और योगानंद शास्त्री पार्टी छोड़ चुके हैं।
पांच राज्यों में रहा निराशाजनक प्रदर्शन
पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के परिणामों में कांग्रेस का बुरा हाल रहा। उत्तर प्रदेश में प्रियंका गांधी की मेहनत के बाद कांग्रेस के खाते में महज दो सीट आई। उसके 97 फीसदी उम्मीदवारों की जमानत तक जब्त हो गई। पंजाब में भी कांग्रेस को मुंह की खानी पड़ी। कांग्रेस को यहां 18 सीट मिलीं। पार्टी को उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर से भी काफी उम्मीदें थीं, लेकिन वहां भी कुछ हाथ नहीं लगा।