सुप्रीम कोर्ट ने कोविड-19 प्रबंधन से संबंधित मुद्दों पर लिए गए स्वत: संज्ञान मामले में वरिष्ठ वकीलों द्वारा की गई आलोचना पर गहरी नाराजगी जताई है। मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे, जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस एस रवींद्र भट की पीठ ने शुक्रवार को कहा, हाईकोर्ट के मामलों को सुप्रीम कोर्ट में मंगाने का हमारा कोई इरादा नहीं था, ऐसे में ऐसी आलोचनाएं निराधार हैं। इस मामले की सुनवाई अब मंगलवार को होगी। वहीं, पीठ ने वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे को न्याय मित्र से अलग होने की इजाजत दे दी।
जस्टिस एल नागेश्वर राव ने वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे से कहा, आदेश आने से पहले आलोचना शुरू हो गई। आलोचना उस बात को लेकर की जा रही है जिसका जिक्र आदेश में है ही नहीं। क्या वरिष्ठ वकीलों को बोलने का यह तरीका है और वह भी बिना आदेश पढ़े। इस पर दवे ने कहा, मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं था। हम सभी ने सोचा कि सुप्रीम कोर्ट, विभिन्न हाईकोर्ट में कोविड के प्रबंधन को लेकर चल रहे मामलों को अपने पास हस्तांतरित कर रहा है। यह आम धारणा थी। पहले भी ऐसा किया जा चुका है।
इससे पहले पीठ के समक्ष सुनवाई शुरू होते ही साल्वे ने कहा, मुझे इस मामले से अलग से अलग कर दिया जाए और किसी और को न्याय मित्र बनाया जाए। साल्वे ने कहा, मैं नहीं चाहता कि मामले की सुनवाई इस सोच के साथ हो कि मुख्य न्यायाधीश के साथ स्कूल की दोस्ती के कारण मुझे न्याय मित्र बनाया गया था। इस पर चीफ जस्टिस बोबडे ने कहा कि यह सुनकर मुझे भी पीड़ा हुई। वरिष्ठ वकीलों ने जो कुछ लिखा है, उन्हें पढ़कर मैं खुश नहीं हूं, लेकिन सभी की अपनी राय होती है। चीफ जस्टिस कई वरिष्ठ वकीलों द्वारा दिए गए बयानों का िजिक्र कर रहे थे, जो साल्वे को इस मामले में न्याय मित्र के तौर पर नियुक्ति की आलोचना कर रहे थे। मालूम कि दवे समेत कई वकीलों ने इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट की आलोचना की थी।
मुकदमों को गरिमापूर्ण तरीके से लड़ना भूल चुके हैं वकील: साल्वे
साल्वे ने कहा, मुझे नहीं पता था कि वकील दो खेमों में बंटे हुए हैं। एक जो उद्योगपति के लिए पेश हो चुका है और दूसरा जो उद्योगपति के खिलाफ है। साल्वे ने कहा कि मैं नहीं चाहता कि किसी तरह की तोहमत लगे। साल्वे ने यह भी कहा, आज हम मुकदमों को गरिमापूर्ण तरीके से लड़ने के भाव को त्याग कर चुके है।
सॉलिसिटर जनरल बोले, मीडिया के दबाव में न झुकें साल्वे
केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि साल्वे को मीडिया में बनाए गए दबाव के आगे नहीं झुकना चाहिए। उन्होंने अदालत से इस तरह की अनुचित आलोचना पर गौर फरमाने का आग्रह किया। मेहता ने कहा, हम ऐसी स्थिति में नहीं हैं कि मीडिया व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एक दुर्भावनापूर्ण प्रतिस्पर्धा हो। आखिर किसी दिन न्यायपालिका के किसी व्यक्ति को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की इस प्रवृत्ति पर संज्ञान लेना होगा। उन्होंने कहा, मैंने डिजिटल मीडिया पर लोगों को सचमुच गाली देते हुए देखा। इस पर गौर करने की जरूरत है। एक वकील को इस तरह की रणनीति के आगे नहीं झुकना चाहिए। साल्वे को पुनर्विचार करना चाहिए। ये सिद्धांत का सवाल है।
वरिष्ठ वकील संस्थान की रक्षा करें: जस्टिस भट
पीठ के तीसरे सदस्य जस्टिस एस रवींद्र भट ने दवे से कहा, हमने हाईकोर्ट की कार्यवाही नहीं रोकी। हमने केंद्र सरकार को हाईकोर्ट में अपनी बातें रखने के लिए कहा था। जस्टिस भट ने कहा कि वरिष्ठ वकीलों को संस्थान की रक्षा करनी चाहिए। जवाब में दवे ने कहा कि हमारा मानना है कि स्वस्थ आलोचना से ही संस्थान मजबूत होता है।