सिस्टर अभया हत्याकांड में अपने बयान से पलटने वाली गवाह रहीं कान्वेंट कुक आचम्मा के लिए सुप्रीम कोर्ट में देश के सबसे महंगे वकीलों में से एक हरीश साल्वे ने पैरवी की थी।
मामूली वेतन वाली आचम्मा की तरफ से अपने नार्को एनालिसिस टेस्ट को दी गई चुनौती के मामले में पैरवी के लिए करीब 15 लाख रुपये फीस लेने वाले साल्वे का उतरना किसी को भी हैरान कर सकता है।
सिस्टर अभया हत्याकांड में विशेष सीबीआई अदालत ने भी इसे बेहद विचित्र, लेकिन दिलचस्प मानते हुए अपने 229 पेज के फैसले में टिप्पणी के तौर पर शामिल किया था। जज सनल कुमार ने अपने फैसले में टिप्पणी की कि दिलचस्प लेकिन विचित्र तथ्य है कि कोट्टयम के सेंट पायस एक्स कॉन्वेंट हॉस्टल में कुक के तौर पर काम करने वाली आचम्मा बेहद कम वेतन पाती है।
इसके बावजूद उसने सीबीआई की तरफ से नार्को एनालिसिस टेस्ट कराए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और बेहद दूर नई दिल्ली जाकर एक बहुत महंगी याचिका दाखिल की। अदालत ने इस बात पर भी गौर किया था कि साल्वे की फीस का भुगतान कनाया कैथोलिक चर्च ने किया था।
जज ने कहा, जब अभियोजन ने पूछा कि शीर्ष अदालत के सामने उसके वकील कोई अन्य नहीं बल्कि भारत के सबसे बेहतरीन वकील हरीश साल्वे हैं तो उसने इनकार नहीं किया। उसने यह बताया कि उसकी याचिका का खर्च कॉन्वेंट ने किया है और वह इसकी बारीकियों की जानकारी नहीं है।
बता दें कि आचम्मा सिस्टर अभया हत्याकांड में सबसे अहम गवाहों में से एक थी। आचम्मा ने पुलिस को बताया था कि अभया की मौत की सुबह कॉन्वेंट की रसोई में उसने कुछ गड़बड़ी देखी थी। उसने बताया कि काम करने की जगह पर एक इलेक्ट्रिक लाइट जल रही थी और पिछली रात को अंदर से बंद किए गए दरवाजे पर बाहर से कुंडी लगी मिली थी। दरवाजे के पल्लों के बीच, एक नन का कपड़ा फंसा था। रसोई के फर्श पर एक कुल्हाड़ी पड़ी मिली थी।
हालांकि बाद में अदालत में वह अपने बयान से मुकर गई थी और अभियोजन ने उसे पक्षद्रोही घोषित कर दिया गया था। लेकिन सीबीआई कोर्ट में जिरह के दौरान उसने पुलिस को दिए गए अपने बयान को सही ठहराया था, लेकिन इसकी दोबारा पुष्टि करने से इनकार कर दिया था। इसके बावजूद आचम्मा की इस गवाही से अभियोजन को अपना मुकदमा साबित करने में बेहद मदद मिली थी।