कांग्रेस ने गुजरात में सत्ता में वापसी करने के लिए वहां के विभिन्न वर्गों के युवा नेता हार्दिक पटेल, जिग्नेश मेवाणी और अल्पेश ठाकोर का सहारा लिया। लेकिन चुनाव परिणाम के रूझानों के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि गुजरात में भाजपा और पीएम नरेंद्र मोदी की सत्ता बरकरार रहने वाली है। हार्दिक पटेल, जिग्नेश मेघाणी और अल्पेश ठाकोर की तिकड़ी भी कांग्रेस की सत्ता में वापसी का रास्ता नहीं खोल पाई है।
ताजा चुनावी रुझान बता रहे हैं कि पटेल बाहुल्य सीटों पर भाजपा का वर्चस्व बढ़ता जा रहा है। हार्दिक पटेल के लिए यह अच्छे संकेत नहीं है। पटेल ने वर्तमान में चुनाव नहीं लड़ा है। अल्पेश ठाकोर और जिग्नेश मेवाणी ने चुनाव लड़ा है।
40 वर्षीय अल्पेश ठाकोर राज्य की बड़ी सीटों में शामिल राधानपुर क्षेत्र से लगभग 15 हजार वोटों से चुनाव जीत गए हैं। 35 वर्षीय जिग्नेश मेवाणी वडगाम विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में करीब 20 हजार वोटों से चुनाव जीत गए हैं। यहां कांग्रेस ने मेवाणी के खिलाफ कोई उम्मीदवार नहीं उतारा था। वहीं आम आदमी पार्टी ने भी मेवाणी का समर्थन किया था।
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rahul gandhi and sonia gandhi
हार्दिक पटेल गुजरात में पाटीदार समुदाय के एक बड़े नेता है। अल्पेश ठाकोर की पहचान राज्य में सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता की है। वह ओबीसी वर्ग के एक बड़े नेता हैं। वहीं जिग्नेश मेवाणी दलित समुदाय से ताल्लुकात रखते हैं। तीनों की मदद के जरिए कांग्रेस ने राज्य में सत्ता के समीकरण नए सिरे से बनाने की कोशिश की थी लेकिन कांग्रेस का यह प्रयास नाकाम होता दिख रहा है।
1980 के बाद पहली बार गुजरात में जातिवाद दिखा है। कांग्रेस ने इसका फायदा उठाने की पूरी कोशिश की लेकिन उसको फायदा मिलता नहीं दिख रहा है। जातिवाद के हावी होने के बाद भी पीएम मोदी का असर कम होता नहीं दिख रहा है। राज्य में पाटीदार समुदाय करीब 12 फीसदी हैं। वहीं ओबीसी वर्ग करीब 30 फीसदी हैं।
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हार्दिक पटेल सीडी
- फोटो : self
हार्दिक पटेल पाटीदार आरक्षण आंदोलन के नेता के रूप में उभरे हैं। वह पटेलों के लिए आरक्षण की मांग कर रहे हैं। 2015 में व्यापक स्तर पर उन्होंने आंदोलन किया है। पाटीदार अनामत आंदोलन समिति 'पास' का गठन किया। पटेल की मांग है कि पाटीदारों को ओबीसी में शामिल किया जाए।
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अल्पेश ठाकोर
अल्पेश ठाकोर राज्य में अन्य पिछड़े वर्ग के नेता हैं। चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस में शामिल हुए थे। राज्य में क्षत्रिय-ठाकोर सेना की स्थापना की ताकि इस समुदाय को शराब से दूर किया जा सके। ओबीसी, एससी, एसटी मंच का गठन किया। आरक्षण की मांग की। आरक्षण आंदोलन में हार्दिक पटेल के सहयोगी हैं।
जिग्नेश मेवाणी राज्य में दलित चेहरा हैं। राज्य के वेरावल में दलितों की पिटाई के बाद आंदोलन कर चर्चा में आए। पत्रकार, वकील और सामाजिक कार्यकर्ता के बाद दलित नेता बने। वेरावल में उना की घटना के बाद मेवाणी ने घोषणा की कि अब दलित लोग समाज के लिए गंदा काम नहीं करेंगे। मेवाणी ने दलितों की यात्रा का आयोजन भी किया है।
ताजा रुझाान के मुताबिक गुजरात में भाजपा 98 सीटों पर आगे चल रही है। वहीं कांग्रेस और उसके सहयोगी 81 सीटों पर बढ़त बनाए हुए हैं। गुजरात में कुल 182 विधानसभा सीटे हैं। बहुमत के लिए 92 सीटों की जरूरत है। भाजपा को राज्य में दक्षिण भाग में काफी सफलता मिली है। आदिवासी क्षेत्रों में भी भाजपा को मजबूत समर्थन मिला है।