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एक्सप्लेनर: एपल शुरू करने से पहले भारत क्यों आए थे स्टीव जॉब्स, उनकी यात्रा कैसे बनी 'हनुमान अंश' की प्रेरणा?

Mon, 07 Sep 2026 12:31 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र स्पेशल डेस्क, अमर उजाला

सार

दो करोड़ के बजट वाली 'हनुमान अंश' की कमाई 100 करोड़ के ऊपर पहुंची। जानें कैसे स्टीव जॉब्स की नीम करौली बाबा से मिलने के लिए की गई भारत यात्रा की कहानी और कैसे इससे प्रेरणा लेकर 21 साल की अनुप्रिया नागर ने फिल्म बनाने के बारे में सोचा।
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हनुमान अंश फिल्म के निर्माण में स्टीव जॉब्स की भारत आने की कहानी बनी प्रेरणा। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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नीम करौली बाबा पर बनी फिल्म हनुमान अंश इस वक्त पूरे देश में धूम मचा रही है। रिलीज के 30 दिन में ही फिल्म ने 100 करोड़ से ज्यादा की कमाई कर ली है। वह भी तब, जब शुरुआती 20 दिन में फिल्म ने सिर्फ 12 करोड़ ही कमाए थे। यानी 10 दिन में ही फिल्म ने 88 करोड़ रुपये कमा लिए हैं। हनुमान अंश के बारे में एक खास बात यह है कि एक समय ऐसा आया था, जब फिल्म अधिकतर थिएटरों से उतर गई थी, हालांकि निर्देशक-निर्माता की कोशिशों और जुबानी प्रचार यानी वर्ड ऑफ माउथ पब्लिसी के दम पर फिल्म अब लगातार लोकप्रियता हासिल कर रही है। 
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इस फिल्म के बनने से लेकर इसके रिलीज को लेकर अब तक कई कहानियां भी सामने आ चुकी हैं। हालांकि, एक हालिया खुलासा इस फिल्म की निर्माता अनुप्रिया नागर ने किया है। 21 साल की अनुप्रिया ने बताया है कि उन्होंने कभी भी फिल्म बनाने का नहीं सोचा था। लेकिन एपल के सह-संस्थापक दिवंगत स्टीव जॉब्स की नीम करौली बाबा से जुड़ी एक कहानी ने उन्हें हनुमान अंश का निर्माण करने के लिए प्रेरित किया।

ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर जिस निर्माता ने कभी फिल्म बनाने का सोचा भी नहीं था, वह कैसे हनुमान अंश के निर्माण के लिए तैयार हुईं? स्टीव जॉब्स का नीम करौली बाबा से क्या कनेक्शन रहा है? कैसे जॉब्स ने उनसे मुलाकात के लिए भारत का दौरा करने का फैसला किया? एपल के सह-संस्थापक की इस यात्रा के दौरान क्या हुआ? भारत पर उनके विचार क्या थे? आइये जानते हैं...


पहले जानें- कैसे निर्माता को मिली हनुमान अंश के निर्माण की प्रेरणा?

हनुमान अंश की निर्माता अनुप्रिया नागर ने अलग-अलग साक्षात्कारों में फिल्म के निर्माण से जुड़ने की कहानी बताई है। उन्होंने बताया कि नीम करौली बाबा (महाराज जी) पर फिल्म बनाना एक बड़ा जोखिम था, लेकिन उनका इरादा कभी भी बॉक्स ऑफिस पर भारी कमाई करने का नहीं था। 

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हनुमान अंश की निर्माता अनुप्रिया नागर। - फोटो : अमर उजाला
अनुप्रिया के मुताबिक उन्हें यह बात काफी अजीब लगी कि एक भारतीय संत के बारे में उन्हें किसी विदेशी लेख से जानकारी मिल रही थी। इसके बाद उन्होंने इस विषय पर और रिसर्च करने का फैसला किया जो बाद में फिल्म बनाने का जरिया बना।


फिल्म से हुई कमाई का क्या करेंगी निर्माता?

अनुप्रिया ने साझा किया कि पहले हफ्ते के बाद पूरी फिल्म इंडस्ट्री ने इसे फ्लॉप घोषित कर दिया था, जिससे उनका मनोबल भी टूट गया था। लेकिन दर्शकों और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के बीच चर्चा के कारण यह रातोंरात एक बड़ा बदलाव लेकर आई, जिसे वे एक चमत्कार मानती हैं।

फिल्म की सफलता पर अनुप्रिया ने कहा, "मैं बहुत खुश हूं कि लोग इसे इतना पसंद कर रहे हैं और देख रहे हैं। मैं केवल 21 साल की हूं और मुझे समझ नहीं आ रहा कि मैं इतने सारे पैसों का क्या करूंगी।" हालांकि, वे कहती हैं कि इस फिल्म से मिले मुनाफे का इस्तेमाल जरूरतमंद बच्चों की मदद और दान  के लिए करना चाहती हैं।

हनुमान अंश की निर्माता अनुप्रिया नागर। - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने ने यह भी बताया कि फिल्म के निर्माण में तीन मुख्य निर्माता और सह-निर्माता शामिल थे, और महाराज जी के आशीर्वाद से उनके रास्ते की हर बाधा दूर होती गई।

अनुप्रिया के मुताबिक, जब उन्होंने पहली बार अपने पिता को फिल्म बनाने की बात कही, तो अर्थशास्त्र की छात्रा होने की वजह से उनके पिता फैसले पर काफी हैरान थे। लेकिन जब उन्हें पता चला कि फिल्म नीम करौली बाबा पर है, तो वे तुरंत मान गए और आज वे अपनी बेटी पर बहुत गर्व महसूस करते हैं।

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स्टीव जॉब्स की भारत आने की कहानी बनी हनुमान अंश फिल्म की प्रेरणा। - फोटो : अमर उजाला

स्टीव जॉब्स का क्या है नीम करौली बाबा से कनेक्शन, जिसने निर्माता को दी प्रेरणा?

साल 1974 में, जॉब्स को वीडियो गेम बनाने वाली कंपनी अटारी में अपनी पहली नौकरी मिली। उसी साल वे आध्यात्मिक स्पष्टता और आत्मज्ञान की खोज में अपने कॉलेज के दोस्त डैन कोटके के साथ भारत की यात्रा पर निकल पड़े। स्टीव जॉब्स की आत्मकथा लिखने वाले वॉल्टर आइजैक्सन के मुताबिक, स्टीव जॉब्स हमेशा से आध्यात्मिक स्पष्टता और ज्ञान/आत्मज्ञान की खोज के लिए पूर्व की तरफ जाना चाहते थे। इसी के चलते उनकी यात्रा का सबसे अहम पड़ाव भारत बना। वे आंतरिक शांति और जीवन के गहरे अर्थों को तलाश रहे थे।

स्टीव जॉब्स भारत में पहली बार नीम करौली बाबा से मिलने आए थे। नीम करौली बाबा को उनके अनुयायी 'महाराज-जी' के नाम से भी पुकारते थे और वे भगवान हनुमान के परम भक्त थे। स्टीव जॉब्स और उनके साथ भारत आने वाले दोस्त डैन कोटके ने राम दास की लोकप्रिय आध्यात्मिक पुस्तक बी हेयर नाउ (Be Here Now) पढ़ी थी। यह किताब उस दौर के अमेरिकी युवाओं को पूर्वी अध्यात्म की ओर आकर्षित कर रही थी। इसी को पढ़कर दोनों दोस्तों के मन में उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में स्थित बाबा के कैंची धाम आश्रम जाने की इच्छा जागी।

भारत में स्टीव जॉब्स को क्या मिला?

जब स्टीव जॉब्स और डैन कोटके 1974 में कैंची आश्रम पहुंचे, तो उन्हें पता चला कि नीम करौली बाबा का कुछ समय पहले, यानी 11 सितंबर 1973 को देहांत हो चुका था। गुरु के महासमाधि लेने के कारण आश्रम लगभग खाली और वीरान था। गुरु से न मिल पाने के बाद, वे एक सूखी नदी के रास्ते पैदल चढ़ाई करते हुए हैदाखान बाबाजी के आश्रम पहुंचे। स्टीव जॉब्स ने भारत में करीब सात महीने बिताए। स्टीव जॉब्स की आत्मकथा के मुताबिक, इस दौरान वे जेब में बहुत कम पैसों के साथ अक्सर नंगे पैर घूमा करते थे। वे मंदिरों में, धर्मशालाओं में या फिर गांवों में स्थानीय परिवारों के साथ रहते थे। उन्होंने उत्तर भारत के हरिद्वार, नैनीताल और मनाली जैसे पवित्र और धार्मिक स्थलों की यात्रा भी की।

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इस यात्रा से उन्होंने क्या सीखा और एपल पर इसका क्या असर हुआ?

भारत के ग्रामीण इलाकों के लोगों को करीब से देखने के बाद जॉब्स ने महसूस किया कि वे लोग हमारी (पश्चिमी देशों की) तरह केवल बुद्धि का इस्तेमाल नहीं करते, बल्कि उनका काफी ज्यादा विकसित होता है। 

इस यात्रा के दौरान परमहंस योगानंद की लिखी किताब एक योगी की आत्मकथा (Autobiography of a Yogi) उनकी सबसे बड़ी साथी बनी। उन्होंने इसे किशोरावस्था में पहली बार पढ़ा था, भारत यात्रा के दौरान दोबारा पढ़ा और फिर अपनी पूरी जिंदगी में हर साल एक बार इस किताब को जरूर पढ़ते थे।

गुरु से न मिल पाने के बावजूद, कैंची धाम में बिताए वक्त और भारत में सीखी सादगी ने जॉब्स के विचारों को पूरी तरह बदल दिया। इसके बाद वे जेन बौद्ध धर्म के विचारों से भी गहरे प्रभावित हुए, जहां से उन्हें सीख मिली कि सादगी ही अंतिम परिष्कार है। यही सीख आगे चलकर एपल की मिनिमलिस्ट डिजाइन फिलॉसफी यानी सादगी से भरे और सुंदर उत्पादों का मुख्य आधार बनी।

बताया जाता है कि जब जॉब्स भारत से अमेरिका लौटे, तो शारीरिक रूप से काफी कमजोर और दुबले हो चुके थे और उनके भीतर एक तीव्र अंतर्ज्ञान का विकास हो चुका था। जॉब्स का मानना था कि भारत यात्रा की इस सीख ने सादगी और डिजाइन को लेकर उनके दृष्टिकोण को हमेशा के लिए बदल दिया।
 

हनुमान अंश की सफलता सवाल-जवाब में


1. फिल्म 'हनुमान अंश' की बॉक्स ऑफिस सफलता क्या है और इसका बजट कितना था?

फिल्म 'हनुमान अंश' 2 करोड़ रुपये से भी कम के सीमित बजट में बनी है। शुरुआती 20 दिनों में इसने केवल 12 करोड़ रुपये कमाए थे, लेकिन दर्शकों की जुबानी चर्चा (वर्ड ऑफ माउथ) के दम पर अगले 10 दिनों में 88 करोड़ रुपये कमाकर फिल्म ने 30 दिनों में 100 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया।

2. 21 साल की निर्माता अनुप्रिया नागर को यह फिल्म बनाने की प्रेरणा कैसे मिली?

कॉलेज के आखिरी साल में टेक कंपनियों पर रिसर्च करते समय अनुप्रिया को पता चला कि स्टीव जॉब्स नीम करौली बाबा से काफी प्रभावित थे और उन्हें कैंची धाम में ही दुनिया का पहला रंगीन कंप्यूटर बनाने का विचार आया था। एक विदेशी लेख से भारतीय संत के प्रभाव के बारे में जानकर उन्होंने रिसर्च शुरू की और इसी से फिल्म बनाने की प्रेरणा मिली।

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3. स्टीव जॉब्स 1974 में भारत और कैंची धाम क्यों आए थे?

आध्यात्मिक स्पष्टता और आत्मज्ञान की तलाश में स्टीव जॉब्स अपने दोस्त डैन कोटके के साथ भारत आए थे। राम दास की पुस्तक 'बी हियर नाउ' पढ़कर वे भगवान हनुमान के परम भक्त नीम करौली बाबा से मिलने कैंची धाम आश्रम पहुंचे थे, हालांकि वहां पहुंचने पर उन्हें पता चला कि बाबा का देहांत कुछ समय पहले (11 सितंबर 1973) हो चुका था।

4. भारत यात्रा और कैंची धाम का Apple के डिज़ाइन पर क्या प्रभाव पड़ा?

भारत यात्रा के दौरान जॉब्स ने महसूस किया कि भारतीय ग्रामीणों का अंतर्ज्ञान (Intuition) पश्चिमी बुद्धि से कहीं अधिक गहरा है। परमहंस योगानंद की 'एक योगी की आत्मकथा' और जेन बौद्ध धर्म के सादगी वाले विचारों ने उन पर गहरा असर डाला, जो बाद में Apple के उत्पादों की मिनिमलिस्ट (साधारण और सुंदर) डिज़ाइन फिलॉसफी का आधार बना।

5. फिल्म 'हनुमान अंश' की कमाई का उपयोग निर्माता किस काम के लिए करेंगी?

निर्माता अनुप्रिया नागर ने साझा किया है कि फिल्म से होने वाले मुनाफे का इस्तेमाल वे जरूरतमंद बच्चों की मदद और विभिन्न सामाजिक व धार्मिक कार्यों में दान के लिए करेंगी।

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