हंसखाली गैंगरेप और नाबालिग की मौत मामले में पश्चिम बंगाल की अदालत ने नौ आरोपियों को दोषी ठहराया है। 2022 की इस घटना ने राज्यभर में आक्रोश पैदा किया था। हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने जांच की थी। मुख्य आरोपी पंचायत नेता का बेटा भी शामिल है।
पश्चिम बंगाल के नादिया जिले के हंसखाली में वर्ष 2022 में हुई नाबालिग के गैंगरेप और बाद में मौत के मामले में अदालत ने अहम फैसला सुनाया है। राणाघाट की अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने सोमवार को इस जघन्य अपराध में शामिल नौ आरोपियों को दोषी ठहराया। यह मामला सामने आने के बाद पूरे राज्य में आक्रोश फैला था और विपक्षी दलों ने इसे कानून-व्यवस्था की गंभीर नाकामी बताया था।
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अदालत ने दोषियों को सजा की मात्रा तय करने के लिए मंगलवार यानी 24 दिसंबर की तारीख तय की है। इस मामले की जांच सीबीआई ने की थी, जिसे कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश पर राज्य पुलिस से हटाकर सीबीआई को सौंपी गई थी। अदालत ने सभी उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहियों के आधार पर नौ लोगों को दोषी पाया।
जन्मदिन पार्टी में वारदात
यह दिल दहला देने वाली घटना 4 अप्रैल 2022 को हुई थी। 14 वर्षीय किशोरी को एक सत्तारूढ़ दल के पंचायत नेता के बेटे की जन्मदिन पार्टी में बुलाया गया था। आरोप है कि उसी दौरान उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया। गंभीर रूप से घायल होने के बाद किशोरी की तबीयत बिगड़ गई और अगले दिन उसकी मौत हो गई।
जल्दबाजी में अंतिम संस्कार
पीड़िता की मौत के बाद उसका शव जल्दबाजी में जला दिया गया। आरोप है कि यह अंतिम संस्कार आरोपियों के दबाव में किया गया, ताकि सबूत मिटाए जा सकें। इस कदम ने मामले को और गंभीर बना दिया और पूरे राज्य में भारी विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। विपक्षी दलों ने इसे सत्ता के दुरुपयोग का उदाहरण बताया।
कौन-कौन दोषी?
मुख्य आरोपियों में तृणमूल कांग्रेस के एक पंचायत नेता का बेटा ब्रजगोपाल गोआली, प्रभाकर पोद्दार और रंजीत मलिक शामिल हैं। इन पर भारतीय दंड संहिता की धारा 376 डीए के तहत 16 वर्ष से कम उम्र की बच्ची से गैंगरेप और पॉक्सो की धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। बाकी छह आरोपियों पर आपराधिक साजिश, साझा मंशा और अन्य धाराओं में मुकदमा चला। इन तीनों मुख्य आरोपियों पर भी आईपीसी की अतिरिक्त धाराएं लगाई गई थीं।
इस मामले में अधिवक्ता अनिंद्य दास ने हाईकोर्ट का रुख किया था और तर्क दिया था कि आरोपी पक्ष से जुड़े राजनीतिक प्रभाव के कारण निष्पक्ष जांच संभव नहीं है। इसके बाद ही जांच सीबीआई को सौंपी गई। अदालत का यह फैसला पीड़िता को न्याय की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। अब सभी की निगाहें मंगलवार को सुनाई जाने वाली सजा पर टिकी हैं।