पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी की 'हिंदू चरमपंथ' और आरएसएस को लेकर की गई टिप्पणी पर भाजपा ने गुस्सा जताया है। वहीं, मुस्लिम धर्मगुरुओं ने इस बयान पर असहमति जताई है। ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने कहा कि भारत में मुसलमानों को बाहरी व्यक्ति जैसा महसूस नहीं कराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि संवैधानिक पदों पर रहने वाले लोगों से समाज के सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व करने की अपेक्षा की जाती है।
एएनआई से बातचीत में रशीदी ने अंसारी के पद पर रहते हुए मुसलमानों के पक्ष में दिए गए बयानों पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि उपराष्ट्रपति पद से हटने के बाद अंसारी की ओर से इस तरह के कई बयान सामने आए हैं। रशीदी ने कहा, 'हामिद अंसारी जब उपराष्ट्रपति थे, तब उनकी ओर से मुसलमानों के पक्ष में ज्यादा बयान देखने को नहीं मिले। लेकिन पद से हटने के बाद उनके कई बयान सामने आए हैं और ऐसा लगता है कि अब वह खुद को मुसलमानों के नेता के तौर पर पेश कर रहे हैं।'
मुसलमानों को भारत में रहने पर गर्व : मौलाना साजिद रशीदी
मौलाना साजिद रशीदी ने कहा कि सांविधानिक पदों पर रहने वाले लोगों को समाज के सभी वर्गों के लिए काम करना चाहिए। उन्होंने ने यह भी सवाल उठाया कि पद से हटने के बाद ही ऐसे मुद्दे क्यों उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि चरमपंथ को इस आधार पर देखा जाना चाहिए कि क्या उससे दूसरों के प्रति नफरत पैदा होती है। उन्होंने कहा, 'चरमपंथ तब गलत हो जाता है जब उसमें दूसरों के प्रति नफरत शामिल हो। अगर कोई अपने धर्म का पालन करता है और दूसरों को परेशान नहीं करता, तो यह अलग बात है।'
देश में मुसलमानों के साथ व्यवहार का जिक्र करते हुए रशीदी ने कहा कि विभाजन के समय मुसलमानों ने भारत में रहने का फैसला किया और देश के लिए योगदान दिया। उन्होंने कहा, 'हम गर्व से कहते हैं कि हम मुसलमान हैं, लेकिन हमें इससे भी ज्यादा गर्व है कि हम भारत में रहते हैं।'
देश का माहौल खराब करने की साजिश : मौलाना उमर अहमद इलियासी
वहीं, आईएएनएस से बातचीत में ऑल इंडिया इमाम ऑर्गनाइजेशन के मुख्य इमाम उमर अहमद इलियासी ने भी 'हिंदू चरमपंथ' को लेकर अंसारी की टिप्पणी की आलोचना की। उन्होंने कहा, ''हामिद अंसारी अब मुसलमानों के नाम पर राजनीति करना चाहते हैं, लेकिन जब वह बड़े पदों पर थे, तब उन्हें मुसलमानों की याद नहीं आई। आज उन्हें मुसलमान याद आ रहे हैं। आज जब मुसलमान उनके बारे में नहीं पूछ रहे हैं, तो उन्हें लगता है कि मुसलमानों के नाम का इस्तेमाल कर राजनीति करनी चाहिए।''
इलियासी ने आगे कहा, ''मुसलमान समझदार हैं। वे इस तरह के बयानों और उनकी मंशा को समझते हैं। मुझे लगता है कि इस तरह की बयानबाजी के जरिए देश का माहौल खराब करने की कोई बड़ी साजिश या योजना नजर आती है। कोई भी मुसलमान इस बयान से सहमत नहीं है। वह जिस भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं, उसके बारे में अपना नजरिया बदलना चाहिए। अगर उनका नजरिया बदलता है, तो स्थिति भी बदल जाएगी।''
भाजपा बोली- बयान वापस लें
भाजपा के नेता और अधिवक्ता करुणासागर ने पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के उस बयान की कड़ी आलोचना की है, जिसमें उन्होंने हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता को साम्यवाद से ज्यादा खतरनाक बताया था। करुणासागर ने हिंदू पुनर्जागरण को चरमपंथ बताए जाने पर भी सवाल उठाए। एएनआई से बातचीत में करुणासागर ने कहा कि हामिद अंसारी का हिंदू पुनर्जागरण को चरमपंथ बताना और हिंदू चरमपंथ को साम्यवादी चरमपंथ से ज्यादा खतरनाक कहना चौंकाने वाला और शर्मनाक है।
उन्होंने कहा, 'पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी का हिंदू पुनर्जागरण को चरमपंथ बताना और हिंदू चरमपंथ को साम्यवादी चरमपंथ से ज्यादा खतरनाक कहना बहुत चौंकाने वाला और शर्मनाक है। हामिद अंसारी यह भूल गए होंगे कि माओवादी आंदोलन के नाम पर वामपंथी चरमपंथ ने हजारों सुरक्षाकर्मियों, पुलिसकर्मियों और नागरिकों की जान ली है।' करुणासागर ने अंसारी से इस्लामी आतंकवाद, वामपंथी आतंकवाद और किसी भी तरह के चरमपंथ के खिलाफ बोलने की अपील की। उन्होंने कहा कि केवल हिंदू पुनर्जागरण को निशाना बनाना उचित नहीं है।
वामपंथी चरमपंथ ने ली हजारों की जान : भाजपा
उन्होंने कहा, 'हामिद अंसारी यह भूल गए होंगे कि माओवादी आंदोलन के नाम पर वामपंथी चरमपंथ ने हजारों सुरक्षाकर्मियों, पुलिसकर्मियों और नागरिकों की जान ली है। अगर मुद्दा चरमपंथ है तो हामिद अंसारी को इस्लामी आतंकवाद, वामपंथी आतंकवाद और किसी भी तरह के चरमपंथ की निंदा करनी चाहिए। लेकिन चुनिंदा तरीके से हिंदू और सांस्कृतिक पुनर्जागरण को चरमपंथ बताना और इस चरमपंथ को लोकतंत्र के लिए खतरनाक कहना बहुत शर्मनाक है। हामिद अंसारी को अपने शब्द वापस लेने चाहिए।'
हामिद अंसारी ने क्या कहा था?
हामिद अंसारी ने बीती 18 सितंबर को एक किताब के हवाले से पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की एक टिप्पणी का जिक्र किया। अंसारी ने बताया कि नेहरू ने कहा था कि भारत के लिए असली खतरा वामपंथ नहीं, बल्कि हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे धार्मिक पहचान के आधार पर नागरिकों के बीच अंतर करने और असुरक्षा का माहौल पैदा होने का खतरा है।