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Halla bol Yatra: आत्महत्या नहीं, अब होगा आंदोलन, 16 अगस्त से शुरू होगी बेरोजगारी के खिलाफ 'हल्ला बोल यात्रा'

Thu, 11 Aug 2022 05:49 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Halla bol Yatra: राजधानी पटना स्थित गांधी संग्रहालय में 'युवा हल्ला बोल' अध्यक्ष अनुपम ने गुरुवार को यात्रा का सम्पूर्ण विवरण और कैलेंडर जारी किया। अनुपम ने कहा, पश्चिम चंपारण के भितिहरवा स्थित गांधी आश्रम से आरंभ कर बेतिया मोतिहारी के कई हिस्सों से होते हुए पहले ही सप्ताह में 'हल्लाबोल' यात्रा सीतामढ़ी मुजफ्फरपुर और दरभंगा जिले में प्रवेश कर जाएगी...
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युवा हल्ला बोल की टीम - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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बेरोजगार युवाओं को सरकार से चाहिए भ-रो-सा यानी भारत रोजगार संहिता। देश में रोजगार की मौजूदा स्थिति को लेकर युवा हल्लाबोल के राष्ट्रीय संयोजक अनुपम, 16 अगस्त से बिहार में हल्लाबोल यात्रा शुरू करेंगे। बिहार के सभी जिलों से गुजरती हुई इस यात्रा का समापन 23 सितंबर को पटना में एक विशाल सम्मेलन के साथ होगा। कई युवा, जो सरकारी लापरवाही के चलते समय पर रोजगार नहीं ले पाते। ऐसे में वे युवा आत्महत्या जैसा घातक कदम उठा लेते हैं। अनुपम ने कहा, अब आत्महत्या नहीं, आंदोलन होगा। पश्चिम चंपारण के भितिहरवा स्थित गांधी आश्रम से आरंभ कर बेतिया मोतिहारी के कई हिस्सों से होते हुए पहले ही सप्ताह में 'हल्लाबोल' यात्रा सीतामढ़ी मुजफ्फरपुर और दरभंगा जिले में प्रवेश कर जाएगी। बिहार के सभी जिलों में युवाओं के साथ संवाद होगा। हर जिले में स्थानीय छात्र, युवा और प्रबुद्ध नागरिक, यात्रा कार्यक्रमों का आयोजन करेंगे, ताकि व्यापक स्तर पर जनसंवाद हो सके।

मोदी सरकार में करोड़ों रोजगार नष्ट हो गए

राजधानी पटना स्थित गांधी संग्रहालय में 'युवा हल्ला बोल' अध्यक्ष अनुपम ने गुरुवार को यात्रा का सम्पूर्ण विवरण और कैलेंडर जारी किया। 'युवा हल्ला बोल' महासचिव प्रशांत कमल ने कहा कि 'हल्लाबोल यात्रा' बेरोजगारी के खिलाफ होने वाले राष्ट्रीय युवा आंदोलन के लिए एक मील का पत्थर साबित होगी। अब चुप्पी साधने या तटस्थ रहने की बजाए राष्ट्रनिर्माण के इस आंदोलन में कूदने का वक़्त आ गया है। बेरोजगारी को राष्ट्रीय आपदा बताते हुए प्रशांत ने कहा, "प्रति वर्ष दो करोड़ रोजगार का वादा करके सत्ता में आए मोदी सरकार में करोड़ों रोजगार नष्ट हो गए। चाहे रेलवे हो, बैंक हो, एसएससी या यूपीएससी ही क्यों न हो, हर जगह साल दर साल सीटें कम होती जा रही हैं। अग्निपथ जैसी सेना विरोधी योजना लाकर युवाओं के सपनों को ही नहीं रौंदा गया, देश की सुरक्षा को भी ठेके के हवाले किया जा रहा है। केंद्र से लेकर राज्य तक एक ही कहानी है। शिक्षकों के लाखों पद रिक्त हैं, फिर भी बहाली के नाम पर सरकार सिर्फ बहानेबाजी करती है। यहां तक कि प्राइवेट कंपनियों में भी ढंग का काम नहीं मिल रहा।

आज जीवन मरण का सवाल बन चुकी है बेरोजगारी

'युवा हल्ला बोल' की राष्ट्रीय परिषद के सदस्य अर्जुन मिश्रा ने बेरोजगारी के कारण बढ़ती आत्महत्याओं पर चिंता जताते हुए कहा कि हमारे युवा देश के लिए यह आज सबसे बड़ा सवाल होना चाहिए। 'हल्लाबोल यात्रा' के पीछे ये भी एक उद्देश्य है कि 'आत्महत्या नहीं, आंदोलन होगा' के नारे पर देशभर के युवाओं को एकजुट किया जाए। अर्जुन ने कहा, बेरोजगारी आज जीवन मरण का सवाल बन चुका है। युवाओं में हताशा है। आत्महत्या की खबरें आम बात हो गई हैं। सरकार की कुरीतियों के कारण आम जनता बेरोजगारी, महंगाई, भ्रष्टाचार से त्रस्त है। भूख, प्यास और आजीविका आज संकट में है। छात्र-युवाओं के भविष्य को अंधेरे में धकेलकर देश के उज्ज्वल भविष्य की कोई परिकल्पना बेमानी है। सरकारी भर्तियों को लेकर 'युवा हल्ला बोल' नेता रोहन कुमार ने बताया, 'सरकारी क्षेत्र में भारी संख्या में पद रिक्त होने के बावजूद भर्तियां निकाली नहीं जा रहीं। निकलती भी हैं तो परीक्षाएं ही नहीं होती। परीक्षा हो जाए तो पेपर लीक, पेपर हो तो रिजल्ट में देरी और रिजल्ट आ जाए तो नियुक्ति नहीं। असल में इनकी प्राथमिकता में नौकरी देना है ही नहीं। इनकी प्राथमिकता उन सरकारी उपक्रमों को बेचना है जो देश को फायदा और युवाओं को नौकरी देते हैं।

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पिछले आठ सालों में मात्र 7.22 लाख नौकरियां दीं

लोकसभा में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार पिछले 8 साल में मात्र 7.22 लाख नौकरियां दी गईं। बेरोजगारी का आलम ऐसा है कि इसी दौरान 22 करोड़ से भी ज्यादा युवाओं ने नौकरी के लिए फॉर्म भरा। सबसे कमाल की बात है कि जो सरकार 8 साल में 8 लाख नौकरी नहीं दे पाई, वो अब अगले डेढ़ साल में दस लाख नौकरी देने का नया जुमला दे रही है। युवा नेता अनुपम ने कहा कि युवाओं को जॉब चाहिए, जुमला नहीं। लेकिन दुख की बात है कि बेरोजगार युवाओं का सरकार से भरोसा उठता जा रहा है। सरकार की नाकामियों और वादाखिलाफी के कारण बेरोजगारी अब जीवन मरण का सवाल बन चुका है। युवाओं में व्याप्त गहरे असंतोष के कारण आज स्थिति विस्फोटक बनी हुई है। जरूरत है इस आक्रोश को एक सकारात्मक दिशा देने की, शांतिपूर्ण समाधान के तरफ ले जाने की। यह तभी संभव है जब सरकार युवाओं को बेहतर भविष्य और राष्ट्रनिर्माण में भागीदारी का ठोस भरोसा दे। 'भारत रोजगार संहिता' कई लोगों की भागीदारी और सुझाव से बना है। आज यह संहिता भीषण बेरोजगारी से पीड़ित हमारे देश की सबसे बड़ी जरूरत है, इसलिए 'हल्लाबोल यात्रा' के दौरान आम जनता से संवाद करके भ-रो-सा के प्रति व्यापक जनसमर्थन तैयार किया जाएगा। यात्रा की सूचनाओं और शामिल होने की इच्छा रखने वालों के लिए एक हेल्पलाइन नंबर 9810408888 भी जारी किया गया है।

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