विहिप सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, विहिप राममंदिर निर्माण संपन्न होने के पूर्व किसी अन्य मुद्दे को अपने हाथ में नहीं लेना चाहता। लेकिन इस समय ज्ञानवापी, ताजमहल और क़ुतुबमीनार पर उठे ताजा विवाद के बीच इन मुददों पर भी चर्चा हो सकती है। माना जा रहा है कि बैठक में इन मुद्दों से जुड़ा प्रस्ताव भी पास किया जा सकता है...
विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल की बैठक 11-12 जून को हरिद्वार के भूपतवाला में होगी। देश के शीर्ष संतों की इस संस्था की बैठक में लगभग 300 संत भाग लेंगे। ज्ञानवापी, कुतुबमीनार और ताजमहल पर उठे विवाद के बीच होने वाली इस बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैठक में इन मुद्दों से जुड़ा प्रस्ताव पारित किया जा सकता है।
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विहिप सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस समय संगठन की प्राथमिकता अयोध्या में राममंदिर निर्माण है। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंदिर के गर्भगृह की आधारशिला रख चुके हैं और मंदिर निर्माण का कार्य 2024 के पूर्व समाप्त होने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। विहिप राममंदिर निर्माण संपन्न होने के पूर्व किसी अन्य मुद्दे को अपने हाथ में नहीं लेना चाहता। लेकिन इस समय ज्ञानवापी, ताजमहल और क़ुतुबमीनार पर उठे ताजा विवाद के बीच इन मुददों पर भी चर्चा हो सकती है। माना जा रहा है कि बैठक में इन मुद्दों से जुड़ा प्रस्ताव भी पास किया जा सकता है।
हिंदू संगठन विहिप ने अयोध्या में राममंदिर के लिए लंबा आंदोलन चलाया था। माना जाता है कि इस मुद्दे को अंतिम परिणाम तक ले जाने में संगठन ने प्रमुख भूमिका निभाई थी। इसी तर्ज पर अब मथुरा, ज्ञानवापी और ताज से जुड़े मुद्दों पर भी अभियान छेड़ने की बात कही जा रही है। लेकिन भगवा परिवार इन मुद्दों पर कोई अभियान शुरू करने के पक्ष में नहीं है। वह इन मुद्दों का हल भी अयोध्या मामले की तर्ज पर अदालतों के जरिये निकालने के पक्ष में है। इस पर अंतिम फैसला संतों की बैठक में लिया जा सकता है।
धार्मिक प्रदर्शनों पर हो रहे हमलों पर भी चर्चा
पिछले दिनों हनुमान जन्मोत्सव, शोभायात्राओं पर देश के अलग-अलग हिस्सों में हमले हुए हैं। कई जगहों पर इन प्रदर्शनों पर पत्थरबाजी हुई और सांप्रदायिक स्थिति बिगड़ने से कुछ लोगों की जान भी चली गई। विहिप के लिए बड़ी चिंता का विषय है कि इस तरह के मामले गैर-भाजपाई राजनीति दलों की सरकारों में ही नहीं, बल्कि भाजपा की सरकार वाले राज्यों में भी हुई हैं। भविष्य में इन शोभायात्राओं पर इस तरह के हमले न हों और सांप्रदायिक सद्भाव न बिगड़े, इसके लिए भी इस बैठक में चर्चा हो सकती है।