चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भारत का मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) नियुक्त किया गया। मौजूदा मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार का कार्यकाल आज (18 फरवरी) को खत्म हो रहा है। उनकी रिटायरमेंट के बाद ज्ञानेश कुमार सीईसी का पदभार संभालेंगे। खास बात ये है कि वे चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित नए कानून के तहत नियुक्त होने वाले पहले मुख्य निर्वाचन आयुक्त होंगे।
2029 तक सीईसी रहेंगे ज्ञानेश कुमार
1988 बैच के केरल कैडर के आईएएस अधिकारी ज्ञानेश कुमार मार्च, 2024 से ही चुनाव आयुक्त के रूप में काम कर रहे थे। उन्हें पदोन्नत किया गया है। उनका कार्यकाल 26 जनवरी, 2029 तक होगा। ज्ञानेश कुमार पर इस साल बिहार का विधानसभा चुनाव और अगले साल पश्चिम बंगाल, असम और तमिलनाडु का चुनाव संपन्न कराने की जिम्मेदारी होगी।
पीएम मोदी की अध्यक्षता में बैठक, CEC के अलावा निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति का भी फैसला
नियुक्ति के लिए पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बैठक हुई। बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और कांग्रेस नेता व लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी शामिल हुए। कानून मंत्रालय की तरफ से जारी अधिसूचना के मुताबिक हरियाणा कैडर के 1989 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी विवेक जोशी को निर्वाचन आयुक्त बनाया गया है। 58 साल के जोशी का जन्म 21 मई 1966 को हुआ था। हरियाणा के पूर्व मुख्य सचिव जोशी जनवरी 2019 से केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर थे। अब वे निर्वाचन आयुक्त के रूप में 2031 तक सेवाएं देंगे।
ज्ञानेश कुमार के पास लंबा प्रशासनिक अनुभव
वर्तमान कानून के अनुसार, मुख्य निर्वाचन आयुक्त या निर्वाचन आयुक्त 65 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होते हैं। या बतौर आयुक्त छह वर्ष के लिए आयोग में सेवाएं दे सकते हैं। CEC नियुक्त किए गए ज्ञानेश कुमार के पास 37 साल से अधिक का प्रशासनिक अनुभव है। वे केरल सरकार में एर्णाकुलम के सहायक जिलाधिकारी, अडूर के उपजिलाधिकारी, एससी/एसटी के लिए केरल राज्य विकास निगम के प्रबंध निदेशक, कोचीन निगम के नगर आयुक्त के अलावा अन्य पदों पर भी सेवाएं दे चुके हैं। केरल सरकार के सचिव के रूप में उन्होंने वित्त संसाधन, फास्ट-ट्रैक परियोजनाओं और लोक निर्माण विभाग जैसे विविध विभागों को संभाला।
कैसे होता है नए मुख्य चुनाव आयुक्त का चयन?
अब तक सबसे वरिष्ठ चुनाव आयुक्त को ही मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में पदोन्नत किया जाता था। हालांकि, पिछले साल मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्त की नियुक्तियों पर एक नया कानून लागू हुआ। इसके तहत एक खोज समिति ने इन पदों पर नियुक्ति के लिए पांच सचिव स्तर के अधिकारियों के नामों को शॉर्ट लिस्ट किया था, ताकि प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली समिति उन पर विचार कर सके। पीएम, लोकसभा में नेता विपक्ष और पीएम की तरफ से नामित एक कैबिनेट मंत्री एक नाम को मंजूरी देते हैं। इसके बाद राष्ट्रपति नए मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति करेंगी।
कांग्रेस ने जताई थी आपत्ति
इसे लेकर आज कांग्रेस की तरफ से प्रेस कॉन्फ्रेंस की गई थी, जिसे कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी और अजय माकन ने संबोधित किया था। इस दौरान कांग्रेस नेताओं ने कहा था कि मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति को लेकर बैठक हुई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि 19 फरवरी को इस विषय में सुनवाई होगी और फैसला सुनाया जाएगा कि कमेटी का संविधान किस तरीके का होना चाहिए। ऐसे में आज की बैठक को स्थगित करना चाहिए था। कांग्रेस नेता अभिषेक सिंघवी ने कहा था कि चयन समिति से भारत के मुख्य न्यायाधीश को हटाकर सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह चुनाव आयोग पर नियंत्रण चाहती है, न कि उसकी विश्वसनीयता को बनाए रखना चाहती है।