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सावधान: आंतों में गड़बड़ी से शुरू हो सकती हैं ऑटोइम्यून बीमारियां, थकान और जोड़ों का दर्द शुरुआती संकेत

Thu, 23 Apr 2026 05:22 AM IST
Nirmal Kant अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली।

सार

लगातार थकान, पेट फूलना और जोड़ों में हल्का दर्द अक्सर सामान्य कारण मानकर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं, लेकिन ये शरीर में अंदरूनी असंतुलन के संकेत हो सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार कई ऑटोइम्यून बीमारियों की शुरुआत आंतों के माइक्रोबायोम में गड़बड़ी से जुड़ी होती है, जिससे प्रतिरक्षा तंत्र भ्रमित होकर शरीर पर ही प्रतिक्रिया करने लगता है। पढ़िए रिपोर्ट-
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार
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अक्सर लगातार थकान को तनाव, पेट फूलने को जल्दबाजी में खाए भोजन और जोड़ों की अकड़न को उम्र या लंबे कामकाजी घंटों का असर मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। लेकिन कई बार ये समस्याएं शरीर में गहरे असंतुलन का संकेत होती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, कई ऑटोइम्यून बीमारियों की शुरुआत आंतों यानी गट से हो सकती है, जहां प्रतिरक्षा तंत्र धीरे-धीरे शरीर के खिलाफ काम करना शुरू कर देता है।
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नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ (एनआईएच) के अनुसार आंतें केवल भोजन पचाने का काम नहीं करतीं, बल्कि ये शरीर के सबसे बड़े प्रतिरक्षा केंद्रों में से एक हैं। करीब 70 प्रतिशत प्रतिरक्षा गतिविधि आंतों की परत के आसपास होती है। यही वह स्थान है जहां शरीर लगातार यह तय करता है कि कौन-सी चीज सुरक्षित है और कौन-सी हानिकारक। आंतों में बैक्टीरिया, वायरस व फंगस का एक विशाल तंत्र होता है, जिसे माइक्रोबायोम कहा जाता है। इनमें से कई प्रतिरक्षा तंत्र को प्रशिक्षित करने, सूजन को नियंत्रित करने व शरीर को नुकसान से बचाने में मदद करते हैं। जब आंतों में यह संतुलन बिगड़ जाता है, तो इसे डिस्बायोसिस कहा जाता है।  

ऐसी स्थिति में प्रतिरक्षा तंत्र भ्रमित हो सकता है। एनआईएच के अनुसार गट माइक्रोब्स में गड़बड़ी का संबंध कई ऑटोइम्यून बीमारियों से लगातार जोड़ा जा रहा है। आंतों की भीतरी परत कमजोर होने पर विषैले तत्व रक्त प्रवाह में पहुंच सकते हैं। प्रतिरक्षा तंत्र इन्हें खतरे के रूप में पहचानता है और सूजन की प्रतिक्रिया शुरू कर देता है। यदि यह प्रक्रिया लंबे समय तक चलती रहे, तो प्रतिरक्षा तंत्र शरीर के ऊतकों पर हमला करना शुरू कर सकता है।
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शुरुआती संकेत अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं लोग
ऑटोइम्यून बीमारियां शुरुआत में तेज लक्षणों के साथ सामने नहीं आतीं। वे धीरे-धीरे संकेत देती हैं। यही वजह है कि लोग इन्हें सामान्य समस्या समझकर टाल देते हैं। लगातार थकान, भोजन के बाद बार-बार पेट फूलना, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, हल्का लेकिन बार-बार होने वाला जोड़ों का दर्द, त्वचा पर रैशेज या अत्यधिक सूखापन और बिना स्पष्ट कारण के शरीर का लगातार असहज महसूस करना ये सभी शुरुआती संकेत हो सकते हैं। हालांकि ये लक्षण अकेले किसी ऑटोइम्यून बीमारी की पुष्टि नहीं करते, पर यह जरूर बताते हैं कि शरीर संतुलन बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रहा है। 

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