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गुरुग्राम: धूमधाम से निकली तीसरी श्री जगन्नाथ रथ यात्रा, बड़ी संख्या में श्रद्धालु हुए शामिल

Thu, 16 Jul 2026 10:14 PM IST
राहुल कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुरुग्राम।

सार

भगवान जगन्नाथ भक्तों को दर्शन देने के लिए मंदिर से निकल कर सड़क पर पहुंचे। गुरुग्राम में साई का आंगन में गुरुवार को तीसरी श्री जगन्नाथ रथ यात्रा-2026 का आयोजन श्रद्धा और उत्साह के साथ किया गया।
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जगन्नाथ रथयात्रा-2026 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हरियाणा के गुरुग्राम स्थित साई का आंगन में गुरुवार को तीसरी श्री जगन्नाथ रथ यात्रा-2026 का आयोजन श्रद्धा और उत्साह के साथ किया गया। यह आयोजन साई प्रकाश स्पिरिचुअल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट ने सी.बी. सतपथी कल्चरल फाउंडेशन के सहयोग से डॉ. चन्द्रभानु सतपथी के मार्गदर्शन में आयोजित किया।

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आयोजन की शुरुआत सुबह 11 बजे पूर्व-पूजन और रथ-प्रतिष्ठा के साथ हुई। इसके बाद दोपहर 3:30 बजे भगवान श्री जगन्नाथ, भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और श्री सुदर्शन की पारंपरिक 'पहंडी बीजे' शोभायात्रा निकाली गई। रथ यात्रा शुरू होने से पहले डॉ. चन्द्रभानु सतपथी ने परंपरा के अनुसार 'छेरा पहरा' अनुष्ठान किया।

कार्यक्रम में केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम भी पहुंचे। उन्होंने भगवान श्री जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के दर्शन कर पूजा-अर्चना की। आयोजन के दौरान भक्तिमय संगीत और ओडिशा की सांस्कृतिक विरासत पर आधारित पारंपरिक प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहीं। श्रद्धालुओं के लिए पुरी से आए पारंपरिक ओड़िया रसोइयों द्वारा तैयार महाप्रसाद का भी वितरण किया गया।
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आयोजकों के अनुसार, डॉ. चन्द्रभानु सतपथी पिछले तीन दशकों से भारत और विदेशों में भगवान श्री जगन्नाथ की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा के संरक्षण और प्रचार-प्रसार से जुड़े हुए हैं। उन्होंने वर्ष 2009 में गुरुग्राम में रथ यात्रा की शुरुआत की थी। इसके बाद अमेरिका के डलास, नैशविल और ह्यूस्टन में भी इस परंपरा को स्थापित करने में भूमिका निभाई।

वर्ष 2024 में साई का आंगन में शुरू हुई यह रथ यात्रा अब गुरुग्राम के प्रमुख वार्षिक आध्यात्मिक आयोजनों में शामिल हो चुकी है। आयोजन से पहले भगवान श्री जगन्नाथ, रथ यात्रा की परंपरा और ओडिशा की सांस्कृतिक विरासत से लोगों को परिचित कराने के लिए विभिन्न जन-जागरूकता अभियान भी चलाए गए। आयोजकों के मुताबिक, इस वर्ष के आयोजन में भारत और विदेशों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और आध्यात्मिक साधकों ने भाग लिया।
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