संसद के वर्तमान बजट सत्र के पहले चरण का आज आखिरी कामकाजी दिन है। इस दौरान वक्फ (संशोधन) विधेयक पर विचार करने वाली संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की रिपोर्ट गुरुवार को लोकसभा और राज्यसभा के पटल पर रखी गई, जिसके बाद इस रिपोर्ट पर विपक्ष ने जबरदस्त हंगामा किया और विरोध दर्ज कराया। मामले में विपक्षी सांसदों ने आरोप लगाया कि वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 पर संसद की संयुक्त समिति की रिपोर्ट में उनके असहमति नोटों के कुछ हिस्सों को जानबूझकर हटा दिया गया है। साथ ही विपक्षी सांसदों ने यह भी चिंता जताई कि इस रिपोर्ट के माध्यम से अन्य धार्मिक समूहों की संपत्तियों को निशाना बनाने का रास्ता खोला जा सकता है।
बता दें कि वक्फ विधेयक को लेकर जेपीसी ने लोकसभा में इसे दोपहर दो बजे के बाद पेश किया गया, जबकि राज्यसभा में दिन की कार्यवाही शुरू होते वक्त ही इस रिपोर्ट को पेश किया गया। समिति के अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने विधेयक से संबंधित रिपोर्ट और साक्ष्यों का रिकॉर्ड सदन के पटल पर रखा।
कांग्रेस सांसद ने रिजिजू पर लगाए आरोप
विधेयक को लेकर कांग्रेस नेता हुसैन ने अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू पर आरोप लगाया कि उन्होंने वक्फ संपत्तियों के मुद्दे पर झूठ बोला। हुसैन ने कहा कि जब इस मुद्दे को उठाया गया, तो मंत्री ने दावा किया कि असहमति नोटों को संशोधित नहीं किया गया है, लेकिन उन्होंने और उनके साथियों ने चेयरमैन से मुलाकात की और अपनी शिकायत दर्ज करवाई। हुसैन ने इसे एक पक्षपाती रिपोर्ट करार दिया।
विधेयक अन्य धार्मिक संस्थाओं के भी खिलाफ- विपक्ष
साथ ही कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने आशंका जताई कि भविष्य में इस तरह की कार्रवाई अन्य धार्मिक संस्थाओं के खिलाफ भी हो सकती है, जैसे कि गुरुद्वारे और मंदिरों की संपत्तियों पर। हुसैन ने कहा कि आज वक्फ है, कल गुरुद्वारे की जमीन होगी, फिर मंदिरों की जमीन होगी। ये लोग जमीन छीनकर अपने दोस्तों को देना चाहते हैं।
कांग्रेस सांसद नासिर हुसैन का आरोप
कांग्रेस के सैयद नासिर हुसैन ने कहा कि रिपोर्ट पूरी तरह से पक्षपाती और एकतरफा है। बैठक में प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि गैर-हितधारकों को अपने विचार प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित किया गया, जबकि 97-98 प्रतिशत हितधारकों ने विधेयक का विरोध किया।
विपक्षी दलों ने विधेयक को बताया फर्जी
साथ ही विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि असहमति नोटों के प्रमुख हिस्सों को रिपोर्ट से हटा दिया गया है, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया का उल्लंघन होता है। इसके साथ ही इस रिपोर्ट को फर्जी करार देते हुए इसे वापस भेजने की मांग की है।
नदीमुल हक ने भी की अलोचना
टीएमसी के सदस्य नदीमुल हक ने भी रिपोर्ट की आलोचना की। उन्होंने कहा कि वक्फ संपत्तियों पर अतिक्रमण रोकने वाला विधेयक वापस ले लिया गया था। उन्होंने कहा कि वह एक तरफ तो वक्फ संपत्तियों को बचाने की बात करते हैं, लेकिन दूसरी तरफ उस विधेयक को वापस ले लिया।" हक ने यह भी आरोप लगाया कि समिति में दिए गए असहमति नोट को हटा दिया गया और उसे सेंसर कर दिया गया।
किरेन रिजजू ने किया आरोपों का खंडन
विपक्षी दलों के आरोपों का केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने खंडन किया। उन्होंने कहा कि समिति ने नियमों के अनुसार कार्य किया है। उन्होंने कहा कि असहमति नोट में, यदि समिति पर कोई आक्षेप लगाया जाता है, जो अध्यक्ष को सही नहीं लगता है, तो अध्यक्ष के पास उन अंशों को हटाने का अधिकार है। यह नियमों में लिखा है।