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गुजरात विधानसभा चुनाव: आसान नहीं होंगी BJP की राहें, इन परेशानियों से पाना होगा पार

Tue, 03 Oct 2017 10:01 AM IST
शशिधर पाठक
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एकजुट होगी बीजेपी - फोटो : Getty
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भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने दिसंबर के पहले हफ्ते में गुजरात विधानसभा चुनाव होने की संभावना जताई है। इस बार के चुनाव में पार्टी की राह कांटो भरी है। विश्व हिन्दू परिषद के अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया नाराज चल रहे हैं। तोगड़िया के नाराजगी की कई वजहें हैं। इसी तरह से पार्टी कुछ अन्य जटिल मुद्दों से भी जूझ रही है। कांग्रेस से अलग होने वाले शंकर सिंह बाघेला के साथ तालमेल बनाना भी पार्टी के लिए आसान नहीं है।
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गुजरात चुनाव में सक्रिय पार्टी के एक पदाधिकारी के अनुसार राज्य में पाटीदार समाज पहले से आंदोलन कर रहा है। इसके अलावा तोगड़िया के तेवर भी काफी सख्त हैं। तोगड़िया ने अपना असर भी दिखाना शुरू कर दिया था। उन्होंने करीब साढ़े तीन दर्जन सीटों की शिनाख्त भी कर ली थी, जहां वह भाजपा को झटका दे सकते थे। जबकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पूरी तरह से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमित शाह के समर्थन में खड़ा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए इस मामले में संघ को हस्तक्षेप करना पड़ा है। इस क्रम में संघ ने तोगड़िया को गुजरात में जमे रहने और भाजपा को मजबूत बनाने की हिदायत दी है।

पढ़ें: गुजरात रण के लिए भाजपा की त्रिमूर्ति तैयार, जल्द ही मोर्चे पर उतरेंगे मोदी, शाह और जेटली

तीन विधानसभा चुनाव के बाद यह पहला चुनाव है, जब भाजपा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के चेहरे पर चुनाव लड़ रही है। राज्य के मुख्यमंत्री विजय रुपानी हैं और प्रधानमंत्री मोदी के मुख्यमंत्री पद छोड़कर जाने के बाद से राज्य का विकास कार्य प्रभावित हुआ है। पार्टी और संगठन के भीतर लोगों को अंदरुनी राजनीति को बढ़ावा देने का अवसर मिला है। पार्टी के भीतर बढ़ रहे असंतोष की स्थिति को देखते हुए ही पार्टी ने आनंदी बेन पटेल से इस्तीफा ले लिया था। 
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इसके अलावा नोटबंदी और जीएसटी तथा केन्द्र और राज्य सरकार से जनता की नाराजगी भी बढ़ी है। कांग्रेस छोड़कर आए शंकर सिंह बाघेला भी परेशानी का सबब है। बाघेला के रोम रोम में राजनीति रची बसी है। प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमति शाह उनकी प्रकृति से वाकिफ है। बाघेला को संतुष्ट रखना आसान नहीं है।

भाजपा की परेशानी ट्विटर ट्रेंड से भी दिखाई दे रही है। जुलाई से अबतक करीब दस लाख लोगों ने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को ट्विटर पर फॉलो किया है। यह राहुल गांधी को सोशल मीडिया पर जोरदार समर्थन है। वहीं विकास गांदो थायो छे (विकास पगला गया है) जैसे वायरल हुए संदेश ने भी भाजपा की परेशानी बढ़ा दी है।

भाजपा पर दोहरी मार

यशवंत सिन्हा
भाजपा जहां एक तरफ विपक्षी पार्टी कांग्रेस के तंज, राजनीतिक वार झेल रही है। कांग्रेस ने विकास को ही मुख्य मुद्दा बनाया है। पार्टी राज्य में टूटी सड़कों, अधूरे वादों, अर्ध निर्मित पुलों आदि को मुद्दा बना रही है। वहीं भाजपा को अंदरुनी लड़ाई का भी सामना करना पड़ रहा है। भाजपा के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा ने प्रधानमंत्री मोदी की आर्थिक नीतियों की तीखी आलोचना की है। पार्टी और केन्द्र सरकार ने भले यशवंत सिन्हा के वार को भोथरा करने के लिए भारी भरकम टीम उतार दी हो, लेकिन पार्टी के भीतर मंहगाई, पेट्रोल डीजल के दाम, जीएसटी तथा नोटबंदी के बाद सुस्त पड़ा बाजार, व्यापार लोगों की परेशानी बढ़ा रहा है।
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फिर भी बाजी मारेंगे शाह

अमित शाह और जॉन अब्राहम - फोटो : ani
पार्टी के नेताओं को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की टीम पर पूरा भरोसा है। अमित शाह ने गुजरात में विधानसभा चुनाव फतह के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। नाक का सवाल बनाकर भाजपा इस चुनाव में बंपर जीत की योजना बना रही है। पार्टी ने सोशल मीडिया से लेकर वोटर लिस्ट के हर पन्ने के हिसाब से जिम्मेदारी तय की है। पार्टी की कोशिश है कि हर मतदाता तक उसका कार्यकर्ता चुनाव से पहले कई बार पहुंचे। उसे पार्टी की रीतियों, नीतियों को समझाए और भरोसा दिलाए। वैसे भी यह चुनाव एक बार फिर गुजरात के स्वाभिमान का है। दबे स्वर में ही सही लेकिन हर गुजराती तक यह संदेश दिया जा रहा है कि पहली बार भाजपा अध्यक्ष और प्रधानमंत्री राज्य का ही है।
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