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गुजरात चुनावः इस नारे के सहारे कांग्रेस ने भाजपा से लिया मोर्चा

Mon, 18 Dec 2017 11:09 AM IST
शशिधर पाठक, नई दिल्ली
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उस समय गुजरात के मुख्यमंत्री थे और तब विधानसभा चुनाव में विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ने की हिम्मत जुटा लेते थे। सांप्रदायिक मुद्दे पर चुनाव का ध्रुवीकरण और 2012 के चुनाव के केंद्र सरकार की आर्थिक नीति तथा कालाधन और भ्रष्टाचार भी मुद्दा था, लेकिन अब भाजपा के यही मुद्दे उसे डराने लगे हैं।
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कांग्रेस आईटी सेल गुजरात के प्रभारी रोहन गुप्ता कहते हैं कि पार्टी के एक तंज ने भाजपा को जमीनी स्थिति का एहसास करा दिया था। यह तंज था विकास पागल हो गया है। रोहन कहते हैं कि हम इस समय एक नारा दे रहे हैं - भ्रष्ट शासन, अहंकारी वर्तन। समय की मांग है सत्ता परिवर्तन, यह नारा भाजपा के लिए मुसीबत बनता जा रहा है।

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भ्रष्टाचार से लेकर विकास के मुद्दे पर सत्ता पक्ष घिरता चला जा रहा है। इसके अलावा 'नवसर्जन आवे छै, कांग्रेस लावे छै' भी गुजरात विधानसभा के चुनाव में जमकर धूम मचा रहा है। डॉ. अनिल जोशियारा कहते हैं कि भाजपा विकास के नाम पर देश की जनता को बेवकूफ बना रही थी। पिछले दो दशक से यही चल रहा था। भाजपा को सबसे ज्यादा पाटीदार सीटें जितवाता था।
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पिछले चुनाव में भाजपा ने 52 पाटीदार बाहुल क्षेत्रों की सीट जीती थी। जबकि कांग्रेस के खाते में महज चार आई थी। अब उन्हीं पाटीदारों की स्थिति यह है कि उन्हें अपने लिए आरक्षण की मांग करनी पड़ रही है। जोशियारा कहते हैं कि कांग्रेस ने इस मुद्दे को भी उठाया है कि आखिर प्रदेश का विकास हुआ है तो पाटीदार समाज को आरक्षण की जरूरत क्यों पड़ रही है?
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बड़ौदा की सीट है पैमाना

पार्टी के एक अन्य सूत्र का कहना है कि पहले विकास का मुद्दा भाजपा का था, केन्द्र सरकार पर हमले भाजपा करती थी, केंद्र सरकार के भ्रष्टाचार और आर्थिक नीतियों को भाजपा घेरती थी और अब आज इसके ठीक उल्टा हो रहा है। सत्ता पक्ष रोजगार, शिक्षा, अर्थव्यवस्था, सामाजिक क्षेत्र, राजनीति समेत किसी भी क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान न दे पाने के कारण खुद घिरा हुआ है।

कांग्रेस पार्टी के रणनीतिकार राज्य में बड़ौदा को राजनीति का लिटमस टेस्ट मान रहे हैं। बड़ौदा में कुल पांच विधानसभा सीटें हैं। पांचों पर भाजपा का कब्जा है। यहां मराठी, सिंधी समेत कई समाज के लोग हैं। बड़ौदा का चरित्र कॉस्मोपॉलिटन सिटी जैसा है।

यहां भाजपा के पक्ष में माहौल रहा है। ऐसे में पार्टी के रणनीतिकार मान रहे हैं कि यदि पांच में एक भी सीट कांग्रेस जीत गई तो गुजरात में सरकार बननी तय है। हरेश मलानी भी कहते हैं कि बड़ौदा में भाजपा के अनुकूल चुनावी गणित रहता है।

इसलिए पिछले कुछ चुनावों से वह सभी सीटों पर विजय दर्ज करा लेती है, लेकिन इस बार दो सीटों पर मुकाबला कड़ा है। कांग्रेस के पक्ष में हवा भी है। मलानी कहते हैं कि ऐसे में यदि खाता खुल गया तो  समझिए पूरे गुजरात में कांग्रेस भाजपा पर हावी है।
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