'डॉग टैक्स' वसूलने के कदम से खराब प्रतिक्रिया मिलने के बाद वडोदरा नगर निगम (वीएमसी) ने अगले वित्त वर्ष के लिए राशि को कम करने और पालतू जानवरों के मालिकों के लिए अनुपालन बढ़ाने की प्रक्रिया को आसान बनाने का फैसला किया है। हालांकि, कुछ पालतू कुत्तों के मालिकों का मानना है कि नगर निकाय को इस तरह का टैक्स इकट्ठा नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह जानवरों के लाभ के लिए कुछ नहीं करता है।
वीएमसी में विपक्ष के नेता अमी रावट ने कहा कि नगर निकाय डॉग टैक्स के रूप में एक करोड़ रुपये एकत्र करने का इरादा रखता है। उसे कुत्ते के मालिकों को मुफ्त पशु चिकित्सा सेवा प्रदान करनी चाहिए और पालतू जानवरों की बेहतरी के लिए नीति तैयार करनी चाहिए। अधिकारियों ने बताया कि वीएमसी ने पालतू जानवरों के लिए टैक्स की राशि को घटाने का फैसला किया है। अब तीन साल के लिए 1,000 रुपये की राशि का फैसला किया गया है। पहले राशि 500 रुपये प्रति वर्ष थी। अब ऑनलाइन पंजीकरण का प्रावधान किया गया है।
वीएमसी के स्थायी समिति के अध्यक्ष हितेंद्र पटेल ने बताया कि इस तरह एकत्र की गई राशि का उपयोग मुख्य रूप से आवारा कुत्तों की नसबंदी के लिए किया जाएगा। उन्होंने बताया कि शहर में अनुमानित 8000-9000 पालतू कुत्ते हैं। 19 वार्डों में प्रत्येक में 300 से 350 हैं, लेकिन केवल कुछ ही मालिक 'डॉग टैक्स' का भुगतान करने के लिए आगे आए हैं, जिसका संग्रह नगण्य है।
उन्होंने कहा, हमने तीन साल के लिए टैक्स की राशि घटाकर 1,000 रुपये कर दी है। हमने कुत्तों के मालिकों के लिए ऑनलाइन पंजीकरण का भी प्रावधान किया है। हमने कुत्तों के प्रेमियों पर बोझ कम कर दिया है। उन्हें प्रभावित करने वाले मुद्दों पर हमसे संपर्क करना चाहिए, ताकि हम उन्हें हल कर सकें। पटेल ने कहा कि मुद्दा केवल कुत्ते के प्रेमियों से टैक्स वसूलने का नहीं है, बल्कि उन्हें आगे आने और अपने पालतू जानवरों को पंजीकृत करने के लिए प्रोत्साहित करके उनके साथ संवाद स्थापित करने का भी है।
उन्होंने कहा, हमने गलियों के कुत्तों की नसबंदी की और हर साल 40-50 लाख रुपये खर्च किए। हम 'डॉग टैक्स' से एकत्र आय का इस्तेमाल अच्छे कार्यों के लिए करेंगे और मालिकों के साथ बातचीत के माध्यम से आगे बढ़ेंगे। टैक्स के रूप में एकत्रित धन का इस्तेमाल ऐसे जानवरों की देखभाल, गली के कुत्तों के द्वारा लोगों को काटने के मामलों को कम करने में किया जाएगा। उन्होंने आगे कहा, अतीत में हमारे प्रयासों के बावजूद लोग इसके लिए आगे नहीं आए हैं। हम चाहते हैं कि अधिक से अधिक लोग आगे आएं। उन्होंने कहा, इस तरह गलियों के कुत्तों के साथ इस तरह से व्यवहार किया जाना चाहिए कि कुत्ते के काटने के मामलों की संख्या कम हो जाए।
वडोदरा निवासी और पालतू जानवरों की मालिक देवांगी दलवी ने इसे शहर के कुत्ता प्रेमियों के लिए नकारात्मक घटना करार दिया है। उन्होंने कहा, प्रशासन पालतू कुत्तों के लिए कुछ नहीं करता है। यह सड़क के कुत्तों के लिए कदम उठाता है, लेकिन यह भी पर्याप्त नहीं है। गली के कुत्तों के खिलाफ हिंसा की घटनाएं हुई हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
उन्होंने कहा, मेरा मानना है कि सरकार को कुत्ते के मालिकों से टैक्स एकत्र नहीं करना चाहिए, क्योंकि वह ऐसे कुत्तों के लाभ के लिए कुछ भी नहीं करता है। अगर आप ऐसे कुत्तों के लिए कुछ करते हैं तो आप टैक्स वसूल सकते हैं। कल वे कबूतरों को खिलाने पर टैक्स की मांग कर सकते हैं। मुझे नहीं लगता कि यह सही है। उन्होंने कहा कि वीएमसी की योजना डॉग टैक्स के रूप में एक करोड़ रुपये एकत्र करने की है और इसका मतलब 20,000 कुत्तों का पंजीकरण होगा।
उन्होंने कहा, मैंने मांग की है कि इस पंजीकरण के विपरीत आपको उन्हें कुछ सेवाएं देनी चाहिए। नागरिक निकाय को पालतू कुत्ते के मालिकों को शहर के एक नागरिक अस्पताल में पशु चिकित्सा सेवा की सुविधा देनी चाहिए। उनके पास कुत्ते पालने की नीति होनी चाहिए। पालतू कुत्तों द्वारा लोगों को काटने के कुछ मामले सामने आए और पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की, न ही हमारे पास इस पर कोई नीति थी।