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Gujarat: एलोवेरा पाउडर बताकर विदेश भेजी जा रही थी बेहोश करने वाली दवा, गुजरात एटीएस ने तीन तस्कर दबोचे

Sat, 07 Mar 2026 07:12 PM IST
Nirmal Kant न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद।

सार

Gujarat: गुजरात एटीएस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है, जो एटोमिडेट दवा को एलोवेरा पाउडर और निजी देखभाल सामग्री बताकर विदेश भेज रहे थे। जांच में सामने आया कि आरोपियों के मलयेशिया और थाईलैंड के ड्रग कार्टेल से भी संपर्क थे और वे नकली बिल व फर्जी दस्तावेजों के सहारे दवा एयर कार्गो से भेजते थे। पढ़ें रिपोर्ट-
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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विस्तार
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गुजरात के आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। इन पर दर्द निवारक दवा एटोमिडेट को विदेश भेजने का आरोप है। इसे एलोवेरा पाउडर और निजी देखभाल सामग्री बताकर भेजा जा रहा था। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी।
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एटीएस ने क्या कहा?
एटीएस ने बताया, गिरफ्तार आरोपियों के नाम निकुंज गढ़िया (28), चेतन वावडिया (28) और भौतिक पदमनी (32) हैं। तीनों सूरत के रहने वाले हैं। उनका कथित रूप से संपर्क मलयेशिया और थाईलैंड के ड्रग कार्टेल के लोगों से भी था। यह कार्रवाई एक खुफिया सूचना के बाद की गई। सूचना मिली थी कि कुछ लोग यह दवा दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों में भेज रहे हैं। इन देशों में इस पदार्थ को मादक या दिमा पर असर डालने वाली दवा माना जाता है।

इन कंपनियों के जरिये विदेश भेजते थे नशीली दवा
अधिकारियों ने बताया कि निकुंज गढ़िया अपनी कंपनियों डीडब्ल्यूएन बायोसाइंस, न्यूट्रल फार्मा और ओम हर्ब्स के जरिये यह काम करता था। भौतिक पदमनी अपनी कंपनी जानी फार्मा का इस्तेमाल करता था। वहीं, चेतन वावडिया रुद्र एंटरप्राइज के जरिये दवा विदेश भेजता था।
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तीनों आरोपी मुंबई हवाई अड्डे से एयर कार्गो के जरिये दवा भेजते थे। इसके लिए नकली बिल बनाए जाते थे। उत्पाद पर गलत लेबल लगाया जाता था। सीमा शुल्क की मंजूरी के लिए फर्जी दस्तावेज भी जमा किए जाते थे। एटीएस ने बताया कि कई देशों में एटोमिडेट पाउडर (बेहोश कर देने वाली दवा) को नियंत्रित या प्रतिबंधित पदार्थ माना जाता है।
 
एटीएस के मुताबिक, थाईलैंड में इसे मनोदैहिक पदार्थ अधिनियम के तहत अनुसूची-दो का पदार्थ माना जाता है। मलयेशिया में यह विष अधिनियम के तहत समूह-बी की दवाओं की सूची में है। जबकि, सिंगापुर में इसे नशीली दवाओं के दुरुपयोग अधिनियम के तहत श्रेणी-सी की दवा माना जाता है।

एटोमिडेट पाउडर का बढ़ रहा दुरुपयोग
मेडिकल जर्नल लांसेट की वेबसाइट के मुताबिक, एटोमिडेट एक कम समय तक असर करने वाली एनेस्थेटिक दवा है। हाल के समय में इसका दुरुपयोग बढ़ रहा है। इसके तेज असर के कारण कई युवा इसे नशे के रूप में इस्तेमाल करते हैं। कई बार इसे ई-लिक्विड में मिलाकर वेपिंग (इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट या वेप उपकरण से भाप के रूप में किसी तरल पदार्थ को अंदर लेना) के जरिये भी लिया जाता है।

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एलोवेरा पाउडर बताकर विदेश भेजते थे नशीली दवा
अधिकारियों ने बताया कि आरोपी एटोमिडेट को एलोवेरा पाउडर बताकर एयर कार्गो से विदेश भेजने की कोशिश कर रहे थे। सूचना मिलने के बाद एटीएस ने सीमा शुल्क अधिकारियों को इसकी जानकारी दी। मुंबई में इन पार्सलों को रोकने के लिए कहा गया। इसके बाद पार्सलों की जांच 'रमन स्पेक्ट्रोग्राफी' तकनीक से की गई। जांच में पुष्टि हुई कि उनमें एटोमिडेट मौजूद है। शुरुआती पूछताछ में आरोपियों ने माना कि उनका संपर्क मलयेशिया के ड्रग कार्टेल सदस्य चुआ झी जुआन और अन्य समूहों से था।
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एटीएस के अनुसार निकुंज गढ़िया ने एलोवेरा पाउडर के नाम पर करीब 50 किलो एटोमिडेट विदेश भेजा। चेतन वावडिया ने 'जिनोपोल-24 पाउडर' नाम से पर्सनल केयर सामग्री बताकर लगभग 50 किलो दवा मलयेशिया और थाईलैंड भेजी। भौतिक पदमनी पर भी एलोवेरा पाउडर बताकर 25 किलो एटोमिडेट विदेश भेजने का आरोप है। एटीएस के मुताबिक विदेशी बाजारों में इस दवा की कीमत लगभग 4,000 से 5,000 डॉलर प्रति किलो होती है। एजेंसी ने बताया कि थाईलैंड भेजा गया एटोमिडेट पाउडर वहां की पुलिस ने जब्त कर लिया है।



 
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