ताजा मामला गुजरात से है, जहां भाजपा के आदिवासी नेता हर्षद वसावा एक बार फिर से भाजपा में शामिल हो गए हैं। 2022 में जहां एक तरफ विधानसभा चुनाव में टिकट न मिलने से खफा होकर हर्षद ने पार्टी के खिलाफ बगावत की थी वहीं अब उन्होंने घर वापसी कर ली है।
आगामी लोकसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक दलों में नेताओं का एंट्री-एग्जिट होना आम बात है। बगावत के ढोल पीटने वाले अच्छे-अच्छे नेता भी वापस लौटकर पार्टी में शामिल हो रहे हैं तो कहीं पार्टियों को बेवफाई भी देखने को मिल रही है। ताजा मामला गुजरात से है, जहां भाजपा के आदिवासी नेता हर्षद वसावा एक बार फिर से भाजपा में शामिल हो गए हैं। 2022 में जहां एक तरफ विधानसभा चुनाव में टिकट न मिलने से खफा होकर हर्षद ने पार्टी के खिलाफ बगावत की थी वहीं अब उन्होंने घर वापसी कर ली है।
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बता दें कि हर्षद वसावा ने भाजपा के दर्शन वसावा के खिलाफ नर्मदा जिले की नंदोद सीट से एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था, लेकिन असफल रहे। इसके बाद वह गांधीनगर में पार्टी मुख्यालय में राज्य इकाई अध्यक्ष सीआर पाटिल की उपस्थिति में समर्थकों के साथ भाजपा में शामिल हुए।
पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते हुए थे बाहर
एक जाने-माने आदिवासी चेहरे, हर्षद वसावा ने 2002 और 2007 में भाजपा विधायक के रूप में राजपीपला विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व किया था। हालांकि, 2022 के चुनावों से पहले उन्हें चुनावी टिकट देने से इनकार कर दिया गया और फिर भाजपा के खिलाफ उन्होंने बगावत कर दी, जिसके बाद उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते बाहर भी कर दिया गया था।
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हर्षद वसावा ने पत्रकारों से कहा, 'जिन मुद्दों ने मुझे भाजपा से इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया, उनका समाधान हो गया है। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि भाजपा के उम्मीदवार गुजरात की सभी 26 लोकसभा सीटों पर भारी मतों से जीत हासिल करें।'