नोटबंदी के कारण दान में कमी आने के कारण गुजरात के कुछ प्रसिद्ध मंदिरों ने कैशलेस दान स्वीकार करने की सुविधा के साथ ई-वालेट, एटीएम और स्वाइप मशीनों की व्यवस्था शुरू की है। द्वारका मंदिर व्यवस्थापन समिति के उपाध्यक्ष धनराज नाथवानी ने बताया कि नोटबंदी के प्रभाव के कारण उन्होंने श्रद्धालुओं को दान देने में मदद के लिए यह कदम उठाया है।
उन्होंने कहा कि लाखों लोग आते हैं और भगवान द्वारकाधीश से आशीर्वाद लेते हैं। लोगों में कैशलेस लेन-देन को लोकप्रिय बनाने के लिए गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपानी ने मंगलवार को बनासकांठा जिले में प्रसिद्ध अंबाजी मंदिर में स्वाइन मशीन में क्रेडिट या डेबिट कार्ड का इस्तेमाल कर इसके जरिए डिजिटल दान देने की व्यवस्था शुरू की है। उन्होंने अपनी पत्नी के डेबिट कार्ड के जरिए 31,000 रुपये का दान दिया।
अंबाजी मंदिर ट्रस्ट के सूत्रों ने बताया कि नोटबंदी के बाद दान में कम से कम 30 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। नई कैशलेस व्यवस्था से एक बार फिर दान बढ़ने की संभावना है। सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट के सचिव प्रवीणभाई लाहेरी ने बताया कि अब वे एक डिजिटल वॉलेट कंपनी के साथ बात कर रहे हैं जिससे धन और दान डिजिटल रूप में प्राप्त किया जा सके। गिर सोमनाथ जिले में स्थित मंदिर में ट्रस्ट ने ‘प्रसाद’ के लिए ई-भुगतान के जरिए दान लेना शुरू कर दिया है।