गुजरात में चुनावी सरगर्मियां जोरों पर हैं। भले ही अभी चुनाव की तिथि घोषित नहीं हुई है, मगर राजनीतिक दलों के बीच तीखी बयानबाजी को लेकर घमासान मचा है। 'कंस', 'नीच' और 'मौत का सौदागर' जैसे शब्द बाहर निकल चुके हैं। भाजपा को उम्मीद है कि वह 27 साल के नियमित शासन के बाद भी सत्ता में रहेगी। दूसरी ओर कांग्रेस पार्टी का दावा है कि इस बार भाजपा को मौका नहीं मिलेगा। अरविंद केजरीवाल कह रहे हैं कि भाजपा जा रही है और 'आप' आ रही है। लेकिन क्या मोदी को गालियां देकर गुजरात जीतना संभव है, आप व भाजपा में कौन नहीं समझ पा रहा 'एवरी डे इज नॉट संडे' वाली कहावत। हैदराबाद के प्रतिष्ठित मौलाना आजाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय के पूर्व कुलाधिपति, प्रसिद्ध शिक्षाविद और स्वतंत्र भारत के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद के वंशज, फिरोज बख्त अहमद ने कहा, भीड़ तो 'मदारी की डुगडुगी' भी जोड़ देती है। चुनाव के दौरान 'गुजरात' के मतदाताओं को समझना इतना आसान भी नहीं है।
फिरोज बख्त अहमद के मुताबिक, गुजरात में जहां भाजपा अपनी विजयश्री के 'पर' तोल रही है, वहीं आम आदमी पार्टी इस बार भाजपा के गढ़ में सेंध मारने के पूरे-पूरे चक्कर में है। जहां, अरविंद केजरीवाल स्वयं को योगी राज श्री कृष्णजी के रूप में दर्शा रहे हैं, वहीं भाजपा को वह 'कंस' का रूप देने को तत्पर हैं। साथ ही साथ, जिस प्रकार से कुंठित शब्द, 'नीच' का प्रयोग और उसके अतिरिक्त 'मांओं' का अपमान किया जा रहा है, उससे गुजराती एवं विशेष रूप से जनता में रोष है। इसके लिए आप नेता गोपाल इटालिया को भारत माफ नहीं करेगा। पीएम मोदी को 'मौत का सौदागर' कहा गया। ऐसा प्रतीत होता है कि कुछ यही गणित जोड़ कर इटालिया को, जिन्हें कई नौकरियों से निष्कासित किया जा चुका है, 'आप' का गुजरात अध्यक्ष बनाया गया है।
गुजरात में जिस प्रकार से केजरीवाल की रैलियों में खासी भीड़ जुट रही है, यह मोदी और अमित शाह के लिए चिंता का विषय है। पिछले 27 वर्ष की एंटी इंकम्बेंसी के साथ-साथ भाजपा के लिए एक अन्य चिंता का विषय यह भी है कि केजरीवाल का राजनीतिक मामला कुछ अलग है। केजरीवाल मोदी की भांति ही सभी को अचंभे में डालने की क्षमता रखते हैं। जैसा कि 'आप' ने दिल्ली व पंजाब में चौंका दिया था। यहां तस्वीर का दूसरा रुख यह है कि भीड़ तो मदारी की डुगडुगी पर भी एकत्रित हो जाती है। गुजरात में 'आप' नेता गोपाल इटालिया ने प्रधानमंत्री की माता पर भद्दी टिप्पणी कर अपनी ओर चलती हवा को मुखालिफ सिमम्त में चला दिया है। भ्रष्टाचार के आरोप में पहले ही सत्येंद्र जैन जेल में हैं। मनीष सिसोदिया की जांच चल रही है।
आप के लिए पंजाब में भी हालात बहुत अच्छे नहीं हैं, क्योंकि एक मंत्री रिश्वत देने की कोशिश में धर लिए गए। इससे पूर्व भी दिल्ली के कानून मंत्री और जामा मस्जिद इलाके से चुने गए एक विधायक व मंत्री ने 'आप' को बदनाम किया। आप के विधायक, कई वर्ष पूर्व सैक्स स्कैंडल में पकड़े गए थे। राजनीति में शुद्धि और शुचिता व ईमानदारी का जो आईना लेकर अरविंद केजरीवाल लेकर आए थे, वह आज चकनाचूर हो चुका है। केजरीवाल की पार्टी जो साफ-सुथरा होने का दावा किया करती थी, आज उसका दामन दागदार हो चुका है। 'आप' के आने से ऐसा प्रतीत होता था कि बेईमानी और लुटपाट की सियासत से भोली-भाली जनता को निजात मिलेगी, मगर जो एक के बाद एक घोटाले 'आप' के खाते में जमा होते चले गए, उससे जनता की आस्था टूट चुकी है।
फिरोज बख्त अहमद का कहना है कि अब किसी भी आंदोलन पर जनता विश्वास नहीं करेगी। ऐसा आंदोलन जो राजनीति की गंदगी को साफ कर सके। जन लोकपाल कानून ला कर इन पार्टियों को ईमानदारी और सच्चाई के लिए एक प्रेशर ग्रुप का काम कर सके। अब कोई कितना भी अच्छा व्यक्ति किसी जन आंदोलन के लिए अपील करे, लेकिन कोई भी उस पर विश्वास नहीं करेगा। वजह, केजरीवाल की शातिराना वोट बैंक की जालसाजी और उनकी पार्टी की चालबाजी, अब लोगों के सामने आ रही है। अमेरिकी अखबारों में दिल्ली के स्कूलों की प्रशंसा की खबर से जनता बेखबर नहीं है।
सिसोदिया, जिन्होंने दिल्ली में शराब की नदियां बहा दी हैं, वे मदिराशाला की आड़ में पाठशाला का गुणगान करते हैं। अहमद के मुताबिक, उन्होंने मुझसे वादा किया था कि आपातकाल के दौरान कांग्रेस द्वारा 30 जून 1976 को ध्वस्त किए गए 'कौमी सीनियर सेकेंडरी स्कूल', बाड़ा हिंदू राव, पुरानी दिल्ली को वह एक मिसाली उर्दू माध्यम स्कूल बनाएंगे। यह वादा उन्होंने 2012 में कुमार विश्वास और संजय सिंह के सामने किया था। वह आज तक पूरा नहीं हुआ। इस स्कूल को 2017 में अहमद ने अपनी एक जनहित याचिका के माध्यम से जमीन दिलाई थी। सवेरे के स्कूलों में शाम की शिफ़्ट और शाम के स्कूलों में सवेरे की शिफ़्ट शुरू कराकर व पुराने स्कूलों के प्रांगण में कुछ कमरे डाल कर सिसोदिया अपनी शिक्षा नीति का गुणगान कर रहे हैं। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्रियों, शीला दीक्षित व साहिब सिंह वर्मा द्वारा बनाए गए स्कूल पर अपना ठप्पा लगा कर कहते हैं कि हमने नए स्कूल बनाए हैं। जब ये कहते हैं कि हमारे सरकारी स्कूल, पब्लिक स्कूलों से बेहतर हैं, इसे गजब की कलाकारी कहा जाता है।
कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता आलोक शर्मा ने कहा था, ऐसा कुछ नहीं है कि गुजरात में 'आप' नेता दिल्ली या पंजाब जैसा कुछ कर पाएं। वजह, इन दोनों राज्यों में जिन हालात में केजरीवाल ने सरकार बनाई, वे अप्रत्याशित थे। अब कांग्रेस-भाजपा दिल्ली में ठोकर खा कर, हिंदी की कहावत, दूध का जला, छाछ को भी फूंक-फूंक कर पीता है, वाली स्थिति में हैं। दिल्ली में 'आप' के जीतने का कारण था कि उस समय के हालात। 'आप' अन्ना हजारे के कंधों पर बंदूक दाग कर सत्ता में आई थी। लेकिन आज उनका नाम-ओ-निशां गायब कर दिया। अब सरदार भगत सिंह के नाम का इस्तेमाल किया जा रहा है। आप को जब-जब अपने किसी भृष्टाचार के आरोप से बचाव की ढाल चाहिए होती है तो उसे गांधी याद आते हैं। बाकी हर तरफ केजरीवाल और मात्र केजरीवाल की ही तस्वीर दिखती है। केजरीवाल ने अन्ना हजारे का इस्तेमाल टिशु पेपर की भांति प्रयोग किया।
योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण, किरण बेदी, कुमार विश्वास, शाजिया इल्मी और प्रो. आनंद कुमार आदि को भी यूज एंड थ्रो की निकृष्ट मानसिकता के अनुसार इस्तेमाल किया। केजरीवाल, दिल्ली में वाईफाई, 500 स्कूल, जन लोकपाल बिल आदि ऐसे अन्य बहुत से झूठे वायदे कर सत्ता पर काबिज हुए थे। दो चुनावों में दिल्ली की जनता ने नवाज दिया, मगर शायद अब तीसरी बार तुक्का फिट न हो, क्योंकि पुरानी अंग्रेजी कहावत है कि 'एवरी डे इज नॉट संडे' अर्थात हर बार धोखा देना नहीं होता मजेदार। गुजरात की जनता, दिल्ली व पंजाब वालों की तरह 'आप' के रिझावे में नहीं आएंगे।
गत सप्ताह दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने बनासकांठा की एक जनसभा में कहा था, गुजरात की जनता बदलाव का मन बना चुकी है। आप संयोजक के खिलाफ नारे लगाने वाले दर्जनभर युवाओं को लेकर उन्होंने कहा था, मैं उन्हें कहना चाहता हूं, बेटा जिसका नारा लगाना है, लगाओ। मुझे इससे कोई दिक्कत नहीं है। एक बात ध्यान रखना, तुम्हें रोजगार तो केजरीवाल ही देगा। तुम्हारे घर की बिजली भी मुफ्त केजरीवाल ही करेगा। तुम्हारे बच्चों के स्कूल का इंतजाम भी केजरीवाल ही करेगा। इन लोगों को यानी 'भाजपा' को सत्ता में 27 साल हो गए, इन्होंने क्या दिया है। आईबी ने गुजरात में 'आप' की सरकार बनने की बात कही है। गुजरात में आम आदमी पार्टी की सरकार बन रही है, जब से आईबी की यह रिपोर्ट आई है, तभी से कांग्रेस और भाजपा, ये दोनों पार्टियां सीक्रेट मीटिंग कर रही हैं।
दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने एक मीडिया बाइट में कहा, गुजरात में हार के डर से भाजपा बौखला गई है। गुजरात में 'आप' ने शिक्षा की बात की है। एक करोड़ बच्चे गुजरात के स्कूलों में पढ़ रहे हैं। वे या तो प्राइवेट स्कूलों के हाथों लुटने पर मजबूर हैं या सरकारी स्कूल में पढ़कर अपना भविष्य बर्बाद करने के लिए मजबूर हैं। सिसोदिया ने कहा, गुजरात में माहौल बदल रहा है। इसी डर से भाजपाई, जांच एजेंसियों की मदद ले रहे हैं। गुजरात में पिछले 27 वर्षों से लोगों के पास भाजपा का कोई विकल्प नहीं था। अब वहां 'आप' के रूप में एक मजबूत विकल्प है।