बीते साल अक्तूबर, 2022 में नवरात्रि के दौरान खेड़ा जिले के उंधेला गांव में गरबा कार्यक्रम में अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों द्वारा कथित रूप से पथराव किया गया था इसके बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें कथित तौर पर पुलिसकर्मी तीन आरोपियों की सरेआम पिटाई कर रहे थे।
गुजरात के खेड़ा जिले में बीते साल पथराव की एक घटना के बाद अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों की सार्वजनिक पिटाई का पुलिस ने बचाव किया है। कोर्ट में खेड़ा एसपी आरएस गढ़िया और अपराध शाखा के इंस्पेक्टर एवी परमार की ओर से दाखिल किए गए अलग-अलग हलफनामे में कहा गया है कि ऐसा शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए किया गया था न कि किसी आपराधिक इरादे से।
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पुलिस अधिकारियों की ओर से यह दलील तब दी गई है, जब अंतरिम रिपोर्ट में जिसमें घटना के संबंध में छह पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की बात की गई है।
क्या है पूरा मामला?
बीते साल अक्तूबर, 2022 में नवरात्रि के दौरान खेड़ा जिले के उंधेला गांव में गरबा कार्यक्रम में अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों द्वारा कथित रूप से पथराव किया गया था। इस पथराव की घटना में ग्रामीणों के साथ पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। घटना के बाद 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें कथित तौर पर पुलिसकर्मी तीन आरोपियों की सरेआम पिटाई कर रहे थे। वीडियो सामने आने के बाद कुछ अभियुक्तों ने उच्च न्यायालय में गुहार लगाई और पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
पुलिस के हलफनामे में क्या?
पुलिस अधीक्षक गढ़िया ने अपने हलफनामे में कहा कि जब आरोपी व्यक्तियों को जांच के लिए उंधेला गांव ले जाया गया, तो उन्होंने पुलिस अधिकारियों के साथ दुर्व्यवहार करने की कोशिश की। एक आरोपी पुलिस अधिकारियों को अपशब्द कहने लगा, वहीं एक अन्य आरोपी शेजादमिया शुकातमिया ने पुलिस निरीक्षक अशोक परमार पर थूक दिया। एसपी ने आगे बताया कि अन्य आरोपी व्यक्तियों ने अपने हाथों में पत्थर ले लिए और वहां कट्ठा हुए हिंदू समुदाय के सदस्यों को उकसाना शुरू कर दिया। आरोपियों ने पुलिस वाहन में बैठने से इनकार कर दिया और हाथापाई शुरू कर दी।