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Gujarat: यूक्रेनी सेना द्वारा पकड़ा गया युवक मोरबी का निवासी, पढ़ाई के लिए रूस गया; गुजरात पुलिस ने की पुष्टि

Wed, 08 Oct 2025 02:59 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोरबी

सार

राजकोट रेंज के आईजी अशोक कुमार यादव ने बताया, 'प्रारंभिक जांच के अनुसार, साहिल मोरबी का निवासी था और कई साल पहले पढ़ाई के लिए रूस गया था। हमें यह भी पता चला है कि उसे वहां नशीली दवाओं से संबंधित एक मामले में पकड़े जाने के बाद जेल भेज दिया गया था।'
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यूक्रेनी सेना के सामने आत्मसमर्पण करने वाला भारतीय युवक - फोटो : एक्स
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विस्तार
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गुजरात पुलिस ने बुधवार को पुष्टि की कि 22 वर्षीय मजोती साहिल मोहम्मद हुसैन, जिसने रूसी सेना की तरफ से लड़ते हुए यूक्रेनी सेना के सामने आत्मसमर्पण किया, वह गुजरात के मोरबी शहर का निवासी था और पढ़ाई के लिए रूस गया था। यूक्रेनी सेना ने जो वीडियो जारी की, उसमें भारतीय युवक ने बताया कि वह गुजरात के मोरबी का निवासी है और पढ़ाई के लिए रूस गया था।
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राजकोट रेंज के आईजी ने की पुष्टि
जब पत्रकारों ने मोरबी शहर के कालिका प्लॉट इलाके में मजोती साहिल मोहम्मद हुसैन के घर पर उसके परिवार के सदस्यों से संपर्क करने की कोशिश की, तो उसकी मां ने कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया और बाद में वह घर पर ताला लगाकर किसी अज्ञात स्थान पर चली गईं। राजकोट रेंज के आईजी अशोक कुमार यादव ने बताया, 'प्रारंभिक जांच के अनुसार, साहिल मोरबी का निवासी था और कई साल पहले पढ़ाई के लिए रूस गया था। हमें यह भी पता चला है कि उसे वहां नशीली दवाओं से संबंधित एक मामले में पकड़े जाने के बाद जेल भेज दिया गया था।' वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि स्थानीय पुलिस मामले की विभिन्न पहलुओं से जांच कर रही है। इस बात की भी जांच की जा रही है कि उसने पासपोर्ट, वीजा कैसे और कब हासिल किया।

यूक्रेनी सेना ने जारी किया भारतीय युवक का वीडियो
यूक्रेनी सेना ने मंगलवार को बताया कि रूसी सेना के लिए लड़ रहे एक भारतीय नागरिक ने आत्मसमर्पण कर दिया है। यूक्रेनी सेना की 63वीं मैकेनाइज्ड ब्रिगेड ने भारतीय युवक का एक वीडियो जारी किया, जिसने युवक ने खुद को गुजरात का मजोती साहिल मोहम्मद हुसैन बताया। यूक्रेनी सेना ने कहा कि 22 वर्षीय भारतीय युवक रूस में एक विश्वविद्यालय में पढ़ाई करने आया था। वीडियो में, हुसैन ने कहा कि उसे नशीली दवाओं से संबंधित आरोपों में रूस में सात साल जेल की सजा सुनाई गई थी। सजा से बचने के लिए उसे रूसी सेना में शामिल होने की पेशकश की गई।
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कमांडर से लड़ाई के बाद यूक्रेनी सेना के सामने आत्मसमर्पण किया
हुसैन ने कहा, 'मैं जेल में नहीं रहना चाहता था, इसलिए मैंने विशेष सैन्य अभियान के लिए एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए। लेकिन मैं वहां से बाहर निकलना चाहता था।' 16 दिनों के प्रशिक्षण के बाद हुसैन को 1 अक्टूबर को अपने पहले मिशन पर भेजा गया, जो तीन दिनों तक चला। अपने कमांडर के साथ लड़ाई के बाद, हुसैन ने यूक्रेनी सैनिकों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। वीडियो में हुसैन ने कहा, 'मैं लगभग दो-तीन किलोमीटर दूर एक यूक्रेनी ठिकाने के पास पहुंचा। मैंने तुरंत अपनी राइफल नीचे रख दी और कहा कि मैं लड़ना नहीं चाहता। मुझे मदद चाहिए। मैं रूस वापस नहीं जाना चाहता।' विदेश मंत्रालय ने पिछले महीने कहा था कि भारत ने रूस से रूसी सेना में कार्यरत 27 भारतीय नागरिकों को रिहा करने और भारत वापस भेजने की अपील की थी। 


 
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