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कार्यकर सुवर्ण महोत्सव: 'जब यूक्रेन युद्ध आगे बढ़ा तो आपने रातों-रात...', PM मोदी ने की BAPS की सराहना

Sat, 07 Dec 2024 07:21 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद।

सार

Karyakar Suvarna Mahotsav: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को अहमदाबाद में आयोजित 'कार्यकर सुवर्ण महोत्सव' को डिजिटल माध्यम से संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने बीएपीएस के कार्यों की प्रशंसा की। 
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। - फोटो : वीडियो ग्रैब/एक्स/एएनआई
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को अहमदाबाद में आयोजित 'कार्यकर सुवर्ण महोत्सव' को डिजिटल माध्यम से संबोधित किया। इस कार्यक्रम को बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (बीएपीएस) की ओर से आयोजित किया गया है। कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल भी मौजूद हैं।  

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'दुनिया में हो रही भगवान स्वामी नारायण मंदिर की चर्चा'
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा, 'आज भगवान स्वामी नारायण की 103वीं जयंती है, मैं उन्हें नमन करता हूं।' उन्होंने आगे कहा, 'कुछ महीने पहले अबू धामी में भगवान स्वामी नारायण का मंदिर स्थापित किया गया था। मुझे उस कार्यक्रम में शामिल होने का अवसर मिला। वह कार्यक्रम और वह मंदिर पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन गए। दुनिया ने भारत की आध्यात्मिक विरासत को देखा और भारत की सांस्कृतिक विविधता को महसूस किया। इस तरह के प्रयास भारत की सांस्कृति महिमा और मानवता की महानता को दुनिया के सामने लाते हैं। मैं इसके लिए सभी को धन्यवाद देता हूं।'  

उन्होंने आगे कहा, 'इन दिनों 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान पूरी दुनिया में चर्चा में है। इस दिशा में आपके प्रयास बहुत महत्वपूर्ण हैं। आप ऐसे कई और काम कर सकते हैं, जो भारत के विकास को तेज कर सकते हैं, जैसे युवा विचारों को नया अवसर देने के लिए फिट इंडिया अभियान। जनवरी में 'विकसित भारत के लिए युवा नेताओं का संवाद' कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसमें हमारे युवा अपने विचार देंगे, ताकि विकसित भारत के संकल्प को पूरा किया जा सके।'  
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'बीएपीएस ने रातों-रात कार्यकर्ताओं को किया एकजुट'
प्रधानमंत्री ने आगे कहा, 'जब यूक्रेन में युद्ध बढ़ने लगा तो भारत सरकार ने वहां फंसे भारतीयों को तुरंत निकालने का फैसला लिया। इसके बाद बड़ी संख्या में भारतीय पोलैंड पहुंचने लगे। उस युद्ध के माहौल में भारतीयों को कैसे ज्यादा से ज्यादा मदद दी जाए, यह एक चुनौती थी। तब मैंने बीपीएएस के एक संत से संपर्क किया। मुझे याद है, यह रात के 12 या एक बजे का समय था। मैंने उनसे अनुरोध किया कि मुझे पोलैंड पहुंचे भारतीयों की मदद करने के लिए आपके सहयोग की जरूरत है।'

उन्होंने कहा, 'मैंने देखा कि कैसे बीएपीएस ने रातों-रात पूरे यूरोप से अपने कार्यकर्ताओं को एकजुट किया। बीएपीएस की यह ताकत और मानव हित में उसका योगदान बहुत सराहनीय है। इसलिए आज कार्यकर सुवर्ण महोत्व के इस अवसर पर मैं आप सभी का आभार व्यक्त करता हूं।' 
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