सार
गुजरात के बनासकांठा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंच पर अपनी जैकेट उतारकर स्थानीय महिलाओं की बनाई पारंपरिक कच्छी कोटी पहनी। उन्होंने कहा कि वह आखिरी सांस तक देश की सेवा करेंगे। दौरे में 325 करोड़ रुपये के पशु प्रजनन एवं अनुसंधान केंद्र का उद्घाटन भी हुआ। आखिर महिलाओं की बनाई कोटी पहनकर प्रधानमंत्री ने क्या संदेश दिया? इस केंद्र से किसानों और पशुपालकों को कैसे फायदा मिलने की उम्मीद है?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को गुजरात के दो दिवसीय दौरे पर बनासकांठा पहुंचे। यहां भिलड़ी में आयोजित एक विशाल जनसभा के दौरान उन्होंने कुछ ऐसा किया, जिसने वहां मौजूद लोगों का ध्यान खींचा। प्रधानमंत्री ने मंच पर ही अपनी जैकेट उतारी और स्थानीय महिलाओं की ओर से उनके लिए तैयार की गई पारंपरिक कच्छी कढ़ाई वाली कोटी पहन ली। इस दौरान उन्होंने महिलाओं के हुनर और उनके काम को सम्मान दिया। सभा में प्रधानमंत्री ने कहा कि वह अपनी आखिरी सांस तक भारत के लोगों की सेवा करते रहेंगे। उनके इस दौरे के बाद स्थानीय किसानों, पशुपालकों और ग्रामीणों ने भी अपनी प्रतिक्रियाएं दीं।
प्रधानमंत्री ने मंच पर अपनी जैकेट उतारकर स्थानीय महिलाओं की कोटी क्यों पहनी?
- बनासकांठा के भिलड़ी में जनसभा को संबोधित करने पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी ने कार्यक्रम के दौरान स्थानीय महिलाओं की ओर से तैयार की गई पारंपरिक कच्छी शैली की कढ़ाई वाली कोटी पहनी। इसके लिए उन्होंने मंच पर अपनी पहनी हुई जैकेट उतारी और महिलाओं के हाथों से सिली कोटी पहन ली। यह कोटी स्थानीय महिलाओं ने उनके लिए तैयार की थी।
- प्रधानमंत्री का यह कदम वहां मौजूद लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया। कार्यक्रम में महिलाओं की भागीदारी और उनके काम को प्रोत्साहन देने की बात भी सामने आई। इसी दौरान प्रधानमंत्री ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि वह अपनी आखिरी सांस तक देश की जनता की सेवा करते रहेंगे।
बनासकांठा दौरे में प्रधानमंत्री ने कौन सी बड़ी परियोजना का उद्घाटन किया?
- प्रधानमंत्री ने अपने गुजरात दौरे के पहले दिन बनासकांठा के भिलड़ी में 325 करोड़ रुपये की लागत से तैयार भारत बोवाइन ब्रीडिंग एंड रिसर्च सेंटर (बीबीबीआरसी) का उद्घाटन किया। यह केंद्र पशुओं की नस्ल सुधार और दूध उत्पादन बढ़ाने से जुड़े कामों के लिए महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम के बाद स्थानीय किसानों और पशुपालकों ने इस सुविधा को अपने लिए बड़ी सौगात बताया।
- उनका कहना था कि पशुओं की नस्ल में सुधार होने से कम पशु रखकर भी पहले से अधिक दूध का उत्पादन किया जा सकेगा। इससे पशुपालकों को अपनी आमदनी बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है। स्थानीय लोगों ने कहा कि वे प्रधानमंत्री से किसानों और पशुपालकों के लिए कुछ विशेष सुविधा मिलने की उम्मीद लेकर आए थे और इस परियोजना से उनकी उम्मीद पूरी हुई है।
महिलाओं और किसानों के लिए प्रधानमंत्री के दौरे को स्थानीय लोगों ने कैसे देखा?
सभा के बाद स्थानीय लोगों ने प्रधानमंत्री के कार्यक्रम को लेकर खुशी जताई। एक ग्रामीण ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि प्रधानमंत्री किसानों और पशुपालकों के लिए कुछ बड़ी सौगात देंगे। उन्होंने कहा कि नई सुविधा से पशुओं की संख्या कम रखकर भी अधिक दूध उत्पादन संभव हो सकेगा। एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि कार्यक्रम में एक महिला भाषण देने के लिए खड़ी हुई तो प्रधानमंत्री ने उसे बोलने के लिए प्रोत्साहित किया। ग्रामीण ने इसके लिए प्रधानमंत्री और बनास डेयरी के चेयरमैन शंकरभाई चौधरी का आभार जताया। एक अन्य ग्रामीण ने कहा कि प्रधानमंत्री के आगमन पर बनासकांठा के लोगों ने उनका स्वागत ऐसे किया, जैसे दीपावली का त्योहार मनाया जाता है। पशुपालक गीताबेन ने भी कहा कि अब उन्हें दूध के अच्छे दाम मिल रहे हैं और दूध में फैट की मात्रा के हिसाब से बेहतर कीमत मिलती है। उनके मुताबिक, इससे उनकी कमाई बढ़ी है और पशुपालन से जुड़े परिवार खुश हैं।
बनासकांठा में पानी और सिंचाई को लेकर ग्रामीणों ने क्या उम्मीद जताई?
स्थानीय लोगों ने अपने इलाके में पानी की सुविधा और सिंचाई के लिए किए गए कामों का भी जिक्र किया। एक ग्रामीण ने कहा कि सुईगाम से लेकर सीमा तक रहने वाले लोगों ने बदलाव देखा है। जिन इलाकों में पहले पीने का पानी तक उपलब्ध नहीं था, वहां अब नहरों के जरिए पानी पहुंच रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि दीपावली के आसपास जीरे की खेती के लिए भी सिंचाई का पानी उपलब्ध हो सकेगा। एक किसान ने कहा कि सरकार दूध उत्पादन बढ़ाने, पशुओं की नस्ल सुधारने और पानी की सुविधा देने की दिशा में काम कर रही है। उनके अनुसार, भिलड़ी और देवदार तालुका में गायों और भैंसों के लिए शुरू की गई नई पहल किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। ग्रामीणों ने कहा कि इन प्रयासों का लाभ पूरे जिले को मिल रहा है।
गांवों में विकास को लेकर लोगों ने क्या बताया?
भिलड़ी रतनपुरा गांव के एक निवासी ने कहा कि प्रधानमंत्री के गांव आने से लोग काफी खुश हैं। उन्होंने बताया कि गांव में अच्छी सड़कें बनी हैं और तालाब तक पानी पहुंचा है। ग्रामीणों के मुताबिक, पहले पानी की कमी के कारण खेत सूखे रहते थे, लेकिन अब हालात में बदलाव आया है। पशुपालक गीताबेन ने भी कहा कि पहले उनके इलाके में पानी की कमी थी, लेकिन अब खेतों में हरियाली दिखाई देती है। उन्होंने पशुपालन में मिल रही मदद और दूध के बेहतर दाम को अपनी आमदनी के लिए फायदेमंद बताया। कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री के बनासकांठा दौरे में स्थानीय महिलाओं की बनाई कोटी पहनने का दृश्य चर्चा में रहा। वहीं, 325 करोड़ रुपये के पशु प्रजनन एवं अनुसंधान केंद्र के उद्घाटन और पानी, सिंचाई तथा पशुपालन से जुड़ी सुविधाओं को लेकर ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि इन पहलों से किसानों और पशुपालकों को आगे भी लाभ मिलेगा।