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कांग्रेस नेता अल्पेश ठाकोर ने की उप मुख्यमंत्री नितिन पटेल से मुलाकात, कयासबाजी तेज

Mon, 27 May 2019 05:38 PM IST
संदीप भट्ट न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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अल्पेश ठाकोर (फाइल फोटो) - फोटो : सोशल मीडिया
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लोकसभा चुनाव में भाजपा को मिली प्रचंड जीत के बाद देश के अन्य प्रमुख राजनीतिक दलों में अब उथल-पुथल का दौर चल पड़ा है। सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है कि गुजरात में प्रमुख ओबीसी नेता के तौर पर उभरकर सामने आए अल्पेश ठाकोर भाजपा का दामन थाम सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अल्पेश ठाकोर ने गुजरात के उप मुख्यमंत्री नितिन पटेल से मुलाकात की है।

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नितिन पटेल से उनकी इस मुलाकात से कयास लगाए जा रहे हैं कि ठाकोर जल्द ही भाजपा में शामिल हो सकते हैं। ऐसा माना जा रहा है कि अल्पेश ठाकोर भाजपा में शामिल होते हैं तो गुजरात में यह भाजपा का बड़ा दांव साबित होगा। हालांकि लोकसभा चुनाव के दौरान भी अल्पेश के भाजपा के साथ जुड़ने की अटकलें तेज हो गई थीं। 

कौन हैं अल्पेश ठाकुर 

गुजरात में एक प्रमुख ओबीसी नेता के रूप में उभरने के बाद वह 2017 विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में शामिल हुए और पाटन जिले में राधानपुर सीट से चुनाव जीते थे। करीब छह महीने पहले परप्रांतीय लोगों पर बड़ी संख्या में हुए हमलों की वजह से गुजरात अचानक से राष्ट्रीय स्तर की सुर्खियों में शामिल हो गया था, तब गुजरात में 14 महीने की एक बच्ची के साथ दुष्कर्म के एक मामले में बिहार के एक मजदूर को गिरफ्तार किया गया था।

इसके बाद राज्य के कई इलाकों में बिहार और उत्तर प्रदेश के लोगों के खिलाफ जबर्दस्त हिंसा भड़क गई थी। इसके चलते कई लोगों को गुजरात छोड़ना पड़ा था। हिंदीभाषी पीड़ित उस समय खुद पर हुई ज्यादती के लिए अल्पेश ठाकोर और उनके नेतृत्व वाली ‘गुजरात क्षत्रिय-ठाकोर सेना’को जिम्मेदार ठहराते रहे हैं। 

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इसलिए कांग्रेस से नाराज थे अल्पेश ठाकोर 

सूत्रों की मानें तो गुजरात पाटण ही वह सीट थी जिस पर अल्पेश ठाकोर टिकट चाहते थे। लेकिन पार्टी और अल्पेश ठाकोर के बीच बनते-बिंगड़ते रिश्तों में आखिरी कील का काम तब किया जब कांग्रेस ने पाटण से जगदीश ठाकोर को अपना उम्मीदवार चुना है। जगदीश 2009 के लोकसभा चुनाव में इसी सीट से कांग्रेस को जीत दिला चुके हैं। दूसरी तरफ अल्पेश ठाकोर खुद भी पाटण जिले से ही आते हैं। ठाकोर की मांग को कांग्रेस नेतृत्व ने तवज्जो नहीं दी। पार्टी ने साबरकांठा लोकसभा सीट से संगठन के एक सदस्य को टिकट देने की ठाकोर सेना की मांग को भी नजरअंदाज कर किया। इस सब के चलते ठाकोर ने कांग्रेस से नाता तोड़ दिया।
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