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Gujarat: मोरबी में नौ व्यापारियों से 63 लाख रुपये की जबरन वसूली का आरोप, इंस्पेक्टर-हेड कांस्टेबल पर केस दर्ज

Fri, 13 Dec 2024 04:55 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला

सार

एफआईआर के अनुसार, इंस्पेक्टर वाईके गोहिल और हेड कांस्टेबल महिपतसिंह सोलंकी ने 26 अक्तूबर को टंकारा में एक रिसॉर्ट पर छापा मारा और मोरबी और राजकोट के नौ लोगों को ताश खेलते हुए पाया था। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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गुजरात के मोरबी जिले में अक्तूबर जिले में नौ व्यापारियों को जुए के एक फर्जी मामले में फंसाकर उनसे 63 लाख रुपये की जबरन वसूली करने के आरोप में एक पुलिस इंस्पेक्टर और एक हेड कांस्टेबल पर मामला दर्ज किया गया है। इस मामले में आरोपी वाईके गोहिल उस समय टंकारा पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर थे। उन्होंने बताया कि उन्हें और सह-आरोपी हेड कांस्टेबल महिपतसिंह सोलंकी को पिछले हफ्ते निलंबित कर दिया गया था।
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इंस्पेक्टर और हेड कांस्टेबल की गिरफ्तारी अभी बाकी
वहीं एसएमसी के पुलिस उपाधीक्षक केटी कमारिया ने बताया, 'राज्य निगरानी प्रकोष्ठ की तरफ से आंतरिक जांच में उनके खिलाफ आरोपों में तथ्य पाए जाने के बाद इंस्पेक्टर आरजी खाट की शिकायत पर बुधवार को उन पर मामला दर्ज किया गया। उन्हें अभी गिरफ्तार किया जाना है।' एफआईआर के अनुसार, इंस्पेक्टर वाईके गोहिल और हेड कांस्टेबल महिपतसिंह सोलंकी ने 26 अक्तूबर को टंकारा में एक रिसॉर्ट पर छापा मारा और मोरबी और राजकोट के नौ लोगों को ताश खेलते हुए पाया था।

इंस्पेक्टर ने ऐसे रची थी जबरन वसूली की साजिश
एफआईआर में लिखा गया है कि नौ लोग नकद में जुआ नहीं खेल रहे थे, लेकिन इंस्पेक्टर वाईके गोहिल ने अपने मोबाइल फोन से रिकॉर्डिंग शुरू कर दी और उन्हें जुए के मामले में फंसाने की धमकी दी और वीडियो को मीडिया के साथ साझा करने की भी धमकी दी। एफआईआर में कहा गया है कि इंस्पेक्टर वाईके गोहिल ने मामला दर्ज न करने के लिए उनसे 15 लाख रुपये मांगे और अंत में 12 लाख रुपये पर समझौता हुआ, जिसे उसने  हेड कांस्टेबल महिपतसिंह सोलंकी से मोरबी हाईवे पर एक व्यक्ति से वसूलने के लिए कहा। पैसे लेने के बावजूद, वह नौ लोगों को टंकारा पुलिस स्टेशन ले गया और उन्हें लॉक-अप में बंद कर दिया, जिसके बाद उसने मीडिया के आने से पहले उन्हें जमानत दिलाने के लिए उनमें से प्रत्येक से 6 लाख रुपये मांगे, इसके बाद एफआईआर में गलत प्रविष्टियां कीं, उनके फोन लौटाए और प्रेस नोट जारी नहीं किया, आदि। 
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एफआईआर में गलत सूचना लिखे जाने पर हुआ था खुलासा
एफआईआर में आगे कहा गया है कि नौ लोगों ने 51 लाख रुपये नकद दिए और इंस्पेक्टर वाईके गोहिल ने कुछ नाम बदलकर अगले दिन एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की। एफआईआर के अनुसार, राज्य के पुलिस महानिदेशक विकास सहाय ने 4 दिसंबर को एसएमसी को कथित गलत कामों के बारे में समाचार पत्रों में रिपोर्ट प्रकाशित होने के बाद मामले की जांच करने का निर्देश दिया। इंस्पेक्टर वाईके गोहिल और हेड कांस्टेबल महिपतसिंह सोलंकी पर बीएनएस की धारा 199 (सरकारी कर्मचारी द्वारा कानून के तहत दिए गए निर्देशों की अवहेलना), 233 (झूठे साक्ष्य का उपयोग करना), 228 (झूठे साक्ष्य गढ़ना), 201 (सरकारी कर्मचारी द्वारा चोट पहुंचाने के इरादे से गलत दस्तावेज तैयार करना), 336 (जालसाजी) और 308 (जबरन वसूली) के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने बताया कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराएं भी उनके खिलाफ लगाई गई हैं।
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