गुजरात उच्च न्यायालय ने मंगलवार को 2008 के सीरियल ब्लास्ट मामले में विशेष अदालत के फैसले को बरकरार रखा। इस मामले में 56 लोग मारे गए थे और 246 घायल हुए थे। उच्च न्यायालय ने 38 दोषियों की मौत की सजा और 11 अन्य को आजीवन कारावास की सजा में राहत देने से इनकार कर दिया।
न्यायालय के आदेश में क्या, मुआवजे का भुगतान कब तक?
अदालत ने राज्य सरकार को पीड़ितों को मुआवजा देने का भी आदेश दिया। मृतकों के परिजनों को 10 लाख रुपये, गंभीर रूप से घायलों को 5 लाख रुपये और सामान्य रूप से घायलों को 1 लाख रुपये दिए जाएंगे। यह भुगतान 31 मार्च, 2027 तक किया जाना अनिवार्य है।
सरकारी वकील ने फैसले पर क्या कहा?
गुजरात हाई कोर्ट के फैसले पर मंगलवार को सरकारी वकील (स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर) ने कहा, इस मामले की सुनवाई मार्च 2025 से रोजाना हो रही थी। आज गुजरात हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने अपना फैसला सुनाया। वेबसाइट पर अभी तक विस्तृत फैसला अपलोड नहीं किया गया है। न्यायालय के फैसले को पूरा पढ़ने के बाद ही मैं इस पर विस्तार से टिप्पणी कर पाऊंगा।
11 दोषियों की अपील भी खारिज
उन्होंने कहा फिलहाल, ये स्पष्ट है कि गुजरात हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट द्वारा 38 दोषियों को सुनाई गई मौत की सजा को बरकरार रखा है। कोर्ट ने उन 11 दोषियों की अपील भी खारिज कर दी है, जिन्हें मौत की सजा के बजाय उम्रकैद (जब तक वे जीवित रहेंगे, तब तक जेल में रहेंगे) की सजा सुनाई गई थी।
आतंकवाद पीड़ितों को सरकार से क्या मदद मिलेगी?
18 साल पहले हुई इस वारदात के पीड़ितों को सरकार की तरफ से दिए जाने वाले मुआवजे के बारे में सरकारी वकील ने बताया कि गुजरात हाई कोर्ट ने जान गंवाने वालों के परिवारों को 10 लाख रुपये, गंभीर रूप से घायल लोगों को 5 लाख रुपये और मामूली रूप से घायल लोगों को 1 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। पूरा विवरण कोर्ट के विस्तृत आदेश को पढ़ने के बाद ही सामने आएगा।
धमाका कब हुआ, जांच में क्या साबित हुआ?
26 जुलाई, 2008 को अहमदाबाद शहर में कई ब्लास्ट हुए थे। इसके दो दिन बाद सूरत में भी बम मिले थे। शहर की क्राइम ब्रांच की जांच में 100 से अधिक लोगों को आरोपी बनाया गया था। कुल 78 लोगों पर मुकदमा चलाया गया।
विशेष अदालत के फैसले में क्या?
फरवरी 2022 में, एक विशेष अदालत ने 49 लोगों को दोषी पाया था। वहीं, 28 अन्य को बरी कर दिया गया था। बरी किए गए लोगों में मुबीन शेख और मंसूर पीरभॉय शामिल थे। इन पर साजिश रचने और धमकी भरे ईमेल भेजने का आरोप था। उन्होंने आतंकी हमले की जिम्मेदारी भी ली थी। ट्रायल कोर्ट ने एक अप्रूवर को माफ कर दिया था। चार अन्य अप्रूवर, जिन्होंने बाद में अपने बयान वापस ले लिए थे, उन्हें दोषी ठहराया गया।
18 पहले हुए हमलों का मकसद क्या था?
2008 के ब्लास्ट अस्पतालों पर पहला हमला थे। आरोपियों द्वारा भेजे गए ईमेल में दावा किया गया था कि यह 2002 के गोधरा-बाद के गुजरात हिंसा का बदला था।