मोरबी पुल ढहने की घटना के संबंध में चल रही सुनवाई से गुजरात हाईकोर्ट के जस्टिस समीर जे. दवे ने गुरुवार को अलग कर लिया। ओरेवा ग्रुप मैनेजर दिनेश दवे द्वारा दायर जमानत याचिका दायर की गई थी।
मोरबी पुल ढहने की घटना के संबंध में चल रही सुनवाई से गुजरात हाईकोर्ट के जस्टिस समीर जे. दवे ने गुरुवार को अलग कर लिया। ओरेवा ग्रुप मैनेजर दिनेश दवे द्वारा दायर जमानत याचिका दायर की गई थी। पिछले साल मोरबी पुल ढहने में अपनी कथित भूमिका के लिए जेल में है, जिसमें 135 लोग मारे गए थे।
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जब मामला उनके सामने सुनवाई के लिए आया तो जस्टिस दवे ने खुद को मामले से अलग करते हुए कहा कि क्या यह मोरबी है? मेरे सामने नहीं । पिछले महीने, उन्होंने तीन आरोपियों (सुरक्षा गार्डों) को जमानत दी थी और इस महीने की शुरुआत में उन्होंने इसी मामले में दो आरोपियों (टिकट क्लर्कों) को जमानत दी थी।
दिनेश दवे उन दस आरोपियों में से एक हैं, जिन्हें पिछले साल अक्तूबर में गुजरात के मोरबी शहर में ब्रिटिशकालीन झूला पुल ढहने के बाद पुलिस ने गिरफ्तार किया था। ओरेवा ग्रुप द्वारा बनाए और संचालित पुल के मरम्मत के बाद दोबारा खोले जाने के कुछ दिनों बाद ढह जाने से कम से कम 135 लोगों की मौत हो गई और 56 गंभीर रूप से घायल हो गए।
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मामले में कुल 10 आरोपियों को नामित किया गया है जो हैं , जयसुख पटेल (ओरेवा ग्रुप के एमडी) देवांग परमार, दिनेश दवे और दीपक पारेख (ओरेवा ग्रुप के प्रबंधक), प्रकाश परमार (उपठेकेदार), अल्पेश गोहिल, मनसुख टोपिया , महादेव सोलंकी, मुकेश चौहान, दिलीप गोहिल (टिकट बुकिंग क्लर्क/सुरक्षा गार्ड)।