गुजरात हाईकोर्ट ने शुक्रवार को अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि निर्माण की कुल लागत पर लगने वाले जीएसटी में जमीन के मूल्य को ध्यान में नहीं रखा जा सकता है। जहां पर जमीन की कीमत अलग से दिखाई जाती है, वहां सिर्फ निर्माण की लागत पर ही जीएसटी लगना चाहिए।
निर्माणाधीन फ्लैटों पर जीएसटी लगाने से पहले जमीन का वास्तविक मूल्य घटाए जाने संबंधी गुजरात हाईकोर्ट के फैसले पर मकान खरीदारों पर टैक्स का बोझ कम होने की उम्मीद है। अभी ऐसे फ्लैटों पर जमीन की पूरी कीमत पर जीएसटी लगाया जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि शहरी क्षेत्रों या महानगरों में जमीन का सही मूल्य फ्लैट के एक तिहाई मूल्य से बहुत ज्यादा होता है। एनए शाह एसोसिएट्स के पार्टनर नरेश सेठ ने कहा कि हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि निर्माण लागत पर ही जीएसटी लगाया जाए।
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गुजरात हाईकोर्ट ने शुक्रवार को अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि निर्माण की कुल लागत पर लगने वाले जीएसटी में जमीन के मूल्य को ध्यान में नहीं रखा जा सकता है। जहां पर जमीन की कीमत अलग से दिखाई जाती है, वहां सिर्फ निर्माण की लागत पर ही जीएसटी लगना चाहिए।
निर्माण लागत पर लगने वाले जीएसटी में जमीन का वास्तविक मूल्य घटाना जरूरी: हाईकोर्ट
हालांकि गुजरात उच्च न्यायालय का यह फैसला वहां लागू होगा, जहां बिक्री समझौते में जमीन और निर्माण सेवाओं की कीमत को स्पष्ट बताया गया हो। ग्राहक बुकिंग के समय फ्लैट खरीदता है, उसे राहत मिलेगी। रियल एस्टेट में कंस्ट्रक्शन सेवाओं पर 18 फीसदी जीएसटी अभी लगता है।
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कोर्ट ने पाया कि जहां पर जमीन की कीमत पूरी तरह स्पष्ट है, वहां पर कीमतों में एक तिहाई की अनिवार्य कटौती लागू नहीं हो सकती है। इस मामले में केंद्र सरकार ने कहा था कि जब बिल्डर अपनी स्कीम बेचेगा तो जमीन की कीमत पर 33 फीसदी और बाकी रकम यानी 66 फीसदी पर जीएसटी लगेगा।